September 16, 2026

उत्तर कोरिया ने दागीं बैलिस्टिक मिसाइलें और ड्रोन्स, अमेरिका-दक्षिण कोरिया की बढ़ी टेंशन

Kim Jong Un

उत्तर कोरिया ने कोरियाई प्रायद्वीप में जारी तनाव के बीच एक बार फिर अपनी सैन्य ताकत का जोरदार प्रदर्शन किया है। देश की पांच सैन्य यूनिटों ने मिसाइलों, लंबी दूरी की तोपों और हमलावर ड्रोन्स के साथ एक बड़ा लाइव-फायर अभ्यास किया। यह शक्ति प्रदर्शन ऐसे समय में हुआ है जब अमेरिका और उत्तर कोरिया के बीच कूटनीतिक बातचीत पूरी तरह से ठप है।

मिसाइल परीक्षण और दक्षिण कोरिया की नजर

  • 250 किमी तक मार करने वाली मिसाइलें: दक्षिण कोरियाई सेना के अनुसार, उत्तर कोरिया के पूर्वी तटीय शहर वॉनसान के पास से कई कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें दागी गईं। ये मिसाइलें करीब 250 किलोमीटर उड़ने के बाद पूर्वी समुद्री क्षेत्र में गिरीं।

  • दक्षिण कोरिया के लिए सीधा खतरा: दक्षिण कोरिया का मानना है कि इतनी दूरी तक मार करने वाली मिसाइलों का सीधा इस्तेमाल उसके क्षेत्र में मौजूद सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने के लिए किया जा सकता है।

  • हथियारों का जखीरा: सरकारी मीडिया के मुताबिक, इस अभ्यास में हमलावर ड्रोन, सामरिक क्रूज मिसाइल, सामरिक बैलिस्टिक मिसाइल और बड़े कैलिबर वाले मल्टीपल रॉकेट लॉन्चर का इस्तेमाल हुआ। उत्तर कोरियाई सेना के मार्शल पाक जोंग चोन ने इस पूरे अभ्यास का निरीक्षण किया।

अमेरिका से तनाव और कूटनीतिक गतिरोध

  • ‘फ्रीडम एज’ का जवाब: यह अभ्यास अमेरिका, दक्षिण कोरिया और जापान के पांच दिवसीय संयुक्त ‘फ्रीडम एज’ सैन्य अभ्यास के करीब तीन सप्ताह बाद हुआ है। प्योंगयांग हमेशा से इन संयुक्त सैन्य अभ्यासों को अपने खिलाफ सीधा उकसावा मानता है।

  • ट्रंप की पहल का असर नहीं: पिछले महीने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने किम जोंग उन के साथ संबंधों को सुधारने के लिए दक्षिण कोरिया के साथ होने वाले सैन्य अभ्यासों का दायरा कम किया था। अमेरिका की कोशिश बातचीत का रास्ता खोलने की थी, लेकिन उत्तर कोरिया ने केवल सैन्य अभ्यास घटाने को अपनी नीति में बदलाव के लिए नाकाफी माना है।

  • मजबूत होता किम जोंग उन का रुख: विशेषज्ञों का कहना है कि रूस और चीन के साथ बढ़ते रक्षा सहयोग और परमाणु कार्यक्रम में प्रगति के बाद किम जोंग उन खुद को रणनीतिक रूप से अधिक मजबूत मान रहे हैं। वह अमेरिका के सामने कमजोर पक्ष बनकर नहीं, बल्कि अपनी शर्तों और परमाणु दर्जे की स्वीकृति के साथ ही कूटनीतिक मेज पर लौटना चाहते हैं।