September 16, 2026

ब्रिक्स गाला डिनर में वेज मेन्यू पर सियासी संग्राम: राहुल ने छोले-भटूरे की फोटो शेयर कर कसा तंज

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नई दिल्ली के भारत मंडपम में 12-13 सितंबर को आयोजित ब्रिक्स समिट 2026 का गाला डिनर राजनीतिक विवाद का केंद्र बन गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 11 सदस्य और पार्टनर देशों के प्रतिनिधियों के लिए आयोजित इस डिनर में सिर्फ शाकाहारी व्यंजन परोसे गए। इस वेजिटेरियन मेन्यू को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच तीखी बयानबाजी शुरू हो गई है। मुख्य विपक्षी दल ने इसे दुनिया पर शाकाहार थोपने का प्रयास बताया है, वहीं सत्ता पक्ष ने इसे अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम की उपलब्धियों को कमतर आंकने की कोशिश करार दिया है।

राहुल गांधी और पवन खेड़ा का सरकार पर निशाना

कांग्रेस ने विदेशी मेहमानों को केवल वेज फूड परोसने पर केंद्र सरकार को घेरा है। पार्टी के सांसद राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर छोले-भटूरे की एक तस्वीर साझा करते हुए मेन्यू पर सवाल उठाए। उन्होंने लिखा कि 80 प्रतिशत भारतीय नॉन-वेजिटेरियन हैं और भारत का नॉन-वेज भोजन बहुत स्वादिष्ट होता है। अपने पोस्ट में उन्होंने यह भी जिक्र किया कि उनकी बहन के हाथ के बने छोले-भटूरे भी काफी टेस्टी होते हैं।

कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने भी इस मुद्दे पर मोर्चा खोला। उन्होंने X पर लिखा कि भाजपा अपनी खान-पान की पसंद पहले से भारतीयों पर थोप रही है और अब दुनियाभर के देशों में अपने मित्रों पर भी इसे थोपना शुरू कर दिया है। खेड़ा के मुताबिक, भारत दुनिया का सबसे समृद्ध और विविधता वाला देश है, जहां कई बेहतरीन नॉन-वेज व्यंजन बनते हैं जिनका विदेशी भी आनंद लेते हैं। उन्होंने सवाल किया कि मोदी सरकार भारत की इस संस्कृति को क्यों छिपा रही है और क्या उसे देश की असली पहचान से शर्म आती है।

किरेन रिजिजू का कांग्रेस पर पलटवार

कांग्रेस नेताओं के इन आरोपों पर भाजपा की तरफ से केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। रिजिजू ने X पर अपने पोस्ट में लिखा कि उन्हें यकीन नहीं हो रहा कि कांग्रेस ब्रिक्स देशों के नेताओं को परोसे गए खाने पर भी राजनीति कर रही है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि विदेशी मेहमानों ने भारतीय शाकाहारी व्यंजनों का भरपूर लुत्फ उठाया, जिनमें देश की अलग-अलग क्षेत्रीय संस्कृतियों और पोषण की झलक शामिल थी। रिजिजू ने आरोप लगाया कि कांग्रेस समिट की उपलब्धियों पर फोकस करने के बजाय डिनर मेन्यू पर सवाल उठाकर इस राजनयिक कार्यक्रम का महत्व कम करने की कोशिश कर रही है, क्योंकि वह अपने देश को आगे बढ़ता हुआ नहीं देख सकती।

सपा ने उठाए ब्रिक्स समिट के नतीजों पर सवाल

इस सियासी खींचतान के बीच समाजवादी पार्टी ने ब्रिक्स सम्मेलन के सीधे आउटकम पर सवाल खड़े किए हैं। सपा सांसद राम गोपाल यादव ने दावा किया कि इस समिट का कोई ठोस परिणाम नहीं निकला।

यादव ने कहा कि दुनिया को परेशान कर रहे युद्धों को रोकने के लिए बहुत कुछ किया जा सकता था। उनके मुताबिक, अगर ब्रिक्स देश रूस-यूक्रेन युद्ध रोकने या ईरान संघर्ष से जुड़े पक्षों को समझाने के लिए एकजुट होते, तो आज स्थिति कुछ और होती। उन्होंने 45 पेज के जॉइंट स्टेटमेंट का हवाला देते हुए कहा कि इसमें मध्य पूर्व के तनाव पर गंभीर चिंता व्यक्त की गई और संयम, संवाद व कूटनीति से विवाद सुलझाने का आह्वान किया गया, लेकिन इसका जमीन पर कोई नतीजा नहीं दिखा और अर्थव्यवस्थाएं अस्थिरता का दंश झेल रही हैं।