मराठी सीखने के विवाद पर CM फडणवीस का सामने आया बयान, कहा- “भाषा के आधार पर अन्याय नहीं होगा”
मुंबई: महाराष्ट्र में मराठी सीखने की अनिवार्यता के मुद्दे पर सीएम फडणवीस का बयान सामने आया है। उन्होंने कहा है कि इस मामले पर राजनीति की जा रही है, लेकिन राज्य सरकार किसी की रोजी-रोटी पर आंच नहीं आने देगी। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में काम करने वाले उत्तर भारतीय रिक्शा और टैक्सी चालकों का कोई लाइसेंस रद्द नहीं किया जा रहा है।
सीएम फडणवीस ने कहा कि अगर रिक्शा-टैक्सी चालकों को मराठी सीखने के लिए और समय चाहिए, तो सरकार समय सीमा बढ़ाने के लिए भी तैयार है। सरकार की सिर्फ इतनी अपेक्षा है कि वे बोलचाल की मराठी सीखें। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार किसी के साथ अन्याय नहीं होने देगी।
महिला आरक्षण और डीलिमिटेशन के मुद्दे पर कांग्रेस पर साधा निशाना
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने महिला आरक्षण और डीलिमिटेशन के मुद्दे पर कांग्रेस और पी. चिदंबरम पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस इस मामले में झूठ बोल रही है। उन्होंने कहा कि 2023 में भी कांग्रेस महिला आरक्षण का विरोध कर रही थी, लेकिन उसे पता था कि सरकार के पास बहुमत है और बिल पास हो जाएगा। इसलिए कांग्रेस ने बहती गंगा में हाथ धो लिया। फडणवीस ने कहा कि 2023 में पारित महिला आरक्षण कानून में ही डीलिमिटेशन को जोड़ा गया था। कोविड के कारण जनगणना नहीं हो सकी और अब 2029 तक नई जनगणना कराना संभव नहीं है। ऐसे में उसके आधार पर डीलिमिटेशन करना भी संभव नहीं होगा। इसलिए सरकार ने बीच का रास्ता निकालते हुए पुरानी जनगणना के आधार पर डीलिमिटेशन लागू करने का रास्ता सुझाया है।
फडणवीस ने आरोप लगाया कि कांग्रेस इसका विरोध इसलिए कर रही है क्योंकि वह महिलाओं को आरक्षण देना ही नहीं चाहती। उन्होंने कहा कि कांग्रेस किसी भी हालत में 2029 तक महिलाओं को आरक्षण नहीं देना चाहती। बता दें कि हाल ही में ये जानकारी सामने आई थी कि महाराष्ट्र में गैर-मराठी ऑटो रिक्शा-टैक्सी चालक RTO की कार्रवाई के खिलाफ विरोध कर रहे हैं। कुर्ला में तो हालात ऐसे बन गए कि रिक्शा चालकों ने काम भी बंद करने का आंदोलन शुरू कर दिया। दरअसल गैर-मराठी ऑटो रिक्शा-टैक्सी चालकों का कहना है कि सरकार की इस पूरी कार्रवाई के पीछे राजनीति की जा रही है।
