विकसित भारत @2047 गांवों की ओर
डा. जयशंकर
केन्द्र में भारतीय जनता पार्टी नीत एन डी ए की सरकार ने वर्ष 2020 – 2021 में संकल्प लिया कि भारत देश जब 1947 में अपनी आजादी की 100 वर्षगांठ मनाएगा तब तक हम भारत को एक विकसित राष्ट्र के रूप में अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करके , विभिन्न क्षेत्रों में मांग के अनुसार अपनी उत्पादन क्षमता को समृद्ध कर आयात- निर्यात को संतुलित कर , सर्वाधिक लोगों को उनकी काबिलियत के अनुसार रोजगार और मुहैया कराकर, संपूर्ण तंत्र का डिजिटलाइजेशन कर, शिक्षा, स्वास्थ्य, प्रौद्योगिकी, तकनीक, विभिन्न क्षेत्रों में नये-नये स्वानुसंधानों के माध्यम से उनको विश्व स्तरीय बनाकर, मानक स्तर पर प्रति व्यक्ति आय को करके, विकास के साथ -साथ ही विभिन्न दृष्टिकोणों से शहरी क्षेत्र और ग्रामीण क्षेत्रों के अन्तर को कम से कर हम भारत देश का सर्वांगीण तथा समावेशी विकास कर पूर्ण विकसित राष्ट्रों – संयुक्त राष्ट्र अमेरिका- चीन – रूस, यूनाइटेड किंगडम, जर्मनी – जापान, इटली – आस्ट्रेलिया की श्रेणी में लाकर हम स्वदेश को आर्थिक, सामाजिक, शैक्षणिक, स्वास्थ्य, रोजगार, राजनैतिक स्थिरता को सुदृढ़ बनाकर, सामाजिक समरसता, स्वच्छता की दृष्टि से एक वैश्विक शक्ति के रूप में पहचान दिलाएंगे। इसके लिए भारत सरकार के नीति आयोग और विभिन्न मंत्रालयों ने वर्ष 2021-2023 से ही इस लक्ष्य की प्राप्ति हेतु लक्ष्य के अनुरूप संतुलित परिकल्पना और रोडमैप तैयार कर बिना रूके, बिना थके वार लेवल पर विभिन्न नीतियों और योजनाओं के माध्यम से कार्य कर रहें। वर्तमान में देश एक ऐसे ऐतिहासिक परिवर्तन के मुहाने पर खडा है जहां से कुछ पूर्ण विकसित चुनिंदा देशों जैसे अमेरिका, चीन, रूस, जापान, फ्रांस, यूनाइटेड किंडम, जर्मनी, आस्ट्रेलिया की पंक्ति में सीना -तान कर खडा होने के लिए विकसित भारत @ 2047 के विजन को साकार करने के लिए और प्रत्येक सेक्टर- औद्योगिक एवं विनिर्माण ,कृषि, शिक्षा – स्वास्थ्य, पर्यावरण एवं हरित क्षेत्र, बुनियादी अवसंरचना, प्रौद्योगिकी एवं अनुसंधान, डिजिटलाइजेशन, संतुलित आयात-निर्यात, श्रम-श्रमिक प्रशिक्षण, मानव शक्ति का सही सदुपयोग आदि प्रत्येक क्षेत्र में लक्ष्य के अनुकूल परिणामों को हासिल करने के लिए संतुलित एवं सकारात्मक विशेष रणनीति के अनुसार आगे बढना होगा। इसको साकार करने के लिए लगभग 35 करोड़ युवा शक्ति की सतत 2047 तक आवश्यकता होगी। साथ ही विश्व की महाशक्ति देश संयुक्त राज्य अमेरिका, चीन, रसिया, फ्रांस, जापान, जर्मनी, यूनाइटेड किंगडम, आस्ट्रेलिया जैसे देशों की पंक्ति मे भी सीना चौड़ा कर खडा होने लिए तथा संयुक्त राष्ट्र संघ के सुरक्षा परिषद की भी स्थायी सदस्यता प्राप्त करने और वीटो का अधिकार प्राप्त करने के लिए अपनी जीडीपी को सम्मान जनक स्थिति में लाने, पूर्ण विकसित राष्ट्रों के बराबर अपने नागरिकों की प्रति वर्ष आय करने के लिए भी संपूर्ण ताकत के साथ सकारात्मक और समावेशी विजन के साथ प्रत्येक सेक्टर को समृद्ध और संपन्न बनाने के लिए विकास की दौड़ में सदैव अग्रसर बने रहना अतिआवश्यक है। वर्ष 2047 ही वह महत्वपूर्ण साल व समय होगा जब भारत देश अपनी स्वतंत्रता की 100 वीं वर्षगांठ मनाएगा। इसीलिए भारत सरकार के द्वारा स्वतंत्रता की 100वीं वर्षगांठ जैसे महत्वपूर्ण अवसर को अति उत्साह के साथ वैश्विक स्तर पर एक यादगार महामहोत्सव के रूप मे मनाने के लिए भी उस समय तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। यह महात्वाकांक्षी दृष्टि केवल आर्थिक समृद्धि तक ही सीमित नही है बल्कि इसमे सतत विकास, सामाजिक समानता, राष्ट्रीय सुरक्षा और वैश्विक प्रभाव का ढांचा भी शामिल है।भारत देश को 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए चार प्रमुख रणनीतिक, स्तंभों पर ध्यान केन्द्रित की जरूरत है – आर्थिक प्रतिस्पर्धात्मक, सुदृढ़ राष्ट्रीय सुरक्षा, सुरक्षित वैश्विक साझेदारियाँ एवं गठबंधन और मजबूत कानूनी आधार। ये सभी स्तंभ एक दूसरे से जुड़े हुए हैं और वैश्विक स्तर पर एक सशक्त, समावेशी, लचीले तथा प्रभावशाली भारत के निर्माण के लिए आवश्यक है।
आर्थिक प्रतिस्पर्धात्मकता, सतत विकास और राष्ट्रीय लक्ष्य
आर्थिक प्रतिस्पर्धात्मक एवं सतत विकास के अंतर्गत उत्पादकता बढाना, नवाचार को प्रोत्साहित करना और कारोबार को सुगम बनाने के लिए नियामकीय प्रक्रियाओं को सरल बनाना शामिल है। दीर्घकालिक समृद्धि और पर्यावरणीय लचीलेपन के लिए हरित प्रौद्योकियों और गतिशील इकोनॉमी के माडल के माध्यम से सतत विकास आवश्यक होगा।
मानव पूँजी का विकास और सामाजिक समानता
मानव पूँजी का विकास और सामाजिक समानता समावेशी विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। गुणवत्ता परक शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं तथा कौशल विकास में निवेश से देश के युवावर्ग को सशक्त और सक्षम बनाया जा सकेगा एवं उन्हें भविष्य की रोजगार की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार किया जा सकेगा। सामाजिक, क्षेत्रीय और लैंगिक असमानताओं को कम करने से सामाजिक समानता तथा समावेशी विकास को और बढावा मिलेगा।
विश्वस्तरीय अवसंरचना और डिजिटल परिवर्तन
विश्वस्तरीय अवसंरचना और डिजिटल परिवर्तन का विकास आर्थिक वृद्धि तथा वैश्विक स्पर्धात्मकता के लिए बहुत मायने रखता है। इसमें स्मार्ट शहरों, एकीकृत लाजिस्टिक्स नेटवर्क और मजबूत डिजिटल अवसंरचना का निर्माण शामिल है। ए आई (कृत्रिम बुद्धिमत्ता), इंटरनेट आफ थिंग(आईओटी) तथा ब्लाक चेन जैसी उभरती प्रौद्योकियों का लाभ उठाकर डिजिटल साक्षरता और नवाचार को गति दी जा सकती है और इनके बल पर विभिन्न क्षेत्रों मे उत्पादकता बढाई जा सकती है।
मजबूत राष्ट्रीय सुरक्षा और वैश्विक साझेदारियाँ
मजबूत राष्ट्रीय सुरक्षा और आंतरिक स्थिरता एक समृद्ध राष्ट्र के लिए अतिआवश्यक होती है क्योंकि इसके अभाव में किसी राष्ट्र के विकास की परिकल्पना करना असंभव है। राष्ट्रीय सुरक्षा और आंतरिक स्थिरता समृद्ध राष्ट्र की आधार – शिला होती है। रक्षाबलों का आधुनिकीकरण, साइबर सुरक्षा को सुदृढ़ करना, आंतरिक सुरक्षा प्रणालियों को मजबूत बनाना देश की संप्रभुता तथा स्थिरता की रक्षा के लिए आवश्यक है। इसमें समुदायों और अवसंरचना को सुरक्षित रखने के लिए आपदारोधी क्षमता का निर्माण एवं उसको मजबूत बनाना भी शामिल है। अपने हित को मद्देनजर रखते हुए विभिन्न देशों से कूटनीतिक राजनयिक संबंध, वैश्विक साझेदारियों और रणनीतिक प्रभाव को सुदृढ़ करना भारत का भू-राजनीतिक चैलेंजों से निपटने तथा वैश्विक स्तर पर अपनी स्थिति को ताकतवर बनाने में सक्षम भी बनाएगा। रणनीतिक गठबंधन व्यापार, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और सुरक्षा सहयोग को भी समृद्ध करेंगे। अंतर्राष्ट्रीय संगठनों में भारत के नेतृत्व को सुदृढ़ करने से वैश्विक शासन व्यवस्था को आकार देंने तथा राष्ट्रीय हितों की रक्षा करनें से ग्लोबल शासन व्यवस्था को आकार देंने और राष्ट्रीय हितों की रक्षा में बहुत मदद मिलेगी।
गांवों में बसती है भारत की आत्मा
ऐसा अक्सर कहा जाता है कि “भारत की आत्मा गांवों में बसती है।” यह बात शतप्रतिशत सही है। अत्यंत तीव्र गति से छोटे -बडे शहरों के बढ़ते दायरे अर्थात इनके क्षेत्रफल में बेतहाशा बृद्धि और विकास के बावजूद आज भी देश की लगभग 60% आबादी गांवों में रहती है। इनका संपूर्ण जीवन गांवों के संसाधन, वहाँ की अर्थव्यवस्था, किसानी – खेतीबारी, छोटे- मोटे गंवई उद्योग- धन्धों, कामकाजों पर ही पूर्ण रूप से निर्भर है। दूसरा तथ्य यह है कि कृषि क्षेत्र में दलहन, तेलहन, खाद्यान्नों, शाक- सब्जी के नवीन तकनीकों और उत्तम कोटि के बीजों के प्रयोग से दिन पर दिन बढ़ते उत्पादन, ग्रामीण इलाकों के लघु उद्योगों की अर्थात कुल मिलाजुलाकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था की हिस्सेदारी आज भी भारतीय अर्थव्यवस्था मे महत्वपूर्ण और सम्मानजनक हैं। इसका तात्पर्य यह की दिन पर दिन पूर्व की तुलना में व अन्य विकसित देशों की अर्थव्यवस्था एवं विकास – दर से ज्यादा मजबूती के साथ नये प्रतिमान स्थापित करती और कुलाचे लगाती हुई भारतीय अर्थव्यवस्था को ऊंचाई पर पहुंचाने में ग्रामीण अर्थव्यवस्था की भी अहम भूमिका है।
ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं का विकास
2014 के बाद शहरी क्षेत्र के साथ- साथ इनके समानान्तर ग्रामीण इलाकों के सर्वांगीण और समावेशी विकास के लिए केन्द्र एवं राज्य सरकारों के द्वारा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए स्कूल,कालेज की बिल्डिंग/भवन, उनके क्लास रूम्स – संसाधन, प्रशिक्षित अध्यापकों की उपलब्धता,कक्षा- शिक्षण – प्रक्रिया को गुणवत्ता पूर्ण बनाने के लिए और विद्यार्थियों की ग्राह्यता को संमृद्ध- सुगम बनाने के लिए समय-समय पर नित नवीन अनुसंधानित नई शिक्षण तकनीकों से आवश्यकता अनुकूल शिक्षकों को उनसे अवगत कराने के लिए प्रत्येक स्तर पर टीचर्स – प्रशिक्षण की व्यवस्था करना, उत्तम स्वास्थ्य के लिए गांव, ब्लॉक तहसील, जिला मुख्यालयों के चिकित्सा केन्द्रों /अस्पतालों पर स्वास्थ्य संसाधनों की बेहतर उपलब्धता, स्पेशलिस्ट डाक्टर्स के सुझाव एवं उपचार में उनके दिशा निर्देशन हेतु आडियो-विडियो तकनीकी संसाधनों / कान्फ्रेंसिंग सिस्टम की मानकीय सुव्यवस्था,पंचायत स्तर पर नाले- नालियों-मार्गों की मरम्त उनके निर्माण, सतत साफ -सफाई के लिए कर्मचारियों एवं इस कार्य में प्रयोग मे लाई जाने वाली सामग्रियों की व्यवस्था, पानी -बिजली की आवश्यकता माकूल उपलब्धता, गांवों के भीतर एवं बाहर तथा उनकी मुख्य राजमार्गों से स्टेंडर्ड कनेक्टिविटी, पंचायत व्यवस्था की सुदृढता, गांवों के कृषि भूमि के साथ साथ अन्य जमीनों का उनके नक्शों का डिजिटलीकरण के साथ- साथ कृषि भूमि की डिजिटल रजिस्ट्री/डिजिटलीकरण के माध्यम से स्पष्ट भूमि का स्वामित्वीकरण तथा डिजिटल इंडिया भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम (DILRMP) में ब्लॉकचेन को एकीकृत करना,राज्य एवं केन्द्र सरकारों द्वारा गांवों के समग्र विकास के लिए समय- समय पर लायी जा रही विभिन्न योजनाओं का जमीनी स्तर पर समुचित कार्यान्वयन, तत्संबंधी कार्यों के लिए दिए गए दिशाऐनिर्देशों का विभिन्न स्तरों पर कठोरता के साथ अनुपालन एवं तत्संबधी कार्यो के लिए सरकार द्वारा उपलब्ध कराई गई राशि का सही सदुपयोग, उनकी समयबद्ध पूर्णता की मानीटरिंग, गुणवत्ता तथा फंड व्यय की प्रत्येक पायदान पर आडिटिंग की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है।
किसानों की आर्थिक मजबूती और कृषि सहायता योजनाएँ
केन्द्र सरकार ने किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए प्रत्येक किसान का जीरो बैलेंस के आधार पर बैंकों में जन धन खाता खुलवा कर वर्ष में तीन किश्तों में कुल छ: हजार रूपये सतत भेज रही है। यही नही कृषि कार्य एवं कृषि व्यवसाय के लिए कृषि ऋण भी आसानी से उपलब्ध करा रही है। साथ ही अति वृष्टि-अनावृष्टि, आंधी -तूफान, ओला -आग लगने जैसी आपदाओं से फसलों के नुकसान की भरपाई के लिए किसानों की त्वरित मदद हेतु फसल बीमा संबंधी नामिनल प्रिमियम पर अनेक योजनाएं चला रही है जिसका उपयोग कर देश के अधिकांश छोटे- बडे किसान लाभान्वित हो रहें हैं।किसानी खेती और उनके उत्पादों पर सरकार से मिलने वाली सब्सिडी बिचौलियों के हाथ में न जाकर सीधे प्रत्यक्ष नकद हस्तांतरण (Direct Cash Transfers ) के माध्यम से सीधे अब संपूर्ण राशि किसानों के खाते में जा रही है।यही नही सरकार सिंचाई व्यवस्था को सुनिश्चित कर, खेती कार्य का यंत्रीकरण कर,किसानों को जलवायु- रोधी बीज किस्मों की आसानीपूर्वक उपलब्धता सुनिश्चित कर, जलवायु- स्मार्ट कृषि के माध्यम से किसानों को जागरूक बनाकर भूमि की उर्बरता को बढाने के लिए भी अनेक प्रोत्साहन योजनाएं चला रही है। भारत सरकार राज्य सरकारों के माध्यम से कृषि कार्य में कटाई एवं उत्पादन के बाद होने वाले नुकसान को मिनिमाइज करने के लिए खेतों और मंडियों में शीत भंडारण व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए सब्सिडी रेट पर ऋण भी उपलब्ध करा रही है। किसानों को उनके उत्पाद का सही मूल्य दिलाने के लिए महंगाई के अनुसार दर का निर्धारण कर बिचौलिए के जाल में फंसे बिना कृषि मंडियों के माध्यम से स्वयं जाकर निर्धारित दर पर सही तौल देनें वाले इलेक्ट्रॉनिक कांटे से बेचने और नकद दाम मिलने के सिस्टम को भी सरकार दिन पर दिन सुदृढ़ कर रही है।साथ ही साथ सरकार के प्रयास से कृषि बाजार और निर्यात (APMC) का भी समय के साथ विस्तार हो रहा है और उत्तम बीज की उपलब्धता, सिंचाई की सही व्यवस्था के साथ सरकार अनुबंध खेती को भी अनुमति के साथ प्रोत्साहन दे रही है। भारत में चावल, मसाले, फल और सब्जियों जैसी उच्च क्षमता वाली वस्तुओं के लिए मूल्य श्रृंखलाओं पर ध्यान केन्द्रित कर कृषि निर्यात और डेयरी उत्पादों, अण्डों, समुद्री और तालाबिय मछली, मीट, मधु निर्यात को मौजूदा स्थिति से बढाकर आगामी कुछ वर्षों के भीतर100 बिलियन अमेरिकी डालर के पार पहुंचाने की योजना पर केन्द्र सरकार गंभीरता से कार्य कर रही है। इनके अलावा किसानों की आय बढाने के लिए संतुलित ढंग से इथेलान समिश्रण कार्यक्रम को ज्यादा से ज्यादा विस्तार देकर अन्नदाता के साथ- साथ ऊर्जादाता भी बना रही है।
ग्रामीण आवास, स्वच्छता, पेयजल और महिला सशक्तिकरण
ग्रामीण क्षेत्रों के रहन-सहन को स्तरीय बनाने और बाधा मुक्त करने के उद्देश्य से मध्यम वर्गीय, गरीब वर्ग को इज्जत घर (पक्का शौचालय ) के साथ साथ पक्का घर भी उपलब्ध करा रही है। अब तक प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजनाओं के माध्यम से एवं पंचायत योजना के माध्यम से संपूर्ण देश में सात करोड़ से अधिक परिवारों को पक्का घर और 15 करोड़ से अधिक परिवारों को इज्जत घर उपलब्ध कराया जा चुका है। आगामी वर्ष में तीन करोड़ से अधिक आवास और उसके दो गुना इज्जत घर उपलब्ध कराने की योजना पर कार्य कर रही है।वर्तमान में प्रत्येक घर तक शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया जा चुका है। पी एम जी एस वाई के तहत हर गांव के भीतर और बाहर पक्की सडके, बिजली की उपलब्धता को सुनिश्चित किया गया है। महिला सशक्तिकरण के लिए स्वयं सहायता समूहों को प्रधानमंत्री मुद्रा योजना से जोड़कर ग्रामीण महिलाओ को आर्थिक रूप से स्वतंत्र और सबल सक्षम बनाया जा रहा है।
ग्रामीण रोजगार, आजीविका और पंचायत आधारित विकास
ग्रामीण जनों को रोजगार संपन्न बनाने और उनकी आय बढाने के लिए सरकार समय के साथ विभिन्न योजनाओं को लागू करने के साथ साथ उनको जमीनी स्तर पर कार्यान्वित भी कर रही है। जैसे मनरेगा योजना के स्थान पर रोजगार और आजीविका गारंटी मिशन (VB-G RAM G) जहां मनरेगा मे 100 दिन का रोजगार मिल रहा था वहीं पर एक जुलाई 2026 से लागू इस योजना मे लोगों को 125 दिन का रोजगार मिल रहा है। इसके माध्यम से भविष्य के जल संकट को देखते हुए जल संरक्षण और टिकाऊ बुनियादी ढांचे का निर्माण किया जा रहा है। गांवों के समग्र व समावेशी विकास के लिए अब योजनाएं न कागज पर चलती हैं न ही ऊपर से थोपी जा रहीं हैं बल्कि ग्राम पंचायतों तथा स्थानीय स्तर के निर्णयों के माध्यम से समुदाय आधारित विकास पर बल दिया जा रहा है। इस प्रकार हम कह सकते हैं कि गांवों का इसी गति से विकास होता रहा तो विकसित भारत के सपनों को साकार बनाने में अहम भूमिका अदा करते हुए भारत की तकदीर और तस्वीर दोनों बदली हुई दिखाई देगी।
