जेडी वेंस ने ईरानी नेता मोहसेन रेजाई को भेजा लेटर, ट्रंप के हमले के संकेत

JD Vance

मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच जारी टकराव के बीच एक बड़ी कूटनीतिक खबर सामने आई है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने ईरान के सबसे ताकतवर कट्टरपंथी नेताओं में से एक से सीधा संपर्क साधा है। ‘द वॉल स्ट्रीट जर्नल’ की रिपोर्ट के मुताबिक, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश पर वेंस ने ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के वरिष्ठ सदस्य और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के पूर्व कमांडर मोहसेन रेजाई को एक पत्र भेजा है।

यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप आगामी मिडटर्म चुनाव के बाद ईरान पर बड़े सैन्य हमलों की संभावना पर विचार कर रहे हैं।

शांति प्रस्ताव का कोई ठोस ब्योरा नहीं

मामले की जानकारी रखने वाले सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट में बताया गया है कि उपराष्ट्रपति वेंस के पत्र और दोनों पक्षों के बीच हुई बातचीत में किसी भी शांति समझौते या प्रस्ताव का कोई ठोस खाका पेश नहीं किया गया है।

व्हाइट हाउस और तेहरान, दोनों ही स्तरों पर इस बातचीत को लेकर बहुत ज्यादा रुचि नहीं दिखाई गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले हफ्ते ही स्पष्ट कर दिया था कि उनका प्रशासन ईरान के साथ फिलहाल कोई सीधी बातचीत नहीं कर रहा है। ट्रंप ने भविष्य में सैन्य हमलों का संकेत देते हुए कहा था, “हम उनके साथ बातचीत नहीं कर रहे हैं, लेकिन किसी न किसी तरह से कोई नतीजा जरूर निकलेगा और यह जल्द ही होगा।”

ईरान की शर्तें और बातचीत में अड़चनें

ईरानी पक्ष की ओर से मोहसेन रेजाई ने साफ कर दिया है कि जब तक ईरान की मुख्य और बुनियादी मांगें पूरी नहीं हो जातीं, तब तक तेहरान अमेरिका के साथ किसी भी प्रकार की बातचीत में शामिल नहीं होगा। कूटनीतिक जानकारों का मानना है कि दोनों देशों के बीच तनाव कम करने के रास्ते में यह रुख सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है।

अमेरिकी प्रशासन के भीतर भी इसे लेकर अलग-अलग राय है। कुछ अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि ईरान के कट्टरपंथी नेताओं से सीधा संवाद स्थापित करने से बेहतर कूटनीतिक नतीजे हासिल हो सकते हैं।

कट्टरपंथियों के हाथ में आई ईरान की ताकत

मौजूदा संघर्ष की शुरुआत में अमेरिका और इजरायल के सैन्य हमलों में ईरान के कई शीर्ष नेताओं के मारे जाने के बाद, तेहरान की सत्ता और रणनीतिक मामलों में इन कट्टरपंथी नेताओं का प्रभाव काफी बढ़ गया है। वॉशिंगटन में यह माना जा रहा है कि युद्ध के इस दौर में नीतिगत फैसले लेने में इन नेताओं की भूमिका अहम हो चुकी है, जिसके चलते अमेरिकी नेतृत्व ने सीधे संपर्क का यह जरिया तलाशा है।