हींग नगरी हाथरस की 3 सीटों का सियासी इतिहास, जानें सादाबाद और सिकंदराराऊ का पूरा समीकरण

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उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर राजनीतिक दलों ने अपनी रणनीतिक तैयारियां तेज कर दी हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अहम जिलों में शुमार हाथरस अपनी उच्च गुणवत्ता वाली हींग के प्रसंस्करण और विश्वस्तरीय व्यापार के लिए प्रसिद्ध है। राजनीतिक दृष्टि से यह जिला तीन विधानसभा क्षेत्रों—हाथरस (सुरक्षित), सादाबाद और सिकंदराराऊ में बंटा हुआ है। इस जिले का चुनावी इतिहास कई दिग्गजों की जीत की हैट्रिक और बदलते सियासी समीकरणों का गवाह रहा है।

हाथरस की राजनीति में रामवीर उपाध्याय, कुंवर अशरफ अली खान और सुरेश प्रताप गांधी जैसे नेताओं ने लगातार तीन बार जीत दर्ज कर अपनी मजबूत पकड़ साबित की है। 1977 के चुनाव में जिले की सभी सीटों पर जनता पार्टी ने परचम लहराया था, जबकि हाल के वर्षों में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने यहां अपना मजबूत आधार तैयार किया है।

हाथरस (सुरक्षित) सीट: कांग्रेस और बसपा के बाद अब भाजपा का गढ़

आजादी के शुरुआती दशकों में हाथरस शहर सीट पर कांग्रेस का एकतरफा प्रभाव रहा। कांग्रेस के नंदकिशोर देव वशिष्ठ ने 1951, 1957 और 1962 में लगातार तीन विधानसभा चुनाव जीते।

  • रामवीर उपाध्याय का दबदबा: 1996 से 2012 तक इस सीट पर बहुजन समाज पार्टी (BSP) का वर्चस्व रहा। परिसीमन से पहले यह सीट सामान्य वर्ग के लिए थी और बसपा के कद्दावर नेता रामवीर उपाध्याय ने यहां से लगातार तीन बार जीत हासिल की।

  • 2012 का परिसीमन: 2012 में हाथरस सीट को अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित कर दिया गया। इसके बाद बसपा के गेंदालाल चौधरी ने भाजपा के राजेश दिवाकर को 9,128 मतों से हराकर पार्टी का कब्जा बरकरार रखा।

  • 2017 और 2022 में भाजपा का कब्जा: 2017 में सियासी हवा बदली और भाजपा प्रत्याशी हरीशंकर माहौर ने बसपा के बृजमोहन राही को 70,661 वोटों के भारी अंतर से हराया। 2022 के चुनाव में भाजपा की अंजुला सिंह माहौर ने बसपा के संजीव कुमार को पराजित कर पार्टी का झंडा बुलंद रखा।

सादाबाद सीट: कांग्रेस का रिकॉर्ड, रालोद की मजबूत मौजूदगी

सादाबाद विधानसभा सीट का इतिहास 1952 से शुरू होता है, जब कांग्रेस के कुंवर मोहम्मद अशरफ अली खान ने यहां से पहली जीत दर्ज की थी। इस सीट पर कांग्रेस ने सर्वाधिक 5 बार परचम लहराया है, जबकि भाजपा केवल दो बार (1991 और 1996) ही जीत दर्ज कर सकी है।

  • कांग्रेस (5 बार): 1952, 1962, 1967 (ए.ए. खान), 1969 (अशरफ अली खान) और 1980 (कुंवर जावेद अली)।

  • राष्ट्रीय लोक दल (RLD): 2002 (प्रताप), 2007 (डॉ. अनिल चौधरी) और 2022 में प्रदीप कुमार सिंह ने रालोद के टिकट पर जीत हासिल की। (उपचुनाव मिलाकर कुल 4 जीत)।

  • अन्य दल: जनता दल ने दो बार (1989, 1993), जबकि निर्दलीय (1957), बीकेडी (1974), जनता पार्टी (1977), लोकदल (1985), सपा (2012) और बसपा (2017) ने एक-एक बार इस सीट का प्रतिनिधित्व किया है।

सिकंदराराऊ सीट: सुरेश प्रताप गांधी की हैट्रिक से लेकर भाजपा के दबदबे तक

हाथरस लोकसभा क्षेत्र के तहत आने वाली विधानसभा सीट संख्या 80 (सिकंदराराऊ) का मिजाज हमेशा परिवर्तनशील रहा है। यहां किसी एक दल का लंबा एकाधिकार नहीं रहा, हालांकि भाजपा ने हाल के चुनावों में मजबूत पकड़ बनाई है और पार्टी यहां कुल 4 बार (1996, 2007, 2017, 2022) जीत चुकी है।

इस सीट पर सुरेश प्रताप गांधी ने लगातार तीन जीत का रिकॉर्ड बनाया—उन्होंने 1985 में लोकदल, तथा 1989 और 1991 में जनता दल के टिकट पर जीत दर्ज की। वर्तमान में भाजपा के बीरेंद्र सिंह राणा यहां से लगातार दूसरी बार (2017 और 2022) विधायक हैं।

सिकंदराराऊ सीट का चुनावी परिणाम (1952 से 2022):

वर्ष विजयी उम्मीदवार पार्टी
1952 नेक राम शर्मा कांग्रेस (INC)
1957 मल्खन सिंह कांग्रेस (INC)
1962 नेक राम शर्मा निर्दलीय (IND)
1967 एन.आर. शर्मा निर्दलीय (IND)
1969 जगदीश गांधी निर्दलीय (IND)
1974 फरजंद अली भारतीय क्रांति दल (BKD)
1977 नेम सिंह चौहान जनता पार्टी (JNP)
1980 पुष्पा चौहान कांग्रेस (I)
1985 सुरेश प्रताप सिंह लोक दल (LKD)
1989 सुरेश प्रताप गांधी जनता दल (JD)
1991 सुरेश प्रताप गांधी जनता दल (JD)
1993 अमर सिंह समाजवादी पार्टी (SP)
1996 यशपाल सिंह चौहान भाजपा (BJP)
2002 अमर सिंह यादव निर्दलीय (IND)
2007 यशपाल सिंह चौहान भाजपा (BJP)
2012 रामवीर उपाध्याय बसपा (BSP)
2017 बीरेंद्र सिंह राणा भाजपा (BJP)
2022 बीरेंद्र सिंह राणा भाजपा (BJP)