UP Election 2027: बुलंदशहर की 7 सीटों का सियासी समीकरण, 2022 में BJP ने किया था सूपड़ा साफ

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गंगा और यमुना के उपजाऊ दोआब में बसा बुलंदशहर पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति का एक अत्यंत प्रतिष्ठित और रणनीतिक शक्ति केंद्र माना जाता है। खुर्जा का विश्वविख्यात सिरेमिक व पॉटरी उद्योग, नरोरा परमाणु ऊर्जा संयंत्र, विशाल दुग्ध उत्पादन नेटवर्क और दिल्ली-एनसीआर से सटी सीमाओं के चलते यह जिला न केवल आर्थिक रूप से संपन्न है, बल्कि यहां का राजनीतिक मिजाज सीधे तौर पर लखनऊ की सत्ता के समीकरणों पर असर डालता है। 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच इस जिले में राजनीतिक दलों ने अपनी गोटियां बिछानी शुरू कर दी हैं।

2022 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने जिले की सभी 7 विधानसभा सीटों पर एकतरफा जीत दर्ज करते हुए विपक्ष का सूपड़ा साफ कर दिया था। हालांकि, ऐतिहासिक रूप से यहां किसान आंदोलनों के साथ-साथ समाजवादी पार्टी (SP), राष्ट्रीय लोकदल (RLD), बहुजन समाज पार्टी (BSP) और कांग्रेस का भी मजबूत आधार रहा है, जिससे अधिकांश सीटों पर मुकाबला बहुकोणीय रहता है।

गन्ने का भुगतान, आवारा पशु और रोजगार मुख्य मुद्दे

बुलंदशहर की चुनावी राजनीति में ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसानी से जुड़े सवाल हमेशा केंद्र में रहते हैं। किसानों को फसलों का वाजिब मूल्य, चीनी मिलों से समय पर गन्ना भुगतान और आवारा पशुओं की समस्या यहां के मतदाताओं के बड़े सरोकार हैं।

इसके साथ ही, खुर्जा के पारंपरिक पॉटरी उद्योग को बुनियादी सुविधाएं व प्रोत्साहन, नरोरा-खुर्जा क्षेत्र का इंफ्रास्ट्रक्चर, स्वास्थ्य-शिक्षा का विस्तार, एनसीआर कनेक्टिविटी और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर प्रमुख मुद्दे बने हुए हैं।

आबादी, साक्षरता और धार्मिक संरचना के आंकड़े

2011 की जनगणना के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, बुलंदशहर जिले की कुल आबादी 34,99,171 है:

  • पुरुष जनसंख्या: 18,49,157

  • महिला जनसंख्या: 16,50,014

  • साक्षरता दर: कुल साक्षरता 76.23% (पुरुष साक्षरता 82.52%, महिला साक्षरता 56.60%)

धार्मिक आबादी का अनुपात (जनगणना 2011):

  • हिंदू: 77.37%

  • मुस्लिम: 22.22%

  • ईसाई: 0.12%

  • सिख: 0.08%

  • जैन: 0.04%

  • बौद्ध: 0.02%

2022 विधानसभा चुनाव: सभी 7 सीटों पर भाजपा का परचम

पिछले विधानसभा चुनाव में बुलंदशहर की सातों सीटों पर भाजपा प्रत्याशियों ने भारी मतों से जीत दर्ज की थी:

  1. सिकंदराबाद: औद्योगिक गतिविधियों वाले इस क्षेत्र में भाजपा के लक्ष्मी राज सिंह को 1,25,644 वोट मिले। उन्होंने सपा के राहुल यादव (96,301 वोट) को 29,343 मतों से हराया। बसपा के मनवीर सिंह 42,634 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।

  2. बुलंदशहर सदर: जिला मुख्यालय सीट पर भाजपा के प्रदीप कुमार चौधरी ने 1,27,076 वोट पाकर जीत दर्ज की। उन्होंने रालोद प्रत्याशी मोहम्मद यूनुस (1,01,246 वोट) को मात दी, जबकि बसपा के मोहम्मद मोबिन कल्लू कुरैशी को 24,373 वोट मिले।

  3. स्याना: संवेदनशील और कृषि प्रधान इस सीट पर भाजपा के देवेन्द्र सिंह लोधी ने 1,49,125 वोट हासिल कर एकतरफा जीत दर्ज की। उन्होंने रालोद के दिलनवाज़ खान (59,468 वोट) को करीब 90,000 मतों से पराजित किया। बसपा के सुनील कुमार को 36,193 वोट मिले।

  4. अनूपशहर: गंगा किनारे स्थित इस धार्मिक-ऐतिहासिक सीट पर भाजपा के संजय कुमार शर्मा 1,25,602 वोट हासिल कर विजयी रहे। बसपा के रामेश्वर को 47,979 वोट और एनसीपी के के.के. शर्मा को 44,180 वोट मिले।

  5. डिबाई: पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के प्रभाव वाली इस सीट पर भाजपा के चंद्रपाल सिंह ने 1,28,640 वोट पाकर सपा के हरीश कुमार (60,615 वोट) को हराया। बसपा के करन पाल सिंह को 24,516 वोट मिले।

  6. शिकारपुर: ग्रामीण प्रभाव वाली इस सीट पर पूर्व मंत्री अनिल कुमार ने भाजपा के टिकट पर 1,13,855 वोट पाकर रालोद के किरनपाल सिंह (58,172 वोट) को करीब 55,000 वोटों से शिकस्त दी। बसपा के मु. रफ़ीक 37,358 वोटों पर रहे।

  7. खुर्जा (SC): पॉटरी नगरी के रूप में मशहूर इस सुरक्षित सीट पर भाजपा की मीनाक्षी सिंह ने 1,37,461 वोट हासिल कर सपा के बंशी सिंह (70,377 वोट) को पराजित किया। बसपा के विनोद को 45,325 वोट मिले।

सीटों का मिजाज और रणनीतिक प्रभाव

भौगोलिक और सामाजिक रूप से सभी सातों सीटों की तासीर अलग है। सिकंदराबाद सीट औद्योगिक क्लस्टर और एनसीआर से निकटता के चलते शहरी-औद्योगिक मतदाताओं से प्रभावित रहती है, जबकि स्याना, शिकारपुर और अनूपशहर में ग्रामीण और कृषि अर्थव्यवस्था से जुड़े मतदाता निर्णायक होते हैं। डिबाई सीट लोध बाहुल्य होने और पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के प्रभाव क्षेत्र के रूप में भाजपा का मजबूत गढ़ मानी जाती रही है। वहीं, खुर्जा सुरक्षित सीट पर सिरेमिक उद्योग के कामगारों और ग्रामीण मतदाताओं की गोलबंदी हर बार चुनावी नतीजों का रुख तय करती है।