योगी-अखिलेश आमने-सामने: जानिए पिछले 3 चुनावों में कैसा रहा इस सीट का सियासी गणित

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उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं और इस बार केंद्र में अयोध्या विधानसभा सीट आ गई है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अयोध्या से चुनाव लड़ने की चुनौती दी, जिसके जवाब में मुख्यमंत्री ने भी उन्हें मैदान में उतरने की बात कही। इस सियासी बयानबाजी के बीच पिछले तीन विधानसभा चुनावों के आंकड़े बताते हैं कि अयोध्या सीट पर जहां बीजेपी का दबदबा बरकरार है, वहीं सपा ने भी बीते चुनावों में अपने वोट शेयर में बड़ा इजाफा किया है।

2012 में सपा का कब्जा, 2017 में बीजेपी की वापसी

अयोध्या विधानसभा सीट के पिछले तीन चुनावों के रिकॉर्ड पर नजर डालें तो 2012 में समाजवादी पार्टी ने यहां जीत का परचम लहराया था। उस चुनाव में सपा प्रत्याशी पवन पांडेय ने बीजेपी के लल्लू सिंह को कड़े मुकाबले में हराया था। 2012 के चुनाव में पवन पांडेय को 55,262 वोट मिले थे और पार्टी का वोट शेयर 28.74% रहा था। वहीं, बीजेपी के लल्लू सिंह 49,857 वोट (25.93%) पाकर दूसरे नंबर पर रहे थे।

साल 2017 के विधानसभा चुनाव में समीकरण पूरी तरह बदल गए और बीजेपी ने जोरदार वापसी की। बीजेपी प्रत्याशी वेद प्रकाश गुप्ता को 1,07,014 वोट मिले और पार्टी का मत प्रतिशत सीधे बढ़कर 49.20% तक पहुंच गया। वहीं, सपा के पवन पांडेय को 56,574 वोट मिले और उनका वोट प्रतिशत गिरकर 26.01% पर आ गया।

2022 का चुनाव: बीजेपी की जीत, सपा के वोट शेयर में 14% से ज्यादा का उछाल

साल 2022 के विधानसभा चुनाव में भी जीत बीजेपी के खाते में गई, लेकिन मुकाबले का अंतर काफी कम हो गया। बीजेपी के वेद प्रकाश गुप्ता ने 1,13,414 वोट पाकर अपनी सीट बचाए रखी। उनका वोट शेयर 49.04% रहा, जो 2017 के लगभग बराबर था।

दूसरी तरफ, सपा उम्मीदवार पवन पांडेय को 93,424 वोट मिले। इस चुनाव में सपा का वोट प्रतिशत बढ़कर 40.40% पहुंच गया। यानी 2017 की तुलना में 2022 में सपा के मत प्रतिशत में 14.39 प्रतिशत अंक की बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई।

जुबानी जंग और अयोध्या सीट का चुनावी मिजाज

चुनावी आंकड़े साफ करते हैं कि अयोध्या सीट पर बीजेपी का कोर वोट बैंक लगभग स्थिर बना हुआ है, जबकि सपा ने पिछले चुनाव में अपने जनाधार में उल्लेखनीय इजाफा किया है। अब आगामी विधानसभा चुनाव से पहले अखिलेश यादव और योगी आदित्यनाथ के बीच एक-दूसरे को अयोध्या से मैदान में उतरने की दी जा रही चुनौती ने इस सीट को एक बार फिर प्रदेश की राजनीति के केंद्र में ला खड़ा किया है।