मंत्री विजय शाह पर चलेगा केस? कर्नल कुरैशी विवाद में फंसी मोहन सरकार
भोपाल: मध्य प्रदेश के आदिवासी मामलों के मंत्री विजय शाह का एक विवादित बयान अब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सरकार के लिए गले की फांस बन गया है। मामला ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान भारतीय सेना की अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर की गई एक टिप्पणी का है। घटना को एक साल से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) की जांच के बाद यह मामला फिर से गरमा गया है। SIT ने मंत्री विजय शाह के खिलाफ मुकदमा चलाने की राज्य सरकार से मंजूरी मांगी है, लेकिन सूत्रों के मुताबिक, मोहन सरकार का जवाब ‘न’ में है।
कैबिनेट बैठक में मंत्री के पक्ष में लामबंद हुई सरकार
मंगलवार को मध्य प्रदेश कैबिनेट की नियमित बैठक हुई, जहां पूरी सरकार एकजुट होकर विजय शाह के समर्थन में खड़ी नजर आई। सूत्रों के अनुसार, बैठक में यह सैद्धांतिक फैसला लिया गया कि उनके खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी नहीं दी जाएगी।
हालांकि, इसे आधिकारिक एजेंडे का हिस्सा नहीं बनाया गया था। कैबिनेट मंत्री राकेश सिंह ने भी मीडिया से इसकी पुष्टि की है। बताया जा रहा है कि रूटीन एजेंडा खत्म होने के बाद ज्यादातर अधिकारियों को बाहर भेजकर इस मुद्दे पर विशेष चर्चा की गई। विजय शाह को अपने कैबिनेट सहयोगियों के सामने अपनी बात रखने और SIT रिपोर्ट की परिस्थितियां समझाने का मौका दिया गया, जिसके बाद कैबिनेट ने मुकदमा न चलाने के रुख का समर्थन किया।
सुप्रीम कोर्ट की फटकार और 31 अगस्त को अहम सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट इस मामले में पहले ही राज्य सरकार के रवैये पर कड़ी नाराजगी जता चुका है। अदालत के आदेश पर गठित तीन सदस्यीय SIT ने अपनी जांच पूरी कर ली है और मंत्री पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 196(1)(a) के तहत (विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना) मुकदमा चलाने की अनुमति मांगी है।
अदालत ने जनवरी 2026 में सरकार को फैसला लेने के लिए दो हफ्ते का समय दिया था। जब महीनों तक कोई कार्रवाई नहीं हुई, तो मई में सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा था, “अब बहुत हो चुका है।” कोर्ट ने तब चार हफ्ते में फैसला लेने का निर्देश दिया था। अब इस पूरे विवाद पर 31 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में फिर से अहम सुनवाई होनी है।
आखिर क्या है पूरा विवाद?
यह पूरा विवाद मई 2025 में शुरू हुआ था। कर्नल सोफिया कुरैशी ने भारत के आतंकवाद विरोधी अभियान ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को लेकर मीडिया को जानकारी दी थी। इसके बाद इंदौर के पास महू में एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान मंत्री विजय शाह ने पहलगाम हमले के लिए जिम्मेदार आतंकवादियों के संदर्भ में कर्नल कुरैशी का जिक्र करते हुए एक विवादित टिप्पणी की थी। इस बयान से देशभर में आक्रोश फैल गया था।
मामले की गंभीरता को देखते हुए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया और FIR दर्ज करने का आदेश दिया। बाद में मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां जांच के लिए SIT गठित की गई।
कांग्रेस का हमला: ‘क्या सत्ता में बैठे लोग कानून से ऊपर हैं?’
इस मुद्दे पर मध्य प्रदेश कांग्रेस आक्रामक है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने राज्यपाल को पत्र लिखकर दखल देने की मांग की है। उन्होंने सवाल उठाया, “क्या एक आम नागरिक और कैबिनेट मंत्री के लिए कानून अलग-अलग हैं? केवल मंत्री होने के कारण किसी आरोपी को बचाने के लिए जांच एजेंसी की मांग को कैसे रोका जा सकता है?”
वहीं, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र लिखकर आरोप लगाया है कि विजय शाह को राजनीतिक संरक्षण दिया जा रहा है। पटवारी ने कहा, “सरकार का यह रुख देश के सामने गंभीर संवैधानिक प्रश्न खड़ा करता है कि क्या सत्ता में बैठे व्यक्ति कानून से ऊपर हैं?”
BJP का बचाव और ‘माफी’ पर विवाद
कांग्रेस के इन आरोपों को बीजेपी ने सिरे से खारिज किया है। राज्य बीजेपी अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल का कहना है कि सरकार तथ्यों और सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद ही कोई फैसला लेगी।
दूसरी तरफ, विजय शाह के समर्थकों का तर्क है कि मंत्री ने अपनी टिप्पणी के लिए कई बार माफी मांगी है और उनका मकसद सेना या कर्नल कुरैशी का अपमान करना नहीं था। हालांकि, यह माफी भी कानूनी विवाद का हिस्सा बन चुकी है। पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने माफी के समय पर सवाल उठाते हुए कहा था कि अगर यह सचमुच गलती थी, तो न्यायिक दखल के बाद नहीं, बल्कि तुरंत माफी मांगनी चाहिए थी।
