कर्नाटक: मंत्री बी नागेंद्र का इस्तीफा, जानें क्यों छोड़ा पद और क्या हैं आरोप
बेंगलुरु: कर्नाटक की राजनीति में शुक्रवार को एक बड़ा घटनाक्रम देखने को मिला। राज्य सरकार में मंत्री बी. नागेंद्र ने महज 25 दिन के भीतर अपने पद से इस्तीफा दे दिया। राज्य की एक सरकारी कल्याण संस्था के फंड में कथित गड़बड़ी को लेकर विपक्ष उनके इस्तीफे की लगातार मांग कर रहा था। हालांकि, नागेंद्र ने स्पष्ट किया कि उन्होंने यह फैसला विपक्ष के दबाव में नहीं, बल्कि कांग्रेस पार्टी को किसी भी असहज स्थिति से बचाने के लिए स्वेच्छा से लिया है। मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने 3 अगस्त को हुए कैबिनेट विस्तार में उन्हें दोबारा मंत्री बनाया था।
‘आरोपों का सामना करना चाहता हूं, कांग्रेस को परेशानी में नहीं डालूंगा’
बेंगलुरु में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान नागेंद्र भावुक हो गए। बल्लारी ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र से विधायक नागेंद्र ने कहा कि वह दिल्ली से लौटने के बाद पार्टी नेतृत्व से विधायक पद से भी इस्तीफा देने की अनुमति मांग चुके हैं। उनका कहना है कि वह अपने ऊपर लगे आरोपों का डटकर सामना करना चाहते हैं और अपना नाम बेदाग साबित करना चाहते हैं।
इस्तीफे के बाद नागेंद्र ने मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार से मुलाकात कर उन्हें अपना त्यागपत्र सौंपा। मुख्यमंत्री शिवकुमार ने बताया कि अंतिम फैसला पार्टी आलाकमान से चर्चा के बाद लिया जाएगा। उन्होंने यह भी जोड़ा कि नागेंद्र पर लगे आरोप बेबुनियाद हैं और वह निर्दोष हैं।
क्या है 89 करोड़ रुपये के फंड में गड़बड़ी का पूरा मामला?
यह पूरा विवाद कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम (KMVSTDC) से जुड़ा है।
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विपक्ष (BJP और JDS) का आरोप है कि इस कल्याण संस्था के करीब 89 करोड़ रुपये के फंड में भारी गड़बड़ी हुई है।
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वर्ष 2024 में जब यह मामला पहली बार सामने आया था, तब तत्कालीन आदिवासी कल्याण मंत्री नागेंद्र को इस्तीफा देना पड़ा था।
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मानसून सत्र के दौरान विपक्ष ने इस मुद्दे पर सरकार को जमकर घेरा और विधानसभा की कार्यवाही भी बाधित की।
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BJP ने नागेंद्र के इस्तीफे की मांग को लेकर 1 सितंबर से रायचूर से बल्लारी तक 10 दिवसीय पदयात्रा निकालने का ऐलान किया था। बीजेपी का कहना है कि नागेंद्र के इस्तीफे के बाद भी पदयात्रा जारी रहेगी।
BJP-JDS पर प्रहार: ‘वे दलितों और आदिवासियों को आगे बढ़ते नहीं देख सकते’
चार बार के विधायक नागेंद्र ने अपने इस्तीफे को लेकर कहा कि इसे BJP या JDS के दबाव के आगे झुकना नहीं माना जाना चाहिए। उन्होंने विपक्षी दलों को ‘मनुवादी’ करार देते हुए तीखा हमला बोला। नागेंद्र ने कहा, “यह डॉ. बीआर आंबेडकर के संविधान का दौर है, पुराणों का नहीं। BJP की मनुस्मृति वाली सोच चाहती है कि दलित, महिलाएं, अल्पसंख्यक और आदिवासी कभी आगे न बढ़ें, लेकिन मैं ऐसा होने नहीं दूंगा।”
नागेंद्र ने ऐलान किया कि वह राज्य के 15 अनुसूचित जनजाति (ST) आरक्षित विधानसभा क्षेत्रों का दौरा करेंगे और जनता को बताएंगे कि कैसे विपक्षी दलों ने ‘झूठ को बार-बार दोहराकर सच साबित करने’ की कोशिश की है।
SIT और CID से क्लीन चिट का दावा
अपने बचाव में नागेंद्र ने दावा किया कि राज्य सरकार द्वारा गठित विशेष जांच टीम (SIT) और अपराध जांच विभाग (CID) उन्हें पहले ही इस मामले में क्लीन चिट दे चुके हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शुरुआती जांच में उनका नाम शामिल नहीं किया था, लेकिन जब उन्हें दोबारा कैबिनेट में जगह मिली, तब ED ने उनका नाम जोड़ दिया। फिलहाल, सभी की निगाहें कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व पर टिकी हैं कि वे नागेंद्र के इस्तीफे और उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर क्या फैसला लेते हैं।
