September 16, 2026

कौन हैं बीजेपी विधायक नरेंद्र मेहता? PM मोदी के दोस्त से जुड़ा है विवाद

mehata

महाराष्ट्र के मीरा-भायंदर से भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायक नरेंद्र मेहता इन दिनों एक बड़े जमीन विवाद को लेकर सुर्खियों में हैं। यह विवाद कोई आम मामला नहीं है, बल्कि सीधे तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बचपन के सहपाठी 81 वर्षीय असगर अली वोरा से जुड़ा है।

हाल ही में असगर अली वोरा ने इस मामले को लेकर पीएम मोदी से मुलाकात की थी। इस मुलाकात के तुरंत बाद मामले में तेजी आई और मंगलवार को विधायक नरेंद्र मेहता ने ऐलान किया कि वह विवादित जमीन से अपना कब्जा छोड़ रहे हैं। इस घटनाक्रम के बाद से मेहता की राजनीतिक और व्यापारिक पृष्ठभूमि चर्चा का विषय बन गई है।

कौन हैं नरेंद्र मेहता?

नरेंद्र मेहता महाराष्ट्र के ठाणे जिले के मीरा-भायंदर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक होने के साथ-साथ एक बड़े रियल एस्टेट कारोबारी भी हैं। वह निर्माण कंपनी ‘सेवन इलेवन ग्रुप’ के मालिक हैं।

25 सितंबर 1972 को राजस्थान के देसूरी में एक मध्यमवर्गीय मारवाड़ी परिवार में जन्मे मेहता का बचपन संघर्षों से भरा रहा। पिता की असमय मृत्यु के कारण उन्हें पढ़ाई बीच में ही छोड़नी पड़ी थी और वे केवल 8वीं कक्षा तक ही शिक्षित हैं।

नरेंद्र मेहता का राजनीतिक सफर

  • 2007: मेहता ने राजनीति में कदम रखा और मीरा-भायंदर नगर निगम के महापौर (Mayor) बने।

  • 2014: महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में भाजपा के टिकट पर लड़े और पहली बार विधायक चुने गए।

  • 2019: विधानसभा चुनाव में उन्हें निर्दलीय उम्मीदवार गीता जैन से हार का सामना करना पड़ा।

  • 2024: हालिया विधानसभा चुनाव में उन्होंने दोबारा जीत दर्ज की और विधायक बने।

पीएम मोदी के दोस्त ने मेहता पर क्या लगाए थे आरोप?

यह पूरा मामला 2011 से जुड़ा हुआ है। पीएम मोदी के बचपन के दोस्त असगर अली वोरा का आरोप था कि भायंदर पूर्व के नवघर इलाके में स्थित उनकी 2,810 वर्गमीटर जमीन पर नरेंद्र मेहता की कंस्ट्रक्शन कंपनी ने कब्जा कर रखा है।

वोरा के दावों के मुताबिक, उन्होंने यह जमीन 1989 में खरीदी थी और इसे कभी किसी को नहीं बेचा। उनका आरोप था कि 2011 में जाली दस्तावेज तैयार कर उनकी जानकारी के बिना जमीन को दो हिस्सों में बांट दिया गया। इसका एक हिस्सा ‘स्वयं बिल्डर्स’ और दूसरा हिस्सा मेहता की कंपनी ‘सेवन इलेवन कंस्ट्रक्शन्स’ के कब्जे में था। वोरा ने यह भी आरोप लगाया कि मीरा-भायंदर नगर निगम के टाउन प्लानिंग विभाग ने उनके मालिकाना हक के बावजूद वहां निर्माण को अवैध मंजूरी दी।

पीएम से मुलाकात के बाद क्या हुआ एक्शन?

वोरा की पीएम मोदी से मुलाकात के बाद महाराष्ट्र के वरिष्ठ अधिकारियों ने तुरंत मामले का संज्ञान लिया। राज्य सचिवालय में मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव श्रीकर परदेशी की अध्यक्षता में एक हाई-लेवल बैठक बुलाई गई।

इस बैठक में असगर अली वोरा, विधायक नरेंद्र मेहता, मीरा-भायंदर नगर निगम कमिश्नर राधा विनोद शर्मा और टाउन प्लानर मौजूद थे। इसी बैठक के दौरान मेहता ने टाउन प्लानिंग विभाग को एक पत्र सौंपकर आधिकारिक रूप से जमीन पर अपना दावा छोड़ने का ऐलान किया। हालांकि, मेहता ने दावा किया कि उन्होंने यह जमीन 2019 में मर्विन फर्नांडीस नामक व्यक्ति से खरीदी थी।

सीबीआई जांच की हो रही थी मांग

इससे पहले वोरा ने आरोप लगाया था कि 2015 में एफआईआर दर्ज कराने और लगातार शिकायतों के बावजूद नगर पालिका, राजस्व और पुलिस विभागों ने कोई एक्शन नहीं लिया था। सीआईडी (CID) ने भी इसी साल अपनी रिपोर्ट सौंपी थी, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई न होने पर वोरा ने इस मामले में सीधे सीबीआई (CBI) जांच की मांग उठाई थी।