September 16, 2026

दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: सिर्फ तेज रफ्तार से गाड़ी चलाना लापरवाही नहीं, कोर्ट ने खारिज की अपील

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दिल्ली हाईकोर्ट ने सड़क दुर्घटना से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में स्पष्ट किया है कि केवल वाहन की तेज रफ्तार को आधार बनाकर किसी चालक को रैश या लापरवाह (Rash or Negligent) नहीं ठहराया जा सकता है। अदालत ने कहा कि ‘तेज रफ्तार’ और ‘ओवर स्पीड’ अपने आप में सापेक्ष शब्द हैं। किसी भी चालक को दोषी साबित करने के लिए अभियोजन पक्ष को यह पुख्ता तौर पर साबित करना होगा कि उस समय ड्राइविंग वास्तव में खतरनाक या लापरवाही से भरी हुई थी।

दिल्ली सरकार की अपील हुई खारिज यह टिप्पणी जस्टिस चंद्रशेखरन सुधा की बेंच ने दिल्ली सरकार की उस आपराधिक अपील को खारिज करते हुए की, जिसमें साल 2009 के एक सड़क हादसे में महिला की मौत के मामले में निचली अदालत द्वारा टेंपो चालक को बरी किए जाने को चुनौती दी गई थी। इस मामले में चालक के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 279 (लापरवाही से वाहन चलाना) और धारा 304ए (लापरवाही से मौत) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था।

‘वाहन तेज गति से चलाने के लिए ही बने हैं’ अदालत ने सुनवाई के दौरान कहा कि वाहन तेज गति से चलने के लिए ही डिजाइन किए जाते हैं। महज इस बात से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि वाहन अपनी तय सीमा से अधिक या लापरवाही से चल रहा था। किसी भी वाहन की गति को हमेशा उस समय की परिस्थितियों और सड़क की स्थिति के हिसाब से देखा जाना चाहिए।

गवाह के बयानों और साक्ष्यों में मिला विरोधाभास इस मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने अभियोजन पक्ष के गवाह और सबूतों में कई कमियां पाईं:

  • गवाह के शरीर पर चोट का अभाव: मुख्य गवाह का दावा था कि वह साइकिल चला रहा था और सामने से आ रहे टेंपो ने टक्कर मारी, लेकिन उसके शरीर पर खरोंच या चोट का कोई निशान नहीं मिला और न ही उसका मेडिकल परीक्षण हुआ था।

  • मैकेनिकल रिपोर्ट में अंतर: वाहन की जांच में टेंपो के बाएं कोने पर मामूली डेंट मिला। कोर्ट ने कहा कि यदि हादसा गवाह के बताए अनुसार सामने से हुआ होता, तो टेंपो के दाहिने हिस्से में ज्यादा नुकसान होना चाहिए था।

इन सभी परिस्थितियों और विरोधाभासों का हवाला देते हुए हाईकोर्ट ने माना कि अभियोजन पक्ष चालक की लापरवाही को साबित करने में पूरी तरह नाकाम रहा। इसके साथ ही अदालत ने निचली अदालत के फैसले को सही ठहराते हुए दिल्ली सरकार की अपील को खारिज कर दिया।