दिल्ली में ईसाई कब्रिस्तानों की भारी कमी पर हाईकोर्ट सख्त: MCD से मांगा खाली जमीनों का पूरा ब्योरा; दूसरे राज्यों में शव ले जाने को मजबूर परिवार
राजधानी दिल्ली में ईसाई समुदाय के लिए कब्रिस्तानों और दफनाने की जगह की गंभीर कमी को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट ने बहुत ही सख्त रुख अपनाया है। हाईकोर्ट ने नगर निगम (MCD) को निर्देश दिया है कि वह दिल्ली में मौजूद सभी ईसाई कब्रिस्तानों और वहां उपलब्ध जगह का पूरा ब्योरा अदालत के सामने पेश करे। इस मामले की अगली सुनवाई अब चार नवंबर को तय की गई है।
‘अंतिम संस्कार के लिए जगह देना MCD का प्राथमिक कर्तव्य’ दिल्ली हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि दिल्ली नगर निगम अधिनियम के तहत नागरिकों के लिए अंतिम संस्कार की जगहों को व्यवस्थित करना और उनका रखरखाव करना MCD की अहम जिम्मेदारी है। अदालत ने कहा कि शहर के सभी नागरिकों को सम्मानजनक तरीके से अंतिम संस्कार के लिए उचित स्थान उपलब्ध कराना नगर निगम के प्राथमिक कार्यों में शामिल है, जिसके दायरे में कब्रिस्तान और बरियल ग्राउंड्स भी आते हैं।
पड़ोसी राज्यों तक शव ले जाने को मजबूर हैं परिवार हाईकोर्ट में दायर की गई याचिका में यह दर्द बयां किया गया है कि दिल्ली में पर्याप्त ईसाई कब्रिस्तान न होने के कारण शोक संतप्त परिवारों को अपने मृत परिजनों के शव दफनाने के लिए मजबूरन पड़ोसी राज्यों का रुख करना पड़ रहा है। लोगों को अपने अपनों के अंतिम संस्कार के लिए पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों तक जाने की नौबत आ रही है, जिससे परिवारों को भारी आर्थिक, मानसिक और सामाजिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। याचिका में मांग की गई है कि राजधानी के भीतर ही ईसाई समुदाय के लिए पर्याप्त जमीन आवंटित की जाए।
खजूरी खास की जमीन भी हुई हाथ से बाहर याचिकाकर्ता के अनुसार, इस समस्या के समाधान के लिए जून 2025 से ही डीडीए (DDA) और एमसीडी के अधिकारियों से लगातार संपर्क किया जा रहा है। अधिकारियों को कई बार लिखित शिकायतें देने के साथ आरटीआई (RTI) आवेदन भी दायर किए गए, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
शुरुआत में डीडीए ने कब्रिस्तान के लिए तीन संभावित जगहों—खजूरी खास, राजीव गांधी अस्पताल के पास और सुंदर नगरी की पहचान की थी। बाद में राजीव गांधी अस्पताल और सुंदर नगरी की जमीन को अनुपयुक्त बताकर खारिज कर दिया गया। केवल खजूरी खास की जमीन पर प्रक्रिया आगे बढ़ी, लेकिन बाद में याचिकाकर्ता को सूचित किया गया कि वह जमीन भी आवंटन के लिए उपलब्ध नहीं है, जिससे संकट और गहरा गया।
अब 4 नवंबर को होगी अगली सुनवाई हाईकोर्ट ने MCD को स्पष्ट आदेश दिया है कि वह अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले सभी ईसाई कब्रिस्तानों की संख्या, उनकी वर्तमान स्थिति और वहां खाली पड़ी जगह का पूरा डेटा अदालत को सौंपे। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि 4 नवंबर को होने वाली अगली सुनवाई में नगर निगम की तरफ से क्या जवाब दाखिल किया जाता है।
