गोरखपुर की 9 सीटों पर 2022 में BJP ने किया था क्लीन स्वीप, जानें पूरा सियासी समीकरण
पूर्वांचल की राजनीति का केंद्र और उत्तर प्रदेश की सत्ता का सबसे बड़ा गढ़ माने जाने वाले गोरखपुर जिले में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक बिसात बिछने लगी है। महायोगी गुरु गोरखनाथ की तपोभूमि, गीता प्रेस और टेराकोटा शिल्प के लिए प्रसिद्ध यह जिला सूबे की सियासी दिशा तय करने में अग्रणी भूमिका निभाता रहा है।
जिले की 9 विधानसभा सीटों—गोरखपुर शहर, गोरखपुर ग्रामीण, पिपराइच, कैंपियरगंज, सहजनवा, खजनी, बांसगांव, चौरी-चौरा और चिल्लूपार—पर 2022 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने सभी सीटों पर जीत दर्ज कर ऐतिहासिक क्लीन स्वीप किया था।
2022 विधानसभा चुनाव: सभी 9 सीटों पर खिला था कमल
2022 के विधानसभा चुनाव में गोरखपुर जिले की सभी 9 सीटों पर मुख्य मुकाबला भाजपा और समाजवादी पार्टी (SP) के बीच रहा था, जबकि बहुजन समाज पार्टी (BSP) तीसरे स्थान पर रही थी।
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कैम्पियरगंज (320): भाजपा के वरिष्ठ नेता फतेह बहादुर सिंह ने सपा की काजल निषाद और बसपा के आनंद निषाद को शिकस्त देकर अपनी जीत का सिलसिला बरकरार रखा।
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पिपराइच (321): भाजपा के महेंद्र पाल सिंह ने सपा के अमरेंद्र निषाद और बसपा के दीपक कुमार अग्रवाल को हराकर जीत हासिल की।
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गोरखपुर शहर (322): जिले की सबसे हाई-प्रोफाइल सीट पर खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ चुनाव मैदान में थे। उन्होंने सपा की सुभावती उपेन्द्र दत्त शुक्ला और बसपा के ख्वाजा शम्सुद्दीन को बड़े अंतर से पराजित किया।
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गोरखपुर ग्रामीण (323): भाजपा के बिपिन सिंह ने कड़े मुकाबले में सपा के विजय बहादुर यादव को हराया। यहां बसपा के दारा सिंह निषाद तीसरे स्थान पर रहे।
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सहजनवा (324): गीडा औद्योगिक क्षेत्र से जुड़ी इस सीट पर भाजपा के प्रदीप शुक्ला ने सपा के यशपाल रावत और बसपा के सुधीर सिंह को मात दी।
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खजनी (SC – 325): इस सुरक्षित सीट पर भाजपा के वरिष्ठ नेता व पूर्व मंत्री श्रीराम चौहान ने जीत दर्ज की। उन्होंने सपा की रूपवती और बसपा के विद्यासागर को हराया।
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चौरी-चौरा (326): ऐतिहासिक महत्व वाली इस सीट पर भाजपा के श्रवण कुमार निषाद ने जीत का परचम लहराया। सपा के बृजेश चंद्र लाल दूसरे और बसपा के वीरेंद्र कुमार तीसरे स्थान पर रहे।
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बांसगांव (SC – 327): सुरक्षित सीट बांसगांव से भाजपा के विमलेश पासवान विजयी रहे। उन्होंने कांग्रेस-सपा गठबंधन के प्रत्याशी डॉ. संजय कुमार और बसपा के राम मिलन को हराया।
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चिल्लूपार (328): पूर्वांचल की सबसे चर्चित सीटों में शुमार चिल्लूपार में भाजपा के राजेश त्रिपाठी ने जीत दर्ज की। उन्होंने सपा के टिकट पर लड़े हरिशंकर तिवारी के बेटे विनय शंकर तिवारी को हराया, जबकि बसपा के राजेंद्र सिंह तीसरे स्थान पर रहे।
गोरखपुर शहर से चिल्लूपार तक: सीटों की जमीनी सियासी तासीर
गोरखपुर शहर सीट दशकों से गोरखनाथ पीठ के प्रभाव के चलते भाजपा का सबसे मजबूत गढ़ बनी हुई है। वहीं, नेपाल सीमा के रास्ते पर स्थित कैम्पियरगंज में फतेह बहादुर सिंह का अपना व्यक्तिगत और राजनीतिक प्रभाव रहा है।
जिले के दक्षिणी छोर पर स्थित चिल्लूपार विधानसभा सीट लंबे समय तक पूर्व बाहुबली नेता हरिशंकर तिवारी का अभेद्य दुर्ग मानी जाती थी और गैर-भाजपा राजनीति का प्रमुख केंद्र रही थी। 2022 के चुनाव में भाजपा के राजेश त्रिपाठी ने इस पारंपरिक दुर्ग को ढहाकर जिले की सभी 9 सीटों पर भगवा परचम फहराने की पटकथा पूरी की थी।
इसके अलावा खजनी और बांसगांव दोनों सुरक्षित (SC) सीटें हैं, जहां दलित मतदाताओं की संख्या परिणाम तय करने में निर्णायक रहती है। गोरखपुर ग्रामीण और चौरी-चौरा जैसी सीटों पर निषाद, पिछड़े और सवर्ण मतदाताओं का संतुलन चुनावी हार-जीत की दिशा तय करता है।
आबादी, साक्षरता और सामाजिक ढांचा
2011 की जनगणना के आंकड़ों के मुताबिक, गोरखपुर जिले की कुल आबादी 44,40,895 है, जिसमें पुरुषों की संख्या 22,77,777 और महिलाओं की संख्या 21,63,118 है। जिले की औसत साक्षरता दर 70.83% दर्ज की गई है, जिसमें पुरुष साक्षरता 81.80% और महिला साक्षरता 59.36% है।
धार्मिक जनसांख्यिकी पर नजर डालें तो जिले में:
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हिंदू आबादी: 90.28%
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मुस्लिम आबादी: 9.09%
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ईसाई: 0.22%
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बौद्ध: 0.06%
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सिख: 0.05%
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जैन: 0.01%
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अन्य: 0.00%
जिले में सवर्ण, पिछड़ा (खासकर निषाद और यादव) और दलित वर्ग का सामाजिक ताना-बाना, गोरखनाथ पीठ के धार्मिक व सामाजिक प्रभाव के साथ मिलकर चुनावी समीकरणों को आकार देता है।
एम्स, गीडा और बाढ़ नियंत्रण जैसे स्थानीय मुद्दे
गोरखपुर के चुनावी विमर्श में स्वास्थ्य, उद्योग और कृषि से जुड़ी समस्याएं प्रमुखता से उठती हैं। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) और बीआरडी मेडिकल कॉलेज जैसी स्वास्थ्य सेवाओं का सुदृढ़ीकरण, गीडा (GIDA) में नए औद्योगिक निवेश से स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार का सृजन और टेराकोटा शिल्प को बढ़ावा देना मुख्य चुनावी चर्चाओं में शामिल रहता है।
ग्रामीण इलाकों और राप्ती-रोहिन नदियों के कछार में बसे क्षेत्रों में हर साल आने वाली बाढ़ और जलजमाव का स्थायी समाधान किसानों के लिए सबसे बड़ा सवाल बनता है। पिपराइच क्षेत्र में चीनी मिल और गन्ना किसानों के मुद्दों के साथ-साथ सहजनवा और कैंपियरगंज के कृषि बेल्ट में फसलों के उचित मूल्य की मांग भी चुनावी मैदान में सीधी असर डालती है।
