2022 में क्लीन स्वीप से कटेहरी उपचुनाव तक, अंबेडकर नगर की 5 सीटों का सियासी समीकरण

live-ab-tak-1024x535-1

साल 1995 में अस्तित्व में आया अंबेडकर नगर जिला उत्तर प्रदेश की सियासत में लंबे समय से सामाजिक न्याय की राजनीति का केंद्र रहा है। 2022 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी (SP) ने यहां ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए जिले की सभी पांचों सीटों पर कब्जा जमाया था और भारतीय जनता पार्टी (BJP) व बहुजन समाज पार्टी (BSP) का खाता तक नहीं खुलने दिया था।

हालांकि, 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद कटेहरी विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव ने इस समीकरण में नया मोड़ ला दिया है। 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले जिले में राजनीतिक बिसात नए सिरे से बिछाई जा रही है।

डेमोग्राफी: 90% ग्रामीण आबादी और 25% दलित मतदाता

2011 की जनगणना के अनुसार, अंबेडकर नगर जिले की कुल आबादी करीब 24 लाख है, जिसमें पुरुषों की संख्या 12 लाख 12 हजार और महिलाओं की संख्या लगभग 11 लाख 85 हजार दर्ज की गई थी। जिले का लिंगानुपात प्रति हजार पुरुषों पर 976 महिलाएं है, जो उत्तर प्रदेश के औसत से काफी बेहतर है। जिले की साक्षरता दर करीब 74 प्रतिशत (पुरुष 82% और महिला 63%) है।

आबादी के लिहाज से जिले की करीब 90 प्रतिशत जनता गांवों में बसती है। धार्मिक बनावट पर नजर डालें तो यहां हिंदू आबादी करीब 80 प्रतिशत और मुस्लिम समुदाय की हिस्सेदारी लगभग 19 प्रतिशत है। मुस्लिम मतदाता मुख्य रूप से टांडा, जलालपुर और अकबरपुर जैसे कस्बाई इलाकों में केंद्रित हैं। इसके अलावा, जिले में अनुसूचित जाति (SC) की आबादी करीब 25 प्रतिशत है, जो राज्य के औसत से कहीं अधिक है और चुनावी नतीजों में निर्णायक भूमिका निभाती है।

2022 विधानसभा चुनाव: सपा की एकतरफा जीत

जिले में कुल पांच विधानसभा सीटें हैं—कटेहरी, टांडा, जलालपुर, अकबरपुर और अलापुर (सुरक्षित)। 2022 के चुनाव में सपा ने इन सभी सीटों पर जीत हासिल की थी:

  • कटेहरी: सपा के लालजी वर्मा ने भाजपा की सहयोगी निषाद पार्टी के अवधेश द्विवेदी को हराया।

  • टांडा: सबसे अधिक मतदान वाली इस सीट पर सपा के राममूर्ति वर्मा ने भाजपा के कपिलदेव वर्मा को मात दी।

  • जलालपुर: सपा के राकेश पांडेय ने बसपा के डॉ. राजेश सिंह को 13,630 वोटों से शिकस्त दी।

  • अकबरपुर: सपा प्रत्याशी रामअचल राजभर ने भाजपा के धर्मराज निषाद को 12,336 मतों से हराया।

  • अलापुर (सुरक्षित): सपा के त्रिभुवन दत्त ने भाजपा के त्रिवेणी राम को 9,383 वोटों से पराजित किया।

बसपा से सपा का सफर: पार्टी से बड़ा नेता का रसूख

जिले का चुनावी इतिहास बताता है कि यहां दलों के सिंबल से ज्यादा उम्मीदवारों की अपनी व्यक्तिगत पकड़ का असर रहता है। 2017 के चुनाव में तस्वीर बिल्कुल अलग थी। उस समय भाजपा ने टांडा और अलापुर में जीत दर्ज की थी, जबकि बसपा ने कटेहरी और अकबरपुर पर कब्जा जमाया था। सपा के खाते में सिर्फ जलालपुर सीट आई थी।

2017 में बसपा के टिकट पर जीतने वाले लालजी वर्मा और रामअचल राजभर ने 2022 में सपा का दामन थामा और अपनी-अपनी सीटों से दोबारा विधायक बने।

कटेहरी उपचुनाव ने बदला गणित, सपा के PDA को चुनौती

2027 की लड़ाई से पहले जिले का सबसे बड़ा उलटफेर कटेहरी सीट पर देखने को मिला। 2024 के लोकसभा चुनाव में लालजी वर्मा अंबेडकर नगर से सांसद चुने गए, जिसके चलते कटेहरी विधानसभा सीट खाली हुई।

नवंबर 2024 में हुए उपचुनाव में सपा ने लालजी वर्मा की पत्नी शोभावती वर्मा को प्रत्याशी बनाया, लेकिन भाजपा के धर्मराज निषाद ने बड़े अंतर से जीत दर्ज कर यह सीट सपा से छीन ली। इस नतीजे को सपा के लिए बड़ा झटका माना गया, क्योंकि कटेहरी में कुर्मी, निषाद और ब्राह्मण मतदाता निर्णायक हैं और भाजपा ने निषाद वोट बैंक को एकजुट कर बढ़त बनाई। इस उपचुनाव ने साफ किया है कि भाजपा वापसी की जमीन तैयार कर रही है, वहीं सपा के सामने अपने पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) आधार को बचाए रखने की चुनौती है। उधर बसपा भी अपने पुराने दलित वोट बैंक को फिर से जोड़ने की कोशिश में जुटी है।

पांचों सीटों का जातीय समीकरण

  • कटेहरी: यहां कुर्मी, निषाद और ब्राह्मण मतदाता सबसे निर्णायक हैं। इसी कारण प्रमुख दल इस सीट पर आमतौर पर पिछड़ा वर्ग के उम्मीदवार पर दांव लगाते हैं।

  • टांडा: इस सीट पर मुस्लिम मतदाताओं की संख्या सबसे अधिक है। इसके अलावा यादव और अन्य गैर-यादव पिछड़ी जातियां चुनाव परिणाम तय करती हैं।

  • जलालपुर: यहां मुस्लिम और ब्राह्मण मतदाताओं के बीच का संतुलन चुनावी हार-जीत की दिशा तय करता रहा है।

  • अकबरपुर: राजभर और अन्य पिछड़ी जातियों का इस सीट पर मजबूत प्रभाव है, साथ ही मुस्लिम मतदाता भी बड़ी तादाद में हैं।

  • अलापुर (सुरक्षित): दलित मतदाता इस सीट पर सबसे बड़ा वर्ग हैं। इसके साथ ही यादव और मुस्लिम मतदाताओं का गठजोड़ यहां चुनावी नतीजों को प्रभावित करता है।