Budaun Assembly Seats 2027: 6 सीटों का इतिहास और समीकरण, जानें किसका पलड़ा है भारी

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उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनावों को लेकर राजनीतिक दलों ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। यूपी के प्रमुख जिलों में शामिल बदायूं का सियासी इतिहास भी बेहद दिलचस्प रहा है। यह जिला लंबे समय तक समाजवादी पार्टी (सपा) का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है, लेकिन हाल के वर्षों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने यहां गहरी सेंध लगाई है।

बदायूं जिले के अंतर्गत 6 विधानसभा सीटें आती हैं—बिसौली (सुरक्षित), सहसवान, बिल्सी, बदायूं सदर, शेखूपुर और दातागंज। आइए जानते हैं 2027 के चुनाव से पहले बदायूं की इन सभी 6 विधानसभा सीटों का चुनावी इतिहास और वर्तमान राजनीतिक समीकरण।

1. बिसौली विधानसभा सीट (सुरक्षित)

बदायूं लोकसभा क्षेत्र के तहत आने वाली बिसौली सीट अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित है।

  • दबदबा: इस सीट पर समाजवादी पार्टी का सबसे ज्यादा दबदबा रहा है, खासकर 1990 के दशक से। हालांकि, भाजपा ने 1993 और 2017 में जीत दर्ज कर सपा को चुनौती दी है।

  • वर्तमान विधायक: आशुतोष मौर्य उर्फ राजू (सपा)। 2022 में उन्होंने भाजपा के कुशाग्र सागर को महज 1,834 वोटों के करीबी अंतर से हराया था।

  • समीकरण: यहां यादव, दलित और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) निर्णायक भूमिका निभाते हैं। सपा का मुख्य आधार यादव-मुस्लिम और कुछ दलित वोट हैं, जबकि भाजपा गैर-यादव OBC और दलित वोटों पर फोकस करती है। 2027 में यहां कड़ा मुकाबला तय है।

2. सहसवान विधानसभा सीट

सहसवान विधानसभा सीट सपा का सबसे मजबूत और पारंपरिक गढ़ है। 1996 में खुद मुलायम सिंह यादव ने यहां से चुनाव जीता था।

  • दबदबा: 1993 के बाद से सपा ने लगभग हर चुनाव (2007 को छोड़कर) जीता है। भाजपा और बसपा आज तक इस सीट पर कभी जीत दर्ज नहीं कर पाए हैं।

  • वर्तमान विधायक: बृजेश यादव (सपा)। उन्होंने 2022 में बसपा को 13,945 वोटों से हराया था।

  • समीकरण: यादव और मुस्लिम मतदाता इस सीट पर निर्णायक हैं और पूरी तरह सपा के पक्ष में रहते हैं। भाजपा का वोट शेयर हाल के चुनावों में बढ़ा है, लेकिन जीत अब भी दूर है।

3. बिल्सी विधानसभा सीट

यह सीट 2008 के परिसीमन के बाद सामान्य हो गई थी, इससे पहले यह SC के लिए आरक्षित थी। 1996 में बसपा सुप्रीमो मायावती ने यहां से जीत दर्ज की थी।

  • दबदबा: बिल्सी में किसी एक पार्टी का लगातार दबदबा नहीं रहा है। बसपा और भाजपा ने यहां 4-4 बार जीत हासिल की है। हाल के वर्षों में भाजपा का प्रभाव बढ़ा है।

  • वर्तमान विधायक: हरीश चंद्र शाक्य (भाजपा)। उन्होंने 2022 में सपा को 25,115 वोटों से हराया था।

  • समीकरण: इस सीट पर दलित, यादव, मुस्लिम और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) वोटरों का प्रभाव है। 2017 और 2022 में भाजपा ने गैर-यादव OBC और कुछ दलित वोटों के सहारे लगातार दो बार जीत हासिल की है।

4. बदायूं (सदर) विधानसभा सीट

बदायूं शहर की इस सीट पर शहरी वोटरों का प्रभाव ज्यादा रहता है और यह भाजपा का मजबूत गढ़ मानी जाती है।

  • दबदबा: इस सीट पर भाजपा (जनसंघ सहित) का ऐतिहासिक रूप से सबसे ज्यादा दबदबा रहा है, जिसने 7-8 बार जीत हासिल की है।

  • वर्तमान विधायक: महेश चंद्र गुप्ता (भाजपा)। 2017 और 2022 में उन्होंने लगातार दो बार जीत दर्ज की है।

  • समीकरण: शहरी सीट होने के कारण यहां व्यापारी वर्ग, सवर्ण और हिंदू वोटर निर्णायक हैं, जो भाजपा का कोर वोट बैंक माने जाते हैं। सपा मुस्लिम और कुछ पिछड़ा वर्ग के वोटों पर निर्भर रहती है।

5. शेखूपुर विधानसभा सीट

यह सीट 2008 के परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई थी और आंवला लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है। अब तक यहां केवल तीन चुनाव हुए हैं।

  • दबदबा: यहां सपा का पलड़ा भारी रहा है। 3 में से 2 बार सपा और 1 बार (2017) भाजपा ने जीत हासिल की है। इस क्षेत्र में यादव परिवार और शाक्य परिवार का राजनीतिक वर्चस्व रहा है।

  • वर्तमान विधायक: हिमांशु यादव (सपा)। 2022 में उन्होंने भाजपा प्रत्याशी को 6,100 वोटों से हराया था।

  • समीकरण: यहां यादव और मुस्लिम वोटर सपा के पक्ष में हैं, जबकि शाक्य मतदाताओं का भी इस क्षेत्र में मजबूत प्रभाव है। यहां सपा और भाजपा के बीच सीधी टक्कर रहती है।

6. दातागंज विधानसभा सीट

यह सामान्य श्रेणी की सीट भी आंवला लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आती है।

  • दबदबा: दातागंज पर भाजपा का सबसे मजबूत ऐतिहासिक और हालिया दबदबा है। 1991 से 2017 तक अक्सर एक ही उम्मीदवार यहां से लगातार दो बार जीतता रहा है।

  • वर्तमान विधायक: राजीव कुमार सिंह उर्फ बब्बू भैया (भाजपा)। उन्होंने 2017 और 2022 में लगातार जीत दर्ज की है।

  • समीकरण: यहां यादव, मुस्लिम, दलित और शाक्य (OBC) वोट महत्वपूर्ण हैं। कभी कांग्रेस का गढ़ रही इस सीट पर अब भाजपा और सपा के बीच ही मुख्य मुकाबला देखने को मिलता है।