September 16, 2026

मोदी-RSS चैप्टर पर अटकी सोनिया की किताब? Penguin ने खींचे हाथ?

5355jcmk_sonia_625x300_28_August_26

नई दिल्ली: कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी की आगामी आत्मकथा ‘Belonging a Journey of Love’ के प्रकाशन से पहले ही बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। पहले इस किताब को मशहूर अंतरराष्ट्रीय प्रकाशक ‘पेंगुइन’ छापने वाला था, लेकिन गुरुवार को पेंगुइन ने इसे छापने से अपने कदम पीछे खींच लिए। कांग्रेस सूत्रों का दावा है कि पेंगुइन को किताब के पूरे कंटेंट पर नहीं, बल्कि तीन विशिष्ट अध्यायों पर आपत्ति है, जिनमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और चीन सीमा विवाद का जिक्र है।

विवाद की जड़: वे तीन अहम चैप्टर

कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक, सोनिया गांधी ने अपनी निजी यात्रा के साथ-साथ देश की वर्तमान राजनीति पर भी काफी कुछ लिखा है। जिन तीन विषयों पर प्रकाशक और लेखिका के बीच पेंच फंसा है, वे इस प्रकार हैं:

  • प्रधानमंत्री मोदी: कहा जा रहा है कि इस लेख में सोनिया गांधी ने पीएम मोदी के साथ हुई अपनी ‘वन-टू-वन’ (आमने-सामने) मुलाकातों और बातचीत का विस्तृत जिक्र किया है। इसमें प्रधानमंत्री द्वारा अपने भाषणों में सोनिया गांधी या अन्य विपक्षी महिला नेताओं पर की गई टिप्पणियों का भी संदर्भ दिया गया है।

  • चीन का अतिक्रमण: दूसरे चैप्टर में भारतीय जमीन पर चीन के कथित कब्जे और सरकार की नाकामी का उल्लेख है। पूर्व सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे की अप्रकाशित किताब का संदर्भ देते हुए भी इस विषय को उठाया गया है, जिसे लेकर पहले भी विवाद हो चुका है।

  • राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS): तीसरे विवादित हिस्से में संघ के बारे में लिखा गया है। सूत्रों के मुताबिक, इसमें विभिन्न संस्थाओं, विशेषकर शिक्षण संस्थानों पर RSS के कथित कब्जे की बात लिखी गई है, जो प्रकाशक के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।

क्या प्रकाशक कानूनी सुरक्षा के लिए सबूत मांग रहा है?

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि प्रधानमंत्री, चीन और संघ से जुड़े ये तीनों मुद्दे जनता के बीच पहले से ही मौजूद हैं। कांग्रेस पार्टी और राहुल गांधी सार्वजनिक मंचों से लगातार यही बातें कहते आए हैं। ऐसे में कुछ जानकारों का तर्क है कि प्रकाशक शायद सीधे तौर पर असहमत न हो, बल्कि वह इन संवेदनशील राजनीतिक दावों को छापने से पहले सौ फीसदी कानूनी सुरक्षा चाहता हो। संभव है कि पेंगुइन इन दावों के समर्थन में ऐसे ठोस सबूत मांग रहा हो, जिन्हें सार्वजनिक तौर पर छापा जा सके।

कांग्रेस नेताओं का आरोप- ‘लोकतंत्र की हत्या हो रही है’

किताब न छापे जाने की खबर आते ही कांग्रेस नेताओं ने सरकार पर प्रकाशक को डराने का आरोप लगाया है। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पर लिखा कि पेंगुइन वर्ल्डवाइड (Penguin Worldwide) इस किताब को इसके मूल स्वरूप में दुनियाभर में छापने को तैयार है, लेकिन पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया भारत में इसके लॉन्च के लिए बदलाव करवाना चाहता है।

उन्होंने आरोप लगाया, “पेंगुइन इंडिया पर दबाव डाला गया कि मोदी, RSS और चीन द्वारा भारतीय भूभाग पर कब्जे से जुड़े हिस्से हटाए जाएं। यह लोकतंत्र की हत्या है। सच को भारत की जनता के सामने आने से क्यों छिपाया जा रहा है? क्या मोदी सरकार प्रकाशकों पर दबाव डालकर तथ्यों को भी बदलवा देगी?” कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई और अन्य नेताओं ने भी इसे सरकार द्वारा सच छिपाने की कोशिश करार दिया है।

पाठकों की दिलचस्पी किन विषयों में है?

सूत्रों का कहना है कि सोनिया गांधी के ऐतिहासिक और निजी राजनीतिक फैसलों से जुड़े हिस्सों पर प्रकाशक को कोई आपत्ति नहीं है। जनता में इस बात को लेकर भारी उत्सुकता है कि उनकी राजीव गांधी से मुलाकात कैसे हुई और उन्होंने भारत आने का फैसला कब लिया।

किताब में शादी के बाद भारतीय नागरिकता लेने में लगे लंबे वक्त, इंदिरा गांधी के साथ उनके संस्मरण और मेनका गांधी के घर छोड़कर जाने के वाकये दर्ज हैं। इसके अलावा सोनिया का कांग्रेस अध्यक्ष बनना, 2004 में अटल बिहारी वाजपेयी सरकार को हराकर UPA की सरकार बनवाना, खुद प्रधानमंत्री न बनकर मनमोहन सिंह को कुर्सी सौंपना और अपने ऊपर लगे ‘विदेशी मूल’ के टैग को खत्म करने जैसे कई बड़े घटनाक्रमों का इसमें जिक्र है।

पेंगुइन के इनकार के बाद अब सोनिया गांधी की किताब को छापने के लिए अन्य प्रकाशक सामने आ रहे हैं। इस विवाद ने किताब को लेकर पाठकों के बीच एक नई बहस और उत्सुकता को जन्म दे दिया है।