September 16, 2026

IPS संजुक्ता पराशर बनीं COBRA फोर्स की पहली महिला IG, जानें ‘आयरन लेडी’ के बारे में

IPS Sanjukta Parasha

2006 बैच की आईपीएस अधिकारी संजुक्ता पराशर ने केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) की एलीट कोबरा (COBRA) बटालियन के महानिरीक्षक (IG) का पद संभाल लिया है। इस नियुक्ति के साथ ही संजुक्ता देश की इस सबसे खतरनाक कमांडो फोर्स का नेतृत्व करने वाली पहली महिला अधिकारी बन गई हैं। असम के जंगलों में उग्रवादियों के खिलाफ सीधे मोर्चे पर डटने के कारण उन्हें ‘आयरन लेडी ऑफ असम’ के नाम से भी जाना जाता है।

JNU से PhD, 85वीं रैंक के बावजूद IAS छोड़ चुनी खाकी

असम में जन्मी संजुक्ता पराशर ने दिल्ली के इंद्रप्रस्थ कॉलेज से पॉलिटिकल साइंस में ग्रेजुएशन किया है। इसके बाद उन्होंने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से इंटरनेशनल रिलेशंस में पीएचडी की डिग्री हासिल की। साल 2006 की यूपीएससी (UPSC) परीक्षा में उन्होंने ऑल इंडिया 85वीं रैंक हासिल की थी। इस शानदार रैंक के आधार पर वे आसानी से आईएएस बन सकती थीं, लेकिन उन्होंने आईपीएस को चुना।

2015 के उग्रवाद विरोधी अभियानों से चर्चा में आईं

संजुक्ता पराशर की पुलिस सर्विस में पहली पोस्टिंग साल 2008 में माकुम में असिस्टेंट कमांडेंट के रूप में हुई थी। इसके बाद उन्होंने सोनितपुर में बतौर पुलिस अधीक्षक (SP) भी सेवाएं दीं। अपने कार्यकाल के दौरान बोडो उग्रवाद के खिलाफ चलाए गए अभियानों में उनकी भूमिका बेहद अहम रही। 2015 में उनके ही नेतृत्व में असम में कई सफल उग्रवादी विरोधी ऑपरेशन चलाए गए।

NIA का अनुभव और खुफिया रणनीति आएगी काम

कोबरा फोर्स की कमान संभालने से पहले संजुक्ता पराशर राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) में बतौर डीआईजी (DIG) भी अपनी सेवाएं दे चुकी हैं। एनआईए में पोस्टिंग के दौरान उन्होंने कई आतंकी नेटवर्कों का पर्दाफाश किया और टेरर फंडिंग की जटिल कड़ियों को सुलझाने का काम किया। जंगल युद्ध और नक्सलियों से निपटने के लिए कोबरा फोर्स को सिर्फ ताकत ही नहीं, बल्कि सटीक खुफिया जानकारी और रणनीति की जरूरत होती है। संजुक्ता का खुफिया नेटवर्क और ऑपरेशंस का यही अनुभव अब कोबरा बटालियन के लिए अहम साबित होगा।

क्या है कोबरा फोर्स?

कोबरा (COBRA) कमांडो सीआरपीएफ की एक विशेष यूनिट है, जिसे मुख्य रूप से घने जंगलों में नक्सलियों और उग्रवादियों से निपटने के लिए तैयार किया गया है। यह फोर्स छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा और महाराष्ट्र के उन घने और दुर्गम जंगलों में ऑपरेशन चलाती है, जहां सूरज की किरणें भी बमुश्किल पहुंचती हैं। बारूदी सुरंगों (Landmines) के जाल और घात लगाकर बैठे नक्सलियों के बीच जंगल युद्ध (Jungle Warfare) लड़ने में इन जवानों को महारत हासिल होती है।