मोदी और शी जिनपिंग की अहम बैठक: एलएसी पर शांति, ब्रह्मपुत्र बांध और सुस्त व्यापार को पटरी पर लाने पर हुआ मंथन
नई दिल्ली में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के इतर 12 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक हुई। बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने सम्मेलन के दौरान चीन से मिले समर्थन और सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया। दोनों शीर्ष नेताओं के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर लंबे समय से जारी सैन्य तनाव को कम करने, अरुणाचल सीमा पर स्थिति, जल सुरक्षा और ठंडे पड़े व्यापारिक-आर्थिक रिश्तों को नए सिरे से संतुलित करने पर विस्तृत बातचीत हुई।
भारत ने बैठक में अपना पारंपरिक रुख दोहराते हुए स्पष्ट किया कि सीमा पर शांति और स्थिरता बहाल हुए बिना दोनों देशों के समग्र संबंधों में सामान्य स्थिति नहीं आ सकती। इसके उलट, चीन का रुख सीमा विवाद को अन्य द्विपक्षीय संबंधों से अलग रखने का रहा है।
एलएसी पर शांति और अरुणाचल का मुद्दा
बातचीत में पूर्वी क्षेत्र में एलएसी पर बने मतभेदों और जुलाई में अरुणाचल प्रदेश के ऊपरी सुबानसिरी जिले के ताकसिंग क्षेत्र में उपजे तनाव का मुद्दा उठा। उस गतिरोध के बाद दोनों देशों के बीच सैन्य कमांडर स्तर की वार्ताएं आयोजित हुई थीं।
भारतीय पक्ष ने कड़े शब्दों में स्पष्ट किया कि अरुणाचल प्रदेश देश का अटूट और अभिन्न अंग है। चीन की ओर से अरुणाचल प्रदेश के 27 स्थानों के नाम बदलने को लेकर बार-बार दर्ज कराई जाने वाली आपत्तियों और एलएसी के पूर्वी सेक्टर में जारी असहमति पर भी दोनों नेताओं के बीच विमर्श हुआ।
ब्रह्मपुत्र पर विशाल बांध और जल सुरक्षा की चिंता
तिब्बत में यारलुंग त्सांगपो नदी के ऊपरी हिस्से पर चीन द्वारा प्रस्तावित विशाल हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट का मुद्दा भी भारत ने बैठक में प्रमुखता से उठाया। चीन करीब 137 अरब डॉलर की लागत से इस बांध का निर्माण करने की योजना बना रहा है।
भारत ने इस बांध से नदी के निचले हिस्से (भारतीय क्षेत्रों) पर पड़ने वाले संभावित दुष्प्रभावों को लेकर चिंता जाहिर की और इस परियोजना से जुड़े हाइड्रोलॉजिकल आंकड़े साझा करने की मांग रखी। हाल के दिनों में क्षेत्र में बदलते मौसम और ग्लेशियरों में आ रहे बदलावों को देखते हुए ब्रह्मपुत्र नदी के जल प्रवाह को लेकर भारत की सतर्कता और बढ़ गई है।
सप्लाई चेन, उपकरण आयात और वीजा पाबंदियां
आर्थिक मोर्चे पर भारतीय सामानों को चीनी बाजार में पहुंच देने और सप्लाई चेन पर अत्यधिक निर्भरता के मसले पर चर्चा हुई। चीन की तरफ से प्रमुख तकनीकों, मशीनरी और स्पेयर पार्ट्स के निर्यात पर लगाई गई पाबंदियों के कारण भारतीय उद्योगों को आपूर्ति में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था।
इसके साथ ही भारतीय कारोबारियों पर लगी वीजा पाबंदियों और कारोबारी माहौल की समीक्षा की गई। हालांकि इलेक्ट्रॉनिक्स, कैपिटल गुड्स और सोलर सेल जैसे क्षेत्रों में पाबंदियों में कुछ ढील मिली है, लेकिन अन्य कई क्षेत्रों में सरकारी मंजूरी की प्रक्रिया अभी भी धीमी है। हाल ही में डिक्सन टेक्नोलॉजीज और वीवो (Vivo) के बीच हुई साझेदारी को कारोबारी क्षेत्र में एक सकारात्मक कदम के रूप में देखा गया।
दीर्घकालिक स्थिरता और संस्थागत व्यवस्था पर जोर
इस उच्चस्तरीय बैठक का मुख्य उद्देश्य केवल तात्कालिक संकट का प्रबंधन करना नहीं, बल्कि दोनों देशों के बीच मतभेदों को सुलझाने के लिए एक दीर्घकालिक और भरोसेमंद रूपरेखा तैयार करना था। दोनों पक्ष पहले से स्थापित कूटनीतिक और सैन्य तंत्रों के जरिए विवादों को सुलझाने और द्विपक्षीय संबंधों को एक स्थिर दिशा देने पर सहमत हुए।
