केदारनाथ जैसी तबाही-1978 से लेकर अब तक 10 बार हो चुका है जलप्रलय
काठमांडू: पहाड़ों पर एवलांच और ग्लेशियर फटने के बाद नेपाल में एक बार फिर कुदरत का खौफनाक कहर देखने को मिला है। 26 अगस्त 2026 की सुबह भोटे कोशी और त्रिशूली नदी में आए भयानक उफान ने भारत में साल 2013 की ‘केदारनाथ आपदा’ की दर्दनाक यादें ताजा कर दी हैं। पहाड़ों से भारी मात्रा में आए पानी और मलबे के प्रचंड वेग ने नेपाल के रसुवा जिले के 25 से ज्यादा गांवों का नामोनिशान मिटा दिया है।
ताश के पत्तों की तरह बहे घर, पुल और प्रोजेक्ट
बाढ़ का वेग इतना तेज था कि वह अपने रास्ते में आने वाली हर चीज को बहा ले गया। इस विनाशकारी आपदा ने लोगों के घर, दुकानें, सड़कें और होटलों को पूरी तरह से नष्ट कर दिया है। नदी पर बने कई मजबूत पुल और करोड़ों रुपये की लागत वाले हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट (Hydropower Projects) भी सैलाब में बह गए। अचानक आई इस तबाही से पूरा रसुवा जिला बुरी तरह प्रभावित हुआ है और जान-माल का भारी नुकसान हुआ है।
13 महीने में दूसरी बार 30KM लंबे स्ट्रेच में तबाही
हैरानी की बात यह है कि भोटे कोशी नदी के इस क्षेत्र के लिए यह आपदा अप्रत्याशित नहीं है। भौगोलिक रूप से संवेदनशील माने जाने वाले इस 30 किलोमीटर लंबे नदी क्षेत्र में महज 13 महीनों के भीतर यह दूसरी बार है, जब इतनी भीषण बाढ़ आई है। बार-बार आ रही इन आपदाओं ने नदी किनारे बसे इलाकों के अस्तित्व पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
1978 से लेकर अब तक 10 बार हो चुका है जलप्रलय
नेपाल में हिमालयी नदियों का उफान और ग्लेशियर फटने जैसी घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं। यह पहला मौका नहीं है जब देश ने ऐसी प्राकृतिक तबाही का सामना किया हो। ऐतिहासिक आंकड़ों पर नजर डालें तो साल 1978 से लेकर 2026 तक नेपाल कुल 10 बार ऐसे ही भयावह तबाही के मंजर देख चुका है। एवलांच और भूस्खलन के चलते हिमालयी देश को प्राकृतिक आपदाओं की भारी कीमत चुकानी पड़ रही है।
