September 16, 2026

क्या चीन के डैम से नेपाल में आई बाढ़? जानें ड्रैगन का जवाब

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काठमांडू/बीजिंग: नेपाल-चीन बॉर्डर पर हाल ही में आई भयानक फ्लैश फ्लड (Flash Flood) ने भारी तबाही मचाई है। इस आपदा में अब तक कम से कम 172 लोगों की मौत हो चुकी है। इस भीषण तबाही के बाद अब एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है—क्या चीन की तरफ से अगर समय रहते चेतावनी मिल जाती, तो नेपाल में जान-माल का इतना भारी नुकसान टाला जा सकता था? वहीं, कुछ रिपोर्ट्स में चीन के डैम टूटने से बाढ़ आने की आशंका भी जताई जा रही है, जिस पर अब बीजिंग का जवाब सामने आया है।

नेपाल में उठा चेतावनी न मिलने का मुद्दा

नेपाल के स्थानीय लोगों और विशेषज्ञों का तर्क है कि आपदा के संकेत पहले ही मिल सकते थे। ‘नया पत्रिका’ के नेपाली पत्रकार परशुराम काफ्ले ने समय पर चेतावनी (Warning) न मिलने को लेकर चीन की आलोचना की है। वहीं, नेशनल प्लानिंग कमीशन के पूर्व वाइस चेयरमैन डॉ. गोविंद राज पोखरेल ने कहा कि एडवांस सैटेलाइट तकनीक से इस आपदा का पहले ही पता लगाया जा सकता था।

उन्होंने बताया कि निचले इलाकों के लोग इस सैलाब के लिए बिल्कुल तैयार नहीं थे क्योंकि वहां कोई खास बारिश नहीं हुई थी। बाढ़ का पानी इतनी तेजी से आया कि लोगों को अलर्ट कर रहे पुलिसकर्मी भी उसकी चपेट में आ गए। विशेषज्ञों ने मांग की है कि हिमालयी क्षेत्रों में ग्लेशियल लेक फटने और भूस्खलन जैसी आपदाओं की निगरानी के लिए नेपाल और चीन के बीच बेहतर तालमेल होना चाहिए।

चीन ने डैम टूटने के आरोपों को बताया ‘फर्जी’

नेपाल में उठ रहे सवालों और डैम टूटने की अटकलों के बीच, नेपाल स्थित चीनी दूतावास ने इन दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। बीजिंग ने इन आरोपों को ‘फर्जी’ करार देते हुए कहा कि चीनी इलाके में किसी डैम के टूटने से नेपाल में तबाही नहीं मची है।

चीन ने दावा किया है कि 26 अगस्त को नेपाली इलाके में ही ग्लेशियर से जुड़ी कोई घटना हुई या भूकंप जैसे हालात बने, जिसके कारण बॉर्डर के दोनों तरफ बड़े पैमाने पर लैंडस्लाइड (भूस्खलन) हुआ और लोगों की जान गई। चीन ने आरोपों का खंडन करते हुए इस बात पर जोर दिया कि आपदा के समय ‘सहयोग से ही जानें बचती हैं।’

आखिर अचानक क्यों आया सैलाब? (ICIMOD की रिपोर्ट)

भूकंप की शुरुआती थ्योरी को USGS की रिपोर्ट ने खारिज कर दिया है, क्योंकि उस इलाके में कोई भूकंप दर्ज नहीं हुआ।

इंटरनेशनल सेंटर फॉर इंटिग्रेटेड माउंटेन डेवलपमेंट (ICIMOD) के विशेषज्ञों का मानना है कि यह तबाही नेपाल-चीन बॉर्डर के पास विशाल हिमस्खलन (Avalanche) के कारण आई। नेपाल के आपदा प्रबंधन अधिकारियों के मुताबिक, रासुवागढ़ी से करीब 20 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में एक ग्लेशियर के पास का बड़ा हिस्सा टूटकर अलग हो गया। बर्फ और चट्टानों का यह भारी मलबा किसी नदी या ग्लेशियल झील में गिरा, जिसने पानी का रास्ता रोक दिया। इसके बाद यह मलबा पानी और बर्फ के साथ लेन्डे खोला (Lende Khola) से होते हुए प्रचंड वेग से भोटे कोशी नदी में जा गिरा, जिससे यह विनाशकारी फ्लैश फ्लड आई।