‘नेहरू ने चुराया था सरदार पटेल का वोट’, SIR विवाद पर संबित पात्रा का कांग्रेस पर प्रहार
देश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष के आरोपों पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने जोरदार पलटवार किया है। शनिवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए बीजेपी सांसद और राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने विपक्षी दलों, खासकर कांग्रेस पर तीखा हमला बोला और देश की पहली ‘वोट चोरी’ का आरोप पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू पर लगा दिया।
नेहरू पर सरदार पटेल का वोट चुराने का आरोप
संबित पात्रा ने कहा कि विपक्ष आज लोकतंत्र के साथ मजाक कर रहा है, जबकि सच्चाई यह है कि देश में सबसे पहली वोट चोरी नेहरू के समय में ही हुई थी। उन्होंने आरोप लगाया, “सरदार वल्लभभाई पटेल का वोट चोरी करके ही जवाहरलाल नेहरू प्रधानमंत्री बने थे। उससे पहले सरदार पटेल को प्रधानमंत्री बनाने के लिए बाकायदा वोटिंग हुई थी, लेकिन नेहरू ने वह वोट चुरा लिया।”
‘कांग्रेस राज में 10 बार हुआ SIR, 13 करोड़ कटते तो लोग सड़कों पर होते’
विपक्ष के उन आरोपों का जवाब देते हुए जिनमें 13.2 करोड़ मतदाताओं के नाम डिलीट करने की बात कही जा रही है, संबित पात्रा ने कहा कि यह कोई नई प्रक्रिया नहीं है। उन्होंने कहा, “कांग्रेस के समय में भी 10 बार SIR (Special Intensive Revision) की प्रक्रिया हो चुकी है। अगर सच में SIR के जरिए 13 करोड़ लोगों के नाम काटे गए होते, तो आज वे लोग सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे होते।”
उन्होंने स्पष्ट किया और दावा किया कि चुनाव आयोग ने उन करीब 1 करोड़ लोगों के नाम काटे हैं, जो अवैध रूप से दो जगहों पर मतदान करते थे।
कल रामलीला मैदान में INDIA गठबंधन की महारैली
बता दें कि कांग्रेस के नेतृत्व में INDIA गठबंधन 1 नवंबर, 2026 (रविवार) को दिल्ली के रामलीला मैदान में SIR के मुद्दे पर एक बड़ी महारैली करने जा रहा है। इस रैली में कांग्रेस, TMC (तृणमूल कांग्रेस) और RJD (राष्ट्रीय जनता दल) समेत कई दल शामिल होंगे। विपक्ष मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और SIR में कथित धांधली की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहा है।
क्या है SIR विवाद?
SIR (Special Intensive Revision) चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची की जांच और उसे अपडेट करने की एक नियमित प्रक्रिया है। इसका मुख्य उद्देश्य मृत, ट्रांसफर हो चुके, डुप्लीकेट और अपात्र मतदाताओं के नाम हटाना है। यह प्रक्रिया 2025-26 में शुरू हुई थी। हालांकि, विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों का आरोप है कि इस प्रक्रिया की आड़ में बड़ी संख्या में वास्तविक और पात्र मतदाताओं के नाम जानबूझकर काटे जा रहे हैं। इसी मुद्दे पर विपक्ष CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अभियान चला रहा है।
