कांग्रेस की 125-140 सीटों की सूची तैयार, अखिलेश से जल्द होगी औपचारिक बात, जानें क्या है सीट बंटवारे का फॉर्मूला?
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले विपक्षी गठबंधन INDIA के भीतर सीटों के बंटवारे को लेकर हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस ने समाजवादी पार्टी (SP) के साथ सीट शेयरिंग की तैयारियां शुरू कर दी हैं। प्रियंका गांधी वाड्रा के आवास पर हुई एक अहम बैठक में इस रणनीति पर मंथन किया गया कि सपा के सामने कांग्रेस अपना दावा किस तरह मजबूती से रखेगी।
सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस नेतृत्व ने 125 से 140 संभावित सीटों की एक सूची तैयार की है, जिसे जल्द ही सपा नेतृत्व को सौंपा जा सकता है। पार्टी अब केवल गठबंधन की बात करने के बजाय उन विधानसभा क्षेत्रों को चिन्हित कर रही है, जहां वह अपने स्थानीय संगठन और सपा के समर्थन के दम पर जीत की मजबूत स्थिति में है।
सीट चयन का कांग्रेस का फॉर्मूला
सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस अगले कुछ दिनों में संभावित सीटों पर आंतरिक मंथन पूरा कर लेगी। इसके बाद तीन से चार दिन में यह सूची अखिलेश यादव को सौंपी जा सकती है। सीटों के चयन के लिए पार्टी ने कुछ मुख्य पैमानों पर जोर दिया है:
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जीत की क्षमता: उन सीटों को प्राथमिकता दी जा रही है जहां कांग्रेस उम्मीदवार सीधे मुकाबले में मजबूत स्थिति में हों।
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जातीय और सामाजिक समीकरण: पिछले चुनाव के नतीजों के साथ-साथ पिछड़े वर्गों, दलितों और अल्पसंख्यक मतदाताओं के प्रभाव का आकलन।
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परंपरागत सीटें: उन विधानसभा क्षेत्रों पर दावा, जहां कांग्रेस का ऐतिहासिक आधार और स्थानीय संगठन आज भी सक्रिय है।
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लचीलापन: बातचीत के दौरान जीत की संभावना के आधार पर सीटों की अदला-बदली की गुंजाइश भी रखी गई है।
150 सीटों का पुराना दावा और नई सूची में अंतर
इससे पहले सितंबर के अंत में यूपी कांग्रेस के प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि गठबंधन के तहत कांग्रेस कम से कम 150 सीटों पर चुनाव लड़ना चाहती है। उन्होंने 403 सदस्यीय विधानसभा में आधी सीटों पर अपनी दावेदारी का तर्क दिया था।
125-140 सीटों की यह नई संभावित सूची कांग्रेस की प्राथमिकता वाली सीटों की पहचान मानी जा रही है, जबकि 150 सीटों का आंकड़ा उनकी राजनीतिक दावेदारी को दर्शाता है। कांग्रेस का तर्क है कि सीटों का बंटवारा केवल संख्या के आधार पर नहीं, बल्कि संगठन की मजबूती और जीत की संभावनाओं के आधार पर होना चाहिए।
अखिलेश यादव की PDA रणनीति और चुनौतियां
सपा प्रमुख अखिलेश यादव के लिए गठबंधन को एकजुट रखने के साथ-साथ अपने संगठन और सहयोगी दलों के बीच संतुलन साधना एक बड़ी चुनौती है। सपा का पूरा फोकस अपने पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक (PDA) समीकरण को मजबूत करने पर है।
हाल ही में 18 अक्टूबर को अखिलेश यादव ने मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण को लेकर भाजपा पर आरोप लगाए थे और पार्टी कार्यकर्ताओं से सतर्क रहने की अपील की थी। यह साफ संकेत है कि सपा सीटों के फैसले में अपने वोट बैंक और संगठन की जमीनी हकीकत को सर्वोपरि रखेगी।
नई टीम के साथ मैदान में कांग्रेस
कांग्रेस ने यूपी में संगठन को धार देने के लिए आराधना मिश्रा ‘मोना’ को प्रदेश अध्यक्ष और इमरान मसूद को कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया है। इमरान मसूद पहले ही कह चुके हैं कि कांग्रेस सपा को नेतृत्वकारी भूमिका देने के लिए तैयार है, लेकिन गठबंधन में कांग्रेस के सम्मान और उसकी हिस्सेदारी का भी पूरा ध्यान रखा जाना चाहिए।
2024 के लोकसभा चुनाव में सपा और कांग्रेस के गठबंधन ने राज्य में भाजपा के सामने मजबूत चुनौती पेश की थी। अब अगले सप्ताह होने वाली औपचारिक बातचीत से यह तस्वीर साफ होगी कि क्या अखिलेश यादव कांग्रेस की इस संभावित सूची पर सहमत होंगे या फिर सीटों की संख्या पर नए सिरे से माथापच्ची होगी।
