हेग जस्टिस डायलॉग में मंजूर पश्तीन ने खोली आसिम मुनीर की पोल, बताया कैसे सेना पाल रही आतंकी

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अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान की फजीहत का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। हाल ही में नीदरलैंड्स के द हेग में आयोजित ‘हेग जस्टिस डायलॉग-2026’ में पाकिस्तान को एक बार फिर भारी शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा। पश्तून तहफ्फुज मूवमेंट (PTM) के प्रमुख मंजूर पश्तीन (Manzoor Pashteen) ने एक वैश्विक मंच पर पाकिस्तानी सेना और उसकी खुफिया एजेंसियों की पोल खोलकर रख दी।

पश्तीन ने पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर (Asim Munir) और सैन्य प्रतिष्ठान पर सीधे आरोप लगाया कि वे पश्तून इलाकों में जानबूझकर आतंकवादी समूहों को फंडिंग, ट्रेनिंग और पनाह दे रहे हैं।

‘सेना कर रही आतंकवाद विरोधी अभियानों का गलत इस्तेमाल’

‘हेग जस्टिस डायलॉग’ को संबोधित करते हुए मंजूर पश्तीन ने दावा किया कि पाकिस्तानी सेना आतंकवाद खत्म करने के नाम पर चलाए जा रहे अभियानों का गलत इस्तेमाल कर रही है। पश्तीन के मुताबिक:

  • सेना इन अभियानों की आड़ में स्थानीय पश्तून आबादी को जबरन विस्थापित (Forced Displacement) कर रही है।

  • इस पूरे खेल का मुख्य उद्देश्य खैबर पख्तूनख्वा (KPK) और पश्तून इलाकों की अकूत खनिज संपदा पर अवैध कब्जा करना है।

पश्तीन ने कहा, “पिछले दो दशकों से अधिक समय से चलाए जा रहे इन सैन्य अभियानों की वजह से हजारों निर्दोष पश्तून नागरिकों की जान जा चुकी है, हजारों लोग ‘लापता’ (Enforced Disappearances) हो गए हैं और लाखों लोगों को अपना घर-बार छोड़कर भागना पड़ा है। लेकिन हैरानी की बात यह है कि इतना सब होने के बावजूद आज तक खैबर पख्तूनख्वा में शांति कायम नहीं हो सकी है।”

पाकिस्तानी राजनयिकों को छोड़कर जाना पड़ा मंच

PTM प्रमुख के इन तीखे आरोपों के दौरान कार्यक्रम में मौजूद पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल की भारी फजीहत हुई। मंच पर पश्तीन जब पाकिस्तानी सेना और हुक्मरानों की करतूतें गिना रहे थे, तभी असहज महसूस कर रहे पाकिस्तान के विशेष दूत आसिफ दुर्रानी (Asif Durrani) और अन्य पाकिस्तानी राजनयिक बीच कार्यक्रम से उठकर बाहर चले गए।

इंटरनेशनल कोर्ट में पहले भी हो चुकी है पाकिस्तान की किरकिरी

अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) और अन्य वैश्विक मंचों पर पाकिस्तान का यह पहला अपमान नहीं है। इससे पहले भी उसे कई बार बड़ी कानूनी और कूटनीतिक हार का सामना करना पड़ा है:

  • कुलभूषण जाधव केस (2019):

  • भारत ने मई 2017 में ICJ का रुख किया था। जुलाई 2019 में इंटरनेशनल कोर्ट ने पाकिस्तान के तर्कों को खारिज करते हुए जाधव की फांसी की सजा पर रोक लगा दी थी और भारत को तुरंत काउंसलर एक्सेस देने का सख्त आदेश दिया था।

  • अटलांटिक विमान एक्सीडेंट केस (1999):

  • भारत द्वारा पाकिस्तानी नौसेना के घुसपैठिए अटलांटिक विमान को मार गिराए जाने के बाद पाकिस्तान ने ICJ में 60 मिलियन डॉलर के मुआवजे का दावा किया था, जिसे कोर्ट ने सिरे से खारिज कर दिया था।

  • इसके अलावा, सिंधु जल संधि (Indus Water Treaty) विवाद और अंतरराष्ट्रीय व्यापार व निवेश से जुड़े कई मामलों में भी पाकिस्तान को इंटरनेशनल कोर्ट में मुंह की खानी पड़ी है।