अकाली दल की NDA में वापसी की अटकलें तेज, विवादों से दूर हरसिमरत कौर बन सकती हैं गठबंधन का चेहरा
पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक समीकरण आकार लेने लगे हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा राज्य में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की सरकार बनाने के दावे के बाद, शिरोमणि अकाली दल (SAD) के फिर से एनडीए में शामिल होने की चर्चाएं तेज हो गई हैं। इन राजनीतिक हलचलों के बीच भटिंडा सांसद हरसिमरत कौर बादल को गठबंधन के चेहरे के तौर पर पेश किए जाने की खबरें सामने आ रही हैं। अकाली दल या बीजेपी की ओर से अभी इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन पंजाब के मौजूदा राजनीतिक हालात और बीजेपी के अंदरूनी सूत्रों के हवाले से उनके नाम पर सहमति बनने के संकेत मिल रहे हैं।
सुखबीर बादल पर राजनीतिक जोखिम से परहेज
अकाली दल के प्रमुख सुखबीर सिंह बादल पिछले काफी समय से विभिन्न धार्मिक और राजनीतिक विवादों का सामना कर रहे हैं। 2 दिसंबर 2024 को अकाल तख्त साहिब ने उन्हें धार्मिक कदाचार का दोषी ठहराया था। 2007 से 2017 तक सत्ता में रहने के दौरान लिए गए कई फैसलों और विशेषकर 2015 की बेअदबी की घटना के बाद से उनकी राजनीतिक भूमिका पर लगातार सवाल उठते रहे हैं। इन्हीं विवादों के चलते आगामी चुनाव में उनके चेहरे पर दांव लगाने का राजनीतिक जोखिम लेने से बचा जा रहा है।
मजीठिया पर नशा तस्करी मामले की जांच
सुखबीर बादल के अलावा अकाली दल के एक अन्य प्रमुख चेहरे विक्रम सिंह मजीठिया भी नशा तस्करी मामले में कानूनी कार्रवाई का सामना कर रहे हैं। हाल ही में विशेष जांच दल (SIT) ने उनसे पूछताछ की है। पंजाब में बीजेपी लगातार नशे के खिलाफ अभियान चला रही है, ऐसे में गठबंधन की स्थिति में मजीठिया को आगे करने से विवाद खड़ा हो सकता है।
हरसिमरत कौर के नाम पर सहमति के कारण
मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में हरसिमरत कौर बादल सबसे मजबूत विकल्प के रूप में उभर रही हैं। वह 2009, 2014, 2019 और 2024 में भटिंडा लोकसभा सीट से लगातार चुनाव जीतकर अपनी मजबूत राजनीतिक जमीन साबित कर चुकी हैं। हरसिमरत केंद्र की मोदी सरकार में मंत्री भी रह चुकी हैं और सितंबर 2020 में कृषि कानूनों के विरोध में उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था।
पंजाब में हरसिमरत कौर एक बड़ा महिला चेहरा मानी जाती हैं। महिला मतदाताओं के बीच उनकी मजबूत पैठ है, जो चुनाव में एक बड़ा वोट बैंक साबित हो सकता है। इन्हीं समीकरणों के आधार पर गठबंधन में उनके नाम पर मुहर लगने की संभावनाएं सबसे अधिक बताई जा रही हैं।
