श्रीलंकाई हिंदू कामगार को सजा-ए-मौत: 5 साल की जेल शरिया कानून में बदली
सऊदी अरब में पैगंबर मोहम्मद और इस्लाम को लेकर फेसबुक पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी करने के आरोप में 24 वर्षीय श्रीलंकाई हिंदू प्रवासी मजदूर शिवरासा अनोझन को अदालत ने मौत की सजा सुनाई है। निचली अदालत द्वारा पहले सुनाई गई 5 साल की जेल की सजा को अपीलीय अदालत ने शरिया कानून के तहत मृत्युदंड में तब्दील कर दिया। इस फैसले के बाद श्रीलंका में राजनीतिक, कानूनी और कूटनीतिक स्तर पर अनोझन की जान बचाने की कवायद शुरू हो गई है।
ऑनलाइन धार्मिक बहस से शुरू हुआ विवाद
मूल रूप से श्रीलंका के कल्मुनई के रहने वाले शिवरासा अनोझन सऊदी अरब में काम कर रहे थे। जून 2026 में सोशल मीडिया पर एक हिंदू तीर्थयात्रा के दौरान एक मुस्लिम युवक और कुत्ते से जुड़े वीडियो को लेकर ऑनलाइन बहस शुरू हुई थी।
इस बहस के दौरान जब एक दूसरे यूजर ने हिंदू देवी-देवता को लेकर कथित तौर पर अपमानजनक टिप्पणी की, तो इसके जवाब में अनोझन ने तमिल भाषा में पैगंबर मोहम्मद को लेकर एक टिप्पणी पोस्ट कर दी। अनोझन ने बाद में अपनी विवादित पोस्ट को हटाते हुए एक माफी का वीडियो भी जारी किया था, लेकिन तब तक उनकी मूल पोस्ट का स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया पर फैल चुका था। इसके बाद श्रीलंका के कुछ लोगों ने सऊदी अरब स्थित अनोझन के नियोक्ता (एम्प्लॉयर) को इसकी जानकारी दी, जिसके बाद नियोक्ता ने स्थानीय पुलिस अधिकारियों से शिकायत कर दी।
5 साल की जेल से सीधे मृत्युदंड: अदालत का फैसला
मामले की सुनवाई करते हुए 15 जुलाई 2026 को सऊदी अरब की अल-अहसा क्रिमिनल कोर्ट ने अनोझन को 5 साल के कारावास और 30 लाख सऊदी रियाल के जुर्माने की सजा सुनाई थी। अनोझन की ओर से सजा कम करने की अपील खारिज कर दी गई थी।
निचली अदालत के इस फैसले के खिलाफ सऊदी अभियोजकों (प्रॉसिक्यूटर्स) ने ऊपरी अदालत का रुख किया। अभियोजन पक्ष ने दलील दी कि इस मामले को सामान्य साइबर अपराध कानूनों के बजाय सख्त शरिया कानून के तहत देखा जाना चाहिए। अपीलीय अदालत ने अभियोजन पक्ष की इस मांग को स्वीकार करते हुए 17 सितंबर 2026 को पिछली सजा को रद्द कर अनोझन को सीधे सजा-ए-मौत सुना दी।
राष्ट्रपति दिसानायके से मिला परिवार, सुप्रीम कोर्ट में अपील की तैयारी
सजा-ए-मौत के फैसले के बाद अनोझन के परिजनों ने 21 सितंबर को श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके से मुलाकात कर हस्तक्षेप की गुहार लगाई। श्रीलंका सरकार ने परिवार को कानूनी सहायता और सऊदी अरब के अधिकारियों के साथ कूटनीतिक स्तर पर बातचीत का आश्वासन दिया है।
श्रीलंका की ओर से एक चार सदस्यीय कानूनी प्रतिनिधिमंडल सऊदी सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर करने के लिए दस्तावेज तैयार कर रहा है। इसके साथ ही श्रीलंका के कई प्रमुख नेताओं, बौद्ध भिक्षुओं और हिंदू धार्मिक संगठनों ने भी सऊदी सरकार से मानवीय आधार पर माफी देने की अपील की है।
28 सितंबर से कोई संपर्क नहीं, मां ने लगाई माफी की गुहार
परिजनों के अनुसार, 28 सितंबर 2026 के बाद से उनका अनोझन से कोई संपर्क नहीं हो सका है और न ही उनकी मौजूदा स्थिति के बारे में कोई नई जानकारी मिल पाई है। अनोझन की मां रासामणिक्कम योगलक्ष्मी ने सऊदी अधिकारियों से सार्वजनिक रूप से रहम की अपील की है। उन्होंने सऊदी प्रशासन से अपने बेटे को क्षमादान देने और उसे जीवित स्वदेश लौटने की अनुमति देने की गुजारिश की है, जबकि कोलंबो में विदेश मंत्रालय के जरिए कूटनीतिक चैनल सक्रिय रखे गए हैं।
