भारतीय मूल की नवी पिल्लई को 2026 का नोबेल शांति पुरस्कार: अंतरराष्ट्रीय कानून और शांति प्रयासों के लिए मिला सर्वोच्च सम्मान
भारतीय मूल की जानी-मानी वकील नवनेथम ‘नवी’ पिल्लई (Navanethem Navi Pillay) को साल 2026 के नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित करने का ऐलान किया गया है। नोबेल समिति ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल के जरिए इस फैसले की सार्वजनिक घोषणा की। समिति के अनुसार, नवी पिल्लई को यह प्रतिष्ठित वैश्विक सम्मान अंतरराष्ट्रीय कानून को मजबूत करने और शांति को बढ़ावा देने की दिशा में उनके निरंतर प्रयासों के लिए दिया जा रहा है।
नोबेल शांति पुरस्कार के 125वें वर्ष पर घोषणा
नॉर्वेजियन नोबेल कमेटी के चेयरमैन जोर्गेन वाट्ने फ्राइडनेस ने पिल्लई के नाम का ऐलान करते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कानून के शासन और शांति को आगे बढ़ाने में उनके काम को यह सम्मान दिया गया है। गौरतलब है कि इस वर्ष नोबेल शांति पुरस्कार की 125वीं सालगिरह है, जिस मौके पर दुनिया के इस सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कार के लिए पिल्लई के नाम पर मुहर लगाई गई है।
डरबन में बीता बचपन, रंगभेद के दौर में झेला बहिष्कार
दक्षिण अफ्रीका के डरबन में 23 सितंबर 1941 को जन्मीं नवी पिल्लई भारतीय तमिल मूल के परिवार से ताल्लुक रखती हैं। उनका जन्म नरैनसामी नायडू और संथामा नायडू के घर एक बेहद सामान्य और पिछड़े इलाके में हुआ था।
उनका शुरुआती जीवन और वकालत की शुरुआत उस दौर में हुई जब दक्षिण अफ्रीका में सरकारी स्तर पर रंगभेद (Apartheid) की नीति लागू थी। एक गैर-श्वेत महिला वकील के रूप में अपना पेशा शुरू करते समय उन्हें सामाजिक स्तर पर गहरे नस्लीय भेदभाव और बहिष्कार का सामना करना पड़ा, जिसके खिलाफ उन्होंने कानूनी लड़ाई जारी रखी।
1890 में बंधुआ मजदूर बनकर दक्षिण अफ्रीका पहुंचे थे दादा-दादी
पिल्लई की पारिवारिक पृष्ठभूमि सीधे तौर पर भारतीय प्रवासियों के संघर्ष से जुड़ी है। साल 1890 के आसपास उनके दादा-दादी को भारत से दक्षिण अफ्रीका लाया गया था, जहां उन्हें वहां के चीनी बागानों में बंधुआ मजदूर के तौर पर काम पर लगाया गया था। उसी साधारण पृष्ठभूमि से निकलकर नवी पिल्लई ने कानून के क्षेत्र में मुकाम बनाया और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान स्थापित की।
