चित्रकूट और मानिकपुर में सधने लगे सियासी समीकरण, एक पर सपा का कब्जा तो दूसरी पर NDA का कड़ा इम्तिहान; जानें पूरा इतिहास

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उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों ने बुंदेलखंड के चित्रकूट जिले में सांगठनिक और सियासी बिसात बिछानी शुरू कर दी है। जिले के तहत आने वाली दोनों विधानसभा सीटों—चित्रकूट और मानिकपुर पर पिछले कुछ चुनावों से समाजवादी पार्टी (SP) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) व उसके सहयोगी अपना दल (सोनेलाल) के बीच सीधा मुकाबला रहा है। चित्रकूट सीट पर जहां 2022 में सपा ने 20 हजार से अधिक मतों से बड़ी जीत दर्ज की थी, वहीं मानिकपुर सीट पर एनडीए गठबंधन के अपना दल (एस) ने महज 1,048 वोटों के बेहद करीबी अंतर से बाजी मारी थी।

2027 के रण में सपा जहां चित्रकूट में जीत दोहराने और मानिकपुर छीनने के इरादे से मैदान में उतरेगी, वहीं भाजपा और एनडीए दोनों सीटों पर अपना परचम लहराने के लिए पूरा जोर लगाने की तैयारी में हैं।

चित्रकूट सीट: 2022 में सपा का कब्जा, कर्वी से चित्रकूट बनने का सफर

चित्रकूट विधानसभा सीट से वर्तमान में समाजवादी पार्टी के अनिल कुमार (अनिल प्रधान) विधायक हैं। 2022 के विधानसभा चुनाव में अनिल प्रधान ने भाजपा के तत्कालीन प्रत्याशी चंद्रिका प्रसाद उपाध्याय को 20,876 वोटों के बड़े अंतर से मात दी थी।

यह सीट वर्ष 2012 के परिसीमन के बाद ‘चित्रकूट’ नाम से अस्तित्व में आई, जबकि इससे पहले इसे ‘कर्वी’ (Karwi) विधानसभा क्षेत्र के नाम से जाना जाता था। इस सीट का राजनीतिक मिजाज समय के साथ कई चरणों में बदला है:

  • 1950-60 का दशक: कांग्रेस पार्टी का एकतरफा प्रभाव रहा।

  • 1970-90 का दशक: भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) यहां बेहद मजबूत ताकत बनकर उभरी।

  • 1990 से 2000 का दशक: बहुजन समाज पार्टी (BSP) ने यहां अपनी पैठ बनाई और लगातार जीत दर्ज की।

  • 2012 के बाद: मुख्य मुकाबला सपा और भाजपा के बीच सिमट गया। सपा ने 2012 और 2022 में यहां जीत दर्ज की, जबकि भाजपा को 2017 में सफलता मिली थी।

चित्रकूट (कर्वी) सीट का चुनावी रिकॉर्ड:

  • 1974, 1977: राम सजीवन (सीपीआई)

  • 1980: शिव नरेश (कांग्रेस)

  • 1985: राम सजीवन (सीपीआई)

  • 1989, 1991: राम प्रसाद सिंह (सीपीआई)

  • 1993: भैरों प्रसाद मिश्र (भाजपा)

  • 1996: रामकृपाल सिंह (बसपा)

  • 2002: आर.के. सिंह पटेल (बसपा)

  • 2007: दिनेश प्रसाद (बसपा)

  • 2012: वीर सिंह (सपा)

  • 2017: चंद्रिका प्रसाद उपाध्याय (भाजपा)

  • 2022: अनिल प्रधान (सपा)

मानिकपुर सीट: 1,048 वोटों का फासला, एनडीए के पाले में सत्ता

मानिकपुर विधानसभा सीट पर वर्तमान में अपना दल (सोनेलाल) के अविनाश चंद्र द्विवेदी विधायक हैं। अपना दल (एस) केंद्र और राज्य में भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन का हिस्सा है। 2022 के चुनाव में अविनाश चंद्र द्विवेदी ने कड़े संघर्ष में सपा उम्मीदवार वीर सिंह पटेल को मात्र 1,048 वोटों के बेहद मामूली अंतर से हराया था। हार-जीत का यह फासला बेहद कम रहने के चलते 2027 में यहां मुकाबला और दिलचस्प होने के आसार हैं।

आरक्षित से सामान्य हुई मानिकपुर सीट, बसपा के दबदबे से एनडीए तक

मानिकपुर सीट वर्ष 2008 के परिसीमन से पहले तक अनुसूचित जाति (SC) वर्ग के लिए आरक्षित थी, जिसके बाद इसे सामान्य सीट घोषित किया गया।

  • 1950 से 1980 के दशक तक यहां कांग्रेस और भारतीय जनसंघ के बीच मुकाबला रहा।

  • 1990 के दशक में भाजपा ने यहां चुनावी बढ़त हासिल की।

  • 1996 से 2012 तक मानिकपुर बसपा का मजबूत गढ़ बना रहा, जहां से पार्टी के वरिष्ठ नेता दद्दू प्रसाद लगातार तीन बार विधायक चुने गए।

  • 2017 के बाद से यह सीट भाजपा और एनडीए के कब्जे में है।

मानिकपुर सीट का चुनावी रिकॉर्ड:

  • 1962, 1969, 1989: सिया दुलारी (कांग्रेस)

  • 1967, 1974: इन्द्र पाल / लक्ष्मी प्रसाद (जनसंघ)

  • 1977: रमेश चंद (जनता पार्टी)

  • 1980, 1985: शिरोमणि भाई (कांग्रेस)

  • 1991, 1993: मन्नू लाल कुरील (भाजपा)

  • 1996, 2002, 2007: दद्दू प्रसाद (बसपा)

  • 2012: चंद्रभान सिंह पटेल (बसपा)

  • 2017: आर.के. सिंह पटेल (भाजपा)

  • 2019 (उपचुनाव): आनंद शुक्ला (भाजपा)

  • 2022: अविनाश चंद्र द्विवेदी (अपना दल – सोनेलाल)

2024 के लोकसभा आंकड़ों ने तय की नई जमीन

चित्रकूट जिले की दोनों सीटों पर 2024 के आम चुनाव के दौरान आए विधानसभा-वार आंकड़े भी आगामी 2027 के चुनाव की दृष्टि से अहम हैं। 2024 लोकसभा चुनाव के दौरान चित्रकूट विधानसभा खंड में सपा ने मजबूत बढ़त बनाई थी, जहां पार्टी को लगभग 91,569 वोट मिले थे, जबकि भाजपा और बसपा के वोट लगभग बराबर रहे थे। वहीं, मानिकपुर विधानसभा खंड में सपा और बसपा के बीच कड़ा मुकाबला दर्ज किया गया था। इन आंकड़ों के चलते सत्ताधारी एनडीए और मुख्य विपक्षी दल सपा दोनों ही अभी से बूथ स्तर पर रणनीति मजबूत करने में जुटे हैं।