कभी SP का मजबूत किला, अब BJP का दबदबा! 2027 के चुनाव से पहले समझें बहराइच की सभी 7 विधानसभा सीटों का सियासी गणित

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उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनावों को लेकर तैयारियां शुरू हो गई हैं। प्रदेश के अहम जिलों में शुमार बहराइच की राजनीति भी काफी दिलचस्प रही है। यह जिला कभी समाजवादी पार्टी (SP) और कद्दावर नेता डॉ. वकार अहमद शाह का अभेद्य किला माना जाता था, लेकिन हाल के चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने यहां गहरी पैठ बना ली है।

बहराइच जिले में 7 विधानसभा सीटें आती हैं—बलहा, नानपारा, मटेरा, महसी, बहराइच (सदर), पयागपुर और कैसरगंज। आइए, 2027 के महासमर से पहले जिले की सभी विधानसभा सीटों के चुनावी इतिहास और वर्तमान राजनीतिक समीकरण पर नजर डालते हैं।

1. बलहा विधानसभा सीट (सुरक्षित)

बलहा (Balha) विधानसभा सीट 2008 के परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई थी और यह अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित है।

  • दबदबा: परिसीमन के बाद से यह सीट भाजपा का गढ़ बन चुकी है। 2012, 2017, 2019 (उपचुनाव) और 2022 में यहां भाजपा ने जीत दर्ज की। सिर्फ 2014 के उपचुनाव में सपा को जीत मिली थी।

  • वर्तमान विधायक: सरोज सोनकर (भाजपा)। 2022 में उन्होंने सपा के अक्षयबर नाथ कनौजिया को करीब 16,573 वोटों से हराया था।

  • समीकरण: यहां दलित मतदाताओं की बड़ी संख्या है, जिसकी वजह से शुरुआत में बहुजन समाज पार्टी (BSP) की पकड़ मजबूत मानी जाती थी, लेकिन अब भाजपा ने इस सुरक्षित सीट पर अपना ठोस जनाधार तैयार कर लिया है।

2. नानपारा विधानसभा सीट

नानपारा (Nanpara) बहराइच की सबसे पुरानी सीटों में से एक है। यहां राजनीतिक उतार-चढ़ाव ज्यादा देखने को मिलते हैं।

  • दबदबा: यहां कभी किसी एक दल का स्थायी वर्चस्व नहीं रहा है। शुरुआत में कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) का प्रभाव था, फिर भाजपा, कांग्रेस, सपा और बसपा बारी-बारी से जीते।

  • वर्तमान विधायक: राम निवास वर्मा (अपना दल-सोनेलाल, NDA)। 2022 में उन्होंने सपा की माधुरी वर्मा को करीब 12,184 वोटों से मात दी थी।

  • समीकरण: 2017 और 2022 के चुनावों के नतीजों के आधार पर यह सीट वर्तमान में NDA के पास है, लेकिन यहां हर चुनाव में कड़ी टक्कर देखने को मिलती है।

3. मटेरा विधानसभा सीट

2008 के परिसीमन के बाद पुरानी चरदा सीट को खत्म करके मटेरा (Matera) विधानसभा क्षेत्र का गठन किया गया था।

  • दबदबा: यह सीट समाजवादी पार्टी का अभेद्य गढ़ है। 2012 (पहले चुनाव) से लेकर अब तक लगातार तीन बार सपा ने यहां से जीत दर्ज की है। यासर शाह और उनके परिवार का यहां गहरा प्रभाव है।

  • वर्तमान विधायक: मारिया शाह (सपा)। 2022 में उन्होंने भाजपा के अरुण वीर सिंह को 10,428 वोटों से हराया था।

  • समीकरण: मुस्लिम और यादव समीकरण की वजह से सपा को यहां बढ़त मिलती है, हालांकि भाजपा 2017 और 2022 में कड़ी चुनौती पेश कर चुकी है।

4. महसी विधानसभा सीट

यह सीट 1970 के दशक से अस्तित्व में है। महसी (Mahasi) क्षेत्र में सुरेश्वर सिंह के परिवार का राजनीतिक रसूख काफी पुराना है।

  • दबदबा: महसी हाल के वर्षों में भाजपा का मजबूत गढ़ बन चुका है। सुरेश्वर सिंह 2007, 2017 और 2022 में जीत हासिल कर चुके हैं।

  • वर्तमान विधायक: सुरेश्वर सिंह (भाजपा)। 2022 में उन्होंने सपा के कृष्ण कुमार ओझा को 42,684 वोटों के बड़े अंतर से हराया था।

  • समीकरण: 1980 के दशक में यहां कांग्रेस और 1990 में सपा का प्रभाव रहा, लेकिन पिछले दो चुनावों से भाजपा ने इसे पूरी तरह अपने पक्ष में कर लिया है।

5. बहराइच सदर विधानसभा सीट

जिले की मुख्य सीट बहराइच सदर (Bahraich Sadar) कभी सपा के वरिष्ठ नेता डॉ. वकार अहमद शाह का मजबूत किला थी, जिन्होंने 1993 से 2012 तक लगातार पांच बार यहां से चुनाव जीता था।

  • दबदबा: 2017 के चुनाव में भाजपा ने इस सीट पर कब्जा जमाकर सपा का तिलिस्म तोड़ दिया और 2022 में भी अपनी जीत बरकरार रखी।

  • वर्तमान विधायक: अनुपमा जायसवाल (भाजपा)। 2022 में उन्होंने सपा के यासर शाह को 4,078 वोटों के बेहद करीबी अंतर से हराया था।

  • समीकरण: शहरी और ग्रामीण मिश्रित आबादी वाली इस सीट पर अब सपा और भाजपा के बीच हर बार कांटे की टक्कर होती है।

6. पयागपुर विधानसभा सीट

यह सीट भी 2008 के परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई थी, जो कैसरगंज लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है।

  • दबदबा: 2012 में अपने पहले चुनाव में यहां से कांग्रेस ने जीत हासिल की थी, लेकिन 2017 से पयागपुर (Payagpur) भाजपा का गढ़ बन चुकी है।

  • वर्तमान विधायक: सुभाष त्रिपाठी (भाजपा)। 2022 में उन्होंने सपा प्रत्याशी (पूर्व विधायक) मुकेश श्रीवास्तव को 12,056 वोटों से हराया था।

  • समीकरण: यहां भाजपा और सपा के बीच सीधा मुकाबला रहता है, लेकिन लगातार दो बार जीत दर्ज कर भाजपा मजबूत स्थिति में है।

7. कैसरगंज विधानसभा सीट

बहराइच और गोंडा जिले की सीमाओं को जोड़ने वाली कैसरगंज (Kaiserganj) हाई-प्रोफाइल सीटों में गिनी जाती है, जो भाजपा के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह का प्रभाव क्षेत्र मानी जाती है।

  • दबदबा: यहां मतदाता परिवर्तन पसंद करते हैं। 2012 और 2017 में भाजपा के मुकुट बिहारी वर्मा ने शानदार जीत दर्ज की थी, लेकिन 2022 में सपा ने भाजपा का विजय रथ रोक दिया।

  • वर्तमान विधायक: आनंद कुमार यादव (सपा)। 2022 में उन्होंने भाजपा प्रत्याशी गौरव वर्मा (मुकुट बिहारी वर्मा के बेटे) को 7,711 वोटों से शिकस्त दी थी।

  • समीकरण: इस सीट पर हमेशा भाजपा और सपा के बीच कड़ी और दिलचस्प लड़ाई देखने को मिलती है। 2027 में भी यहां कड़ा मुकाबला होना तय माना जा रहा है।