अवध और पूर्वांचल की सियासी धुरी बस्ती जिला; 2022 में सपा गठबंधन ने जीती थीं 4 सीटें
पूर्वी उत्तर प्रदेश के हृदयस्थल और ऐतिहासिक सरयू-कुआनों नदियों के संगम तट पर बसा बस्ती जिला केवल अपनी समृद्ध पौराणिक विरासत, महर्षि वशिष्ठ की तपोभूमि और गन्ने की मिठास तक सीमित नहीं है। पूर्वांचल और अवध के बीच स्थित यह जिला उत्तर प्रदेश की सियासत में सत्ता की चाबी तय करने वाला एक अहम राजनीतिक केंद्र माना जाता है। 1857 की क्रांति का गवाह रहा अमोढ़ा खास, राजा दशरथ के पुत्रेष्टि यज्ञ की साक्षी मखौड़ा धाम की पावन धरती और चंदो ताल का प्राकृतिक सौंदर्य इस जिले को सांस्कृतिक पहचान देते हैं, तो वहीं यहां की 5 विधानसभा सीटें लखनऊ के सियासी समीकरण तय करने का दम रखती हैं।
आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर जिले में राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो चुकी हैं। वाल्टरगंज की बंद पड़ी चीनी मिल का पुनरुद्धार, गन्ना किसानों के भुगतान की समस्या, कुआनों नदी का प्रदूषण व बाढ़ नियंत्रण, बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं और रोजगार के मुद्दे चुनावी चर्चाओं के केंद्र में हैं।
आबादी और सामाजिक समीकरण
2011 की जनगणना के अनुसार बस्ती जिले की कुल जनसंख्या करीब 24.64 लाख है, जिसमें पुरुषों की संख्या 12,55,272 और महिलाओं की संख्या 12,09,192 है। जिले की औसत साक्षरता दर 67.22 प्रतिशत है (पुरुष साक्षरता 77.88% और महिला साक्षरता 56.23%)।
धार्मिक संरचना पर नजर डालें तो जिले में हिंदू आबादी 20,82,976 (करीब 84.5%) और मुस्लिम आबादी 3,64,510 (करीब 14.8%) है। इसके अलावा बौद्ध, ईसाई, सिख और जैन समुदाय के लोग भी यहां रहते हैं। जातीय लिहाज से बस्ती में ब्राह्मण, कुर्मी, मौर्य, दलित और मुस्लिम मतदाता सबसे निर्णायक स्थिति में हैं। इन वर्गों की लामबंदी ही यहां हार-जीत की दिशा तय करती आई है।
2022 के नतीजे: सपा गठबंधन ने 5 में से 4 सीटों पर दर्ज की थी जीत
2022 के विधानसभा चुनाव में बस्ती जिले में समाजवादी पार्टी गठबंधन का दबदबा साफ नजर आया था। 5 में से 4 सीटों पर सपा और उसके सहयोगी ने जीत दर्ज की थी, जबकि भारतीय जनता पार्टी (BJP) केवल एक सीट बचाने में सफल रही थी।
| विधानसभा सीट | विजेता प्रत्याशी | पार्टी | प्राप्त वोट | निकटतम प्रतिद्वंद्वी | पार्टी | प्राप्त वोट | अंतर |
| हर्रैया (307) | अजय सिंह | BJP | 88,200 | त्रयंबक नाथ (तुलसीदास) | SP | 69,871 | 18,329 |
| कप्तानगंज (308) | काविंद्र चौधरी | SP | 94,273 | चंद्र प्रकाश शुक्ला | BJP | 70,094 | 24,179 |
| रुधौली (309) | राजेंद्र प्रसाद चौधरी | SP | 86,360 | संगीता देवी | BJP | 71,134 | 15,226 |
| बस्ती सदर (310) | महेंद्र नाथ यादव | SP | 86,029 | दयाराम चौधरी | BJP | 84,250 | 1,779 |
| महादेवा – SC (311) | दूधराम | SBSP (सपा गठबंधन) | 83,350 | रवि कुमार सोनकर | BJP | 77,855 | 5,495 |
पांचों विधानसभा सीटों का सियासी मिज़ाज
1. हर्रैया (307): भाजपा का इकलौता किला
हर्रैया सामान्य श्रेणी की सीट है। 2022 के चुनाव में भाजपा के अजय सिंह ने सपा प्रत्याशी त्रयंबक नाथ को 18,329 वोटों से शिकस्त देकर अपनी सीट बरकरार रखी। यह बस्ती जिले की एकमात्र ऐसी सीट रही जहां भाजपा अपना किला बचाने में कामयाब रही थी। इस सीट पर बसपा के पूर्व मंत्री राज किशोर सिंह ने भी 55,697 वोट हासिल कर मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया था।
2. कप्तानगंज (308): सपा की एकतरफा जीत
कप्तानगंज विधानसभा सीट पर 2022 में समाजवादी पार्टी के काविंद्र चौधरी ने तत्कालीन भाजपा विधायक चंद्र प्रकाश शुक्ला को 24,179 वोटों के बड़े अंतर से हराकर सीट भाजपा से छीन ली थी। बसपा के जहीर अहमद 40,381 वोट पाकर तीसरे स्थान पर रहे थे। कुर्मी और पिछड़ा वर्ग बहुल इस सीट पर सपा का मजबूत आधार देखने को मिला।
3. रुधौली (309): राजेंद्र चौधरी का दबदबा
रुधौली सीट पर सपा के राजेंद्र प्रसाद चौधरी ने भाजपा की संगीता देवी (संगीता प्रताप जायसवाल) को 15,226 वोटों से हराया था। इस सीट पर बसपा के अशोक कुमार मिश्र को 37,618 वोट मिले थे, जबकि आम आदमी पार्टी के प्रत्याशी पुष्करादित्य सिंह ने 24,000 से अधिक वोट हासिल कर चुनाव को रोचक बना दिया था।
4. बस्ती सदर (310): महज 1,779 वोटों की कांटे की टक्कर
जिले की सबसे हाई-प्रोफाइल बस्ती सदर सीट पर 2022 में बेहद रोमांचक मुकाबला देखने को मिला था। सपा के महेंद्र नाथ यादव ने भाजपा के कद्दावर नेता व तत्कालीन विधायक दयाराम चौधरी को मात्र 1,779 वोटों के मामूली अंतर से पराजित किया था। इस सीट पर बसपा के आलोक रंजन वर्मा ने 36,429 वोट हासिल किए थे।
5. महादेवा (सुरक्षित – 311): गठबंधन के सहारे सुभासपा की जीत
अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित महादेवा सीट पर 2022 में सपा गठबंधन के तहत सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSP) के प्रत्याशी दूधराम ने जीत दर्ज की। उन्होंने भाजपा के रवि कुमार सोनकर को 5,495 वोटों से हराया। इस सीट पर बसपा के लक्ष्मी चंद्र खरवार 40,207 वोट लेकर तीसरे स्थान पर रहे थे।
सियासी बिसात: 2027 की जंग के मुख्य समीकरण
बस्ती की राजनीति ऐतिहासिक रूप से बहुकोणीय मुकाबलों की गवाह रही है, जहां कांग्रेस और बसपा भी समय-समय पर प्रभावी भूमिका में रहे हैं। हालांकि, वर्तमान परिदृश्य में मुख्य लड़ाई सपा और भाजपा के बीच ही केंद्रित दिख रही है।
भाजपा के सामने जहां जिले में 2022 के नुकसान की भरपाई कर दोबारा अपनी पकड़ बनाने की चुनौती है, वहीं समाजवादी पार्टी अपने ‘पीडीए’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले और स्थानीय कुर्मी-यादव-मुस्लिम गठजोड़ के दम पर अपना दबदबा कायम रखने की कोशिश में है। आने वाले विधानसभा चुनावों में किसानों के स्थानीय मुद्दे और जातीय गोलबंदी एक बार फिर यहां का राजनीतिक भविष्य तय करेंगे।
