September 20, 2026

चाय बेचने से लेकर लगातार 3 बार प्रधानमंत्री बनने तक, जानें नरेंद्र मोदी का पूरा सफर

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भारत की राजनीति के इतिहास में 17 सितंबर 1950 का दिन एक ऐसे अध्याय की शुरुआत था, जिसने आगे चलकर देश की दशा और दिशा दोनों बदल दी। गुजरात के मेहसाणा जिले के एक छोटे से कस्बे वडनगर में जन्मे नरेंद्र दामोदरदास मोदी 17 सितंबर 2026 को अपने जीवन के 76 वर्ष पूरे कर चुके हैं। उनका यह सफर केवल एक साधारण राजनीतिक करियर नहीं है, बल्कि यह इस बात का प्रमाण है कि अटूट संकल्प और कड़ी मेहनत से जमीन से उठा एक आम इंसान भी दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की कमान संभाल सकता है।

एक छोटे शहर के रेलवे स्टेशन पर पिता के साथ चाय बेचने से लेकर लगातार तीन बार भारत का प्रधानमंत्री बनने तक का उनका सफर अनुशासन, संघर्ष और असाधारण नेतृत्व क्षमता की एक मिसाल पेश करता है।

वडनगर का सादगी भरा बचपन
नरेंद्र मोदी का बचपन बहुत ही साधारण और आर्थिक चुनौतियों के बीच बीता। उनके पिता दामोदरदास मोदी और मां हीराबेन का जीवन बेहद सादगीपूर्ण था। बालक नरेंद्र पढ़ाई-लिखाई के साथ-साथ वडनगर रेलवे स्टेशन पर अपने पिता की चाय की दुकान पर हाथ बंटाते थे। चाय की दुकान पर आते-जाते लोगों की बातें सुनना और समाज के विभिन्न वर्गों को करीब से देखना उनके शुरुआती जीवन का सबसे बड़ा अनुभव बना। इसी दौर ने उनके भीतर अनुशासन, कड़ी मेहनत और आम जनता के दर्द को समझने की संवेदनशीलता जगाई, जो आगे चलकर उनकी सबसे बड़ी राजनीतिक ताकत बनी।

RSS का अनुशासन और संगठन की सीढ़ियां
किशोरावस्था से ही उनका झुकाव समाज सेवा की ओर हो गया था और वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के संपर्क में आ गए।

1972: नरेंद्र मोदी आरएसएस के पूर्णकालिक प्रचारक बन गए। अहमदाबाद में संघ कार्यालय में रहकर उन्होंने जमीनी स्तर पर काम किया और पूरे गुजरात का भ्रमण कर संगठन को मजबूत किया।

1980 का दशक: संघ में उनकी कार्यकुशलता और रणनीति बनाने की अद्भुत क्षमता को देखते हुए उन्हें भारतीय जनता पार्टी (BJP) में भेजा गया, जहां उन्होंने संगठन महासचिव के रूप में पार्टी को राष्ट्रीय स्तर पर नई ऊर्जा दी।

2001: गुजरात के CM बनने का ऐतिहासिक मोड़
नरेंद्र मोदी के राजनीतिक जीवन का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट 7 अक्टूबर 2001 को आया, जब उन्होंने पहली बार गुजरात के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। उस समय राज्य 2001 के विनाशकारी भूकंप और गंभीर आर्थिक संकटों से जूझ रहा था। अपनी मजबूत इच्छाशक्ति के बल पर उन्होंने न केवल राज्य को फिर से खड़ा किया, बल्कि विकास का ‘गुजरात मॉडल’ पेश किया। मई 2014 तक करीब 13 साल के अपने कार्यकाल में उन्होंने गुजरात को देश का अग्रणी औद्योगिक राज्य बना दिया।

2014 से 2024: दिल्ली की गद्दी और ‘हैट्रिक’
गुजरात की अपार सफलता के बाद भाजपा ने 2014 के लोकसभा चुनाव में उन्हें प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया।

2014: प्रचंड बहुमत के साथ 26 मई 2014 को उन्होंने भारत के प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली। (वे आजाद भारत में जन्म लेने वाले देश के पहले प्रधानमंत्री हैं।)

2019 और 2024: उनके नेतृत्व में एनडीए ने 2019 में बड़ी जीत दर्ज की और फिर 2024 में लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी कर इतिहास रच दिया।

76 की उम्र में 25 साल के शासनकाल का रिकॉर्ड
17 सितंबर 2026 को 76 वर्ष की उम्र में पहुंचे नरेंद्र मोदी एक दुर्लभ रिकॉर्ड भी अपने नाम दर्ज कर रहे हैं—अक्टूबर 2001 में गुजरात का मुख्यमंत्री बनने से लेकर अब तक लगातार 25 सालों तक किसी सरकार के प्रमुख के रूप में कार्य करना। इस ऐतिहासिक मौके पर भारतीय जनता पार्टी देश भर में 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक एक महीने का ‘सेवा संकल्प अभियान’ चला रही है।