September 20, 2026

4 सरकारी मेडिकल कॉलेजों में बढ़े आरक्षण पर हाईकोर्ट की रोक, पुराने नियम से होगी काउंसलिंग

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उत्तर प्रदेश के चार सरकारी मेडिकल कॉलेजों में दाखिले के लिए बढ़ाए गए आरक्षण कोटे को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच से बड़ा झटका लगा है। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा बढ़ाए गए आरक्षण कोटे पर अंतरिम रोक लगा दी है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि इन चारों कॉलेजों में भी ‘नीट-यूजी’ (NEET-UG) की काउंसलिंग राज्य के अन्य मेडिकल कॉलेजों में लागू सामान्य आरक्षण व्यवस्था के तहत ही जारी रहेगी।

क्या था पूरा मामला और याचिकाकर्ताओं की दलील?
राज्य सरकार ने 1 सितंबर को एक आदेश जारी किया था, जिसके तहत अंबेडकरनगर, कन्नौज, सहारनपुर और जालौन के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में आरक्षण का कोटा बढ़ा दिया गया था।

याचिकाकर्ता सचिन सिंह व एक अन्य की ओर से अदालत में पेश हुए अधिवक्ता अमरेंद्र नाथ त्रिपाठी ने दलील दी कि सरकार के इस नए आदेश के बाद इन कॉलेजों में करीब 73 प्रतिशत सीटें आरक्षित हो गई हैं। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि इस तरह आरक्षण कोटा बढ़ाकर काउंसलिंग कराना पूरी तरह से कानून की मंशा के खिलाफ है और सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय की गई 50% की सीमा का उल्लंघन है।

हाईकोर्ट का अहम फैसला: लागू रहेंगे पुराने नियम
इस मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति आलोक माथुर और न्यायमूर्ति अमिताभ कुमार राय की खंडपीठ ने बढ़े हुए आरक्षण पर अंतरिम रोक लगा दी। कोर्ट ने निर्देश दिया है कि इन चारों कॉलेजों (अंबेडकरनगर, कन्नौज, सहारनपुर और जालौन) में भी फिलहाल अन्य कॉलेजों की तरह ही निर्धारित मानक के अनुसार काउंसलिंग कराई जाए।

अदालत ने स्पष्ट किया कि दाखिले में वही पुरानी आरक्षण व्यवस्था लागू रहेगी, जिसके तहत:

अनुसूचित जाति (SC): 21 प्रतिशत

अनुसूचित जनजाति (ST): 2 प्रतिशत

अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC): 27 प्रतिशत

अधिकारियों को किया गया था तलब
इससे पहले 14 सितंबर को हुई सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण विभाग के महानिदेशक और चिकित्सा शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव को पूरे रिकॉर्ड के साथ 16 सितंबर को तलब किया था। हालांकि, इस मामले में अभी कोर्ट का विस्तृत आदेश आना बाकी है, लेकिन अंतरिम रोक से सामान्य वर्ग के छात्रों को बड़ी राहत मिली है।