September 20, 2026

माघ मेले से पहले बड़ा कदम: प्रयागराज, काशी और अयोध्या को जोड़कर बनेगा धार्मिक सर्किट

Ayodhya-News

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार प्रयागराज में आयोजित होने वाले सालाना माघ मेले को देखते हुए श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए एक बड़ा धार्मिक सर्किट तैयार करने जा रही है। इस योजना के तहत राज्य के तीन सबसे प्रमुख आध्यात्मिक केंद्रों—प्रयागराज, काशी (वाराणसी) और अयोध्या—को सीधे परिवहन नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। मेला प्राधिकरण और जिला प्रशासन ने इसकी कार्ययोजना पर काम शुरू कर दिया है, ताकि संगम स्नान के लिए आने वाले श्रद्धालु तीनों पवित्र नगरियों के सुगम दर्शन कर सकें।

तीनों शहरों के बीच चलेंगी विशेष बसें और ट्रेनें

माघ मेले के दौरान उमड़ने वाली भारी भीड़ के प्रबंधन के लिए प्रशासन ने अंतर-जिला कनेक्टिविटी पर फोकस किया है। मंडलायुक्त डॉ. लोकेश एम के अनुसार, धार्मिक पर्यटन को गति देने और श्रद्धालुओं के आवागमन को सुगम बनाने के लिए प्रयागराज, काशी और अयोध्या के बीच विशेष परिवहन सेवाएं संचालित की जाएंगी।

श्रद्धालु इन तीनों धार्मिक स्थलों के बीच सड़क और रेल दोनों माध्यमों से यात्रा कर सकेंगे। इसके लिए प्रशासन रेलवे अधिकारियों के साथ भी लगातार समन्वय बना रहा है। संभावित भीड़ को देखते हुए रेलवे से अतिरिक्त रैक और स्पेशल ट्रेनें चलाने की व्यवस्था करने को कहा गया है। इसके अलावा बसों और निजी टैक्सियों के सुचारू संचालन के लिए रूट तय किए जा रहे हैं।

पार्किंग क्षमता बढ़ाने और ट्रैफिक दबाव घटाने पर जोर

मेले के दौरान शहर में निजी वाहनों की भारी संख्या को देखते हुए पार्किंग व्यवस्था का विस्तार किया जा रहा है।

  • शहर के प्रमुख प्रवेश मार्गों पर बड़े पार्किंग स्थल तैयार किए जाएंगे।

  • मेला क्षेत्र के निकटवर्ती हिस्सों में नई पार्किंग विकसित की जा रही हैं, ताकि मुख्य शहर पर वाहनों का दबाव न बने।

  • संबंधित विभागों को ट्रैफिक डायवर्जन और सुगम आवाजाही के लिए समय रहते कार्य पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।

मेजा में कृष्ण मृग आरक्षित क्षेत्र से विस्थापित होंगे परिवार

माघ मेले की तैयारियों की समीक्षा के साथ ही प्रशासन ने पर्यावरण संरक्षण से जुड़ा एक अन्य अहम कदम उठाया है। मेजा तहसील के चांद खमरिया स्थित ‘कृष्ण मृग आरक्षित क्षेत्र’ (Blackbuck Conservation Reserve) के संरक्षण के लिए कार्ययोजना तैयार की गई है।

मंडलायुक्त डॉ. लोकेश एम ने आरक्षित क्षेत्र का स्थलीय निरीक्षण किया। उन्होंने निर्देश दिए कि संरक्षित वन क्षेत्र में रह रहे लोगों को चिह्नित कर एक अलग आवासीय कॉलोनी विकसित करके वहां बसाया जाए। मुख्य विकास अधिकारी (CDO) हर्षिका सिंह को निर्देश दिए गए हैं कि इन सभी पात्र परिवारों को ‘मुख्यमंत्री आवासीय योजना’ के तहत पक्के आवास उपलब्ध कराए जाएं।

इसके साथ ही आरक्षित क्षेत्र की शेष भूमि का डिमार्केशन (सीमांकन) पूरा कराकर जमीन को वन विभाग को सौंपा जाएगा और क्षेत्र की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए मजबूत बाउंड्री वॉल बनाई जाएगी।