September 18, 2026

Vishwakarma Puja 2026: मशीनों की पूजा क्यों? जानें मान्यताएं और सब कुछ

Vishwakarma Puja 2026

Vishwakarma Puja Muhurat 2026: आज यानी 17 सितंबर को देशभर में विश्वकर्मा जयंती धूमधाम से मनाई जा रही है। इस खास मौके पर फैक्ट्री, दुकान, ऑफिस और कार्यस्थलों पर मशीनों व औजारों की विधिवत पूजा की जाती है। अगर आप भी जानना चाहते हैं कि इस दिन का धार्मिक महत्व क्या है और पूजा किस मुहूर्त में करनी चाहिए, तो यहां आपको हर जरूरी जानकारी मिल जाएगी।

विश्वकर्मा जयंती किस दिन मनाई जाती है?
विश्वकर्मा पूजा हर साल कन्या संक्रांति के दिन मनाई जाती है। दरअसल जब सूर्य देव सिंह राशि को छोड़कर कन्या राशि में प्रवेश करते हैं, उस खगोलीय घटना को ही कन्या संक्रांति कहा जाता है, और इसी दिन विश्वकर्मा जयंती पड़ती है।

भगवान विश्वकर्मा को क्यों माना जाता है खास?
पौराणिक कथाओं के मुताबिक भगवान विश्वकर्मा ने ही पाताल लोक, मध्यलोक और स्वर्गलोक तीनों लोकों की रचना की थी। यही वजह है कि उन्हें सृष्टि, वास्तुकला और इंजीनियरिंग का देवता माना जाता है और उन्हें ब्रह्मांड का पहला इंजीनियर व आर्किटेक्ट कहा जाता है।

विश्वकर्मा जी ने कौन-कौन सी नगरियां बनाई थीं?
मान्यता है कि भगवान विश्वकर्मा ने देवताओं के लिए कई भव्य महल और नगरियां बनाईं। इनमें सोने की लंका, इंद्रपुरी और भगवान श्रीकृष्ण की द्वारका नगरी जैसी अद्भुत संरचनाएं शामिल हैं। यहां तक कि पुष्पक विमान का निर्माण भी उन्हीं से जोड़कर देखा जाता है।

विश्वकर्मा पूजा के दिन मशीनों और औजारों की पूजा क्यों होती है?
इसके पीछे गहरी आस्था जुड़ी है। रोजमर्रा के काम में इस्तेमाल होने वाले औजारों और मशीनों को भगवान विश्वकर्मा की शिल्पकला और रचनात्मक शक्ति का प्रतीक माना जाता है। इसलिए इस दिन इन्हें साफ करके विधिवत पूजा की जाती है। ऐसा माना जाता है कि इससे काम में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं और तरक्की का रास्ता खुलता है।

2026 में विश्वकर्मा पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है?

  • कन्या संक्रांति पुण्य काल: सुबह 07:58 बजे से दोपहर 12:40 बजे तक
  • सुबह का मुहूर्त: सुबह 07:58 से 10:43 बजे तक
  • अमृत चौघड़िया: दोपहर 12:16 से 01:48 बजे तक
  • शाम का मुहूर्त: शाम 04:52 से 06:24 बजे तक

किस समय पूजा नहीं करनी चाहिए?
राहुकाल के दौरान कोई भी शुभ कार्य वर्जित माना जाता है। आज राहुकाल दोपहर 01:48 बजे से 03:20 बजे तक रहेगा, इसलिए इस समय पूजा करने से बचें।

विश्वकर्मा पूजा की विधि क्या है?
सुबह स्नान करने के बाद सबसे पहले सूर्य देव को जल अर्पित करें। इसके बाद अपने कार्यस्थल, दुकान या फैक्ट्री की अच्छी तरह सफाई करें। फिर मशीनों, औजारों और वाहनों को साफ करके वहां भगवान विश्वकर्मा की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें। पूजा में हल्दी, कुमकुम, चंदन और फूल अर्पित करें, घी का दीपक जलाकर आरती करें और अंत में फल-मिठाई का भोग लगाएं। पूजा के दौरान ‘ॐ विश्वकर्मणे नमः’ मंत्र का जाप करना बेहद शुभ माना जाता है।

क्या इस दिन मशीनों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए?
पारंपरिक मान्यता के अनुसार विश्वकर्मा पूजा के दिन मशीनों और औजारों को आराम देना चाहिए और उनका इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। हालांकि काम की प्रकृति के चलते यह हर जगह संभव नहीं होता, फिर भी धार्मिक भावना के तौर पर इन्हें सम्मान देने की परंपरा निभाई जाती है। साथ ही इस दिन मांस-मदिरा से दूर रहने और किसी से विवाद न करने की भी सलाह दी जाती है।

पूजा से पहले और क्या ध्यान रखना चाहिए?
विश्वकर्मा पूजा सिर्फ मशीनों की पूजा तक सीमित नहीं, बल्कि यह श्रम, शिल्प और तकनीक के प्रति सम्मान जताने का पर्व भी है। इसलिए पूजा से पहले कार्यस्थल की सफाई और सही व्यवस्था करना जरूरी माना जाता है। इससे न सिर्फ धार्मिक रूप से सकारात्मक माहौल बनता है, बल्कि व्यावहारिक तौर पर भी साफ-सुथरा कार्यस्थल सुरक्षा और बेहतर कामकाज में मदद करता है।