मराठा आरक्षण: मनोज जरांगे पाटिल ने खत्म की भूख हड़ताल, सरकार को दिया 3 महीने का समय
मराठा आरक्षण की मांग को लेकर पिछले 20 दिनों से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे आंदोलनकारी नेता मनोज जरांगे पाटिल ने अपना अनशन समाप्त कर दिया है। गुरुवार देर रात करीब 2 बजे बीड जिले के पाटोदा में अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए जरांगे ने यह अहम ऐलान किया। इसके साथ ही उन्होंने अपनी मांगों पर विचार करने और उन्हें लागू करने के लिए महाराष्ट्र सरकार को तीन महीने का समय दिया है।
खराब सेहत के चलते लिया फैसला
मनोज जरांगे ने अपने समर्थकों को बताया कि लगातार अनशन के कारण उनका शरीर काफी कमजोर हो गया है। 12 सितंबर को आईवी (IV) फ्लूड बंद करने के बाद से उनके लिए हाथ-पैर हिलाना भी मुश्किल हो गया था। इस गिरती सेहत के कारण उनके लिए बड़ी संख्या में समर्थकों के साथ मुंबई तक लंबी पदयात्रा करना शारीरिक रूप से संभव नहीं रह गया था।
उन्होंने अपने समर्थकों से अपील की कि वे पाटोदा से निकलने के बाद उनके वाहन के पीछे न चलें और सीधे खोपोली पहुंचें। जरांगे ने चेतावनी भी दी कि अगर काफिला उनके पीछे चलता रहा, तो वह यात्रा रोककर पाटोदा में ही धरना जारी रखेंगे या वापस अंतरवाली सराटी लौट जाएंगे।
’58 लाख रिकॉर्ड मिले, 2.5 करोड़ मराठों को मिलेगा लाभ’
आंदोलन की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए जरांगे पाटिल ने दावा किया कि इस दौरान 58 लाख पुराने दस्तावेज सामने आए हैं। उनके मुताबिक, इन रिकॉर्ड्स के आधार पर मराठा समुदाय के करीब 2.5 करोड़ लोगों को सीधे तौर पर आरक्षण का लाभ मिल सकता है। उन्होंने राज्य सरकार से मांग की है कि इन रिकॉर्ड्स को कानूनी मान्यता देने के लिए तत्काल आधिकारिक गजट (राजपत्र) जारी किया जाए।
देवेंद्र फडणवीस पर गंभीर आरोप और पश्चिमी महाराष्ट्र का मुद्दा
अपने संबोधन के दौरान जरांगे ने देवेंद्र फडणवीस पर तीखा निशाना साधा। उन्होंने सरकार पर आंदोलन को कुचलने के लिए राजनीतिक हथकंडे अपनाने का आरोप लगाया। जरांगे ने यहां तक दावा किया कि फडणवीस उनकी जान के खिलाफ साजिश रच रहे हैं और उन्होंने आंदोलन से जुड़े अहम दस्तावेजों को पेन ड्राइव में सुरक्षित रखवा दिया है।
सरकार द्वारा पश्चिमी महाराष्ट्र के फल बागान मालिकों का उदाहरण दिए जाने पर भी जरांगे ने कड़ा पलटवार किया। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर ओबीसी (OBC) समुदाय के लोग भी फल बागानों के मालिक हैं और उन्हें आरक्षण का लाभ मिल सकता है, तो मराठा समुदाय को इससे वंचित क्यों रखा जा रहा है?
भावुक अपील: ‘समाज के लिए जान देने को तैयार’
हजारों समर्थकों से आंदोलन में अनुशासन बनाए रखने की अपील करते हुए जरांगे मंच पर भावुक भी नजर आए। अपने परिवार का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि उन्होंने हमेशा अपने परिवार को स्वाभिमान के साथ जीना सिखाया है। जरांगे ने अपने बेटे को भी साहस बनाए रखने का संदेश देते हुए कहा कि मराठा समुदाय के हकों की लड़ाई के लिए वह अपनी जान तक कुर्बान करने को तैयार हैं।
