September 18, 2026

UPI MDR पर कांग्रेस-BJP आमने-सामने, राहुल के विरोध पर BJP ने 5 सांसदों का दिया हवाला

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यूपीआई (UPI) लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) को लेकर छिड़ा सियासी घमासान अब नया मोड़ ले चुका है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी लगातार इसे ‘यूपीआई टैक्स’ बताकर केंद्र सरकार पर हमलावर हैं। इस बीच, भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने संसदीय स्थायी समिति (Parliamentary Standing Committee) की रिपोर्ट का हवाला देते हुए राहुल गांधी के विरोध पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

बीजेपी सूत्रों का कहना है कि जिस रेवेन्यू मॉडल का राहुल गांधी विरोध कर रहे हैं, उसकी सिफारिश खुद संसदीय समिति ने की थी, जिसमें कांग्रेस के ही पांच वरिष्ठ सांसद शामिल थे।

बिना असहमति पास हुई थी रिपोर्ट, 5 कांग्रेसी दिग्गज थे शामिल

बीजेपी के मुताबिक, वित्त पर बनी संसदीय स्थायी समिति ने 12 अगस्त को जब यह रिपोर्ट पास की थी, तब कांग्रेस के पांच सांसद वहां मौजूद थे और किसी ने भी इसके खिलाफ कोई असहमति (Dissent) दर्ज नहीं कराई थी। पैनल में शामिल कांग्रेस सांसदों के नाम हैं:

  • पी चिदंबरम (पूर्व वित्त मंत्री)

  • मनीष तिवारी (पूर्व केंद्रीय मंत्री)

  • गौरव गोगोई

  • किशोरी लाल

  • के गोपीनाथ

MDR की जरूरत क्यों? 20,700 करोड़ रुपये की है ऑपरेशनल लागत

बीजेपी सांसद भर्तृहरि महताब की अध्यक्षता वाली इस समिति ने यूपीआई इकोसिस्टम के खर्च और सरकारी अनुदान के बीच के भारी अंतर पर गहरी चिंता जताई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, यूपीआई इकोसिस्टम को सुचारू रूप से चलाने के लिए इंडस्ट्री की अनुमानित ऑपरेशनल लागत 20,700 करोड़ रुपये है। इसके मुकाबले सरकार की ओर से केवल 2,000 करोड़ रुपये का बजटीय आवंटन किया गया है। समिति ने चेतावनी दी थी कि अगर फ्रेमवर्क को लागू करने में देरी हुई, तो पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स पर आर्थिक दबाव बढ़ेगा, जिससे साइबर सिक्योरिटी, धोखाधड़ी की रोकथाम और नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए जरूरी निवेश खतरे में पड़ सकता है।

समिति का सुझाव: टियर-वाइड रेवेन्यू मॉडल

संसदीय पैनल ने यह सुनिश्चित करने की सिफारिश की थी कि यूपीआई सिस्टम सरकारी खजाने पर हमेशा निर्भर न रहे और आर्थिक रूप से सस्टेनेबल (टिकाऊ) बने। इसके लिए समिति ने कुछ अहम सुझाव दिए:

  • ज्यादा कीमत (High-Value) वाले ट्रांज़ैक्शन पर कैलिब्रेटेड MDR लागू करने की अनुमति दी जाए।

  • सभी यूपीआई पेमेंट पर एक जैसा चार्ज लगाने के बजाय एक ‘टियर-वाइड रेवेन्यू फ्रेमवर्क’ बनाया जाए।

  • टियर 3 से टियर 6 शहरों में डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने के लिए योजनाएं और कैशबैक जारी रहें।

  • कम वैल्यू वाले BHIM-UPI और RuPay ट्रांज़ैक्शन के लिए सरकारी इंसेंटिव (Zero-MDR) जारी रहे, ताकि लागत को संतुलित किया जा सके।

राहुल गांधी के आरोप बनाम केंद्र का रुख

राहुल गांधी ने केंद्र की इस नई यूपीआई पॉलिसी को ‘यूपीआई टैक्स’ करार देते हुए इसे वापस लेने की मांग की है। उनका आरोप है कि इस कदम से विदेशी कंपनियों को सीधा फायदा पहुंचेगा। हालांकि, केंद्र सरकार ने इन दावों को सिरे से खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि MDR कोई ‘टैक्स’ नहीं है और आम उपभोक्ताओं (Consumers) को अपनी जेब से इसका सीधा भुगतान नहीं करना पड़ेगा।