September 16, 2026

जम्मू में रोहिंग्या और बांग्लादेशी शरणार्थियों पर एक्शन, बस्तियां खाली कराने का नोटिस

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जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने जम्मू में पिछले एक दशक से अधिक समय से रह रहे बांग्लादेशी और म्यांमार (बर्मा) के शरणार्थियों के खिलाफ सख्त कदम उठाया है। प्रशासन ने इन शरणार्थियों की कई बस्तियों को खाली कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस कार्रवाई के तहत सीधे तौर पर उन स्थानीय मकान और जमीन मालिकों पर शिकंजा कसा गया है, जिन्होंने इन विदेशी नागरिकों को अपनी संपत्तियां किराए पर दी हैं।

जमीन और मकान मालिकों को थमाया गया नोटिस

प्रशासनिक स्तर पर शुरू की गई इस कार्रवाई में सबसे पहले उन स्थानीय लोगों की पहचान की गई, जिनके घरों या जमीनों पर ये शरणार्थी बसे हुए हैं। इसके बाद प्रशासन ने इन सभी मकान और जमीन मालिकों को औपचारिक नोटिस जारी कर दिए हैं। नोटिस में स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि वे अगले कुछ ही दिनों के भीतर इन शरणार्थियों से अपने घर और जमीन पूरी तरह खाली करवा लें।

बस्तियों में पसरा मातम, शरणार्थियों के सामने ठिकाने का संकट

प्रशासन की ओर से मिले इस सख्त नोटिस के बाद मकान मालिकों ने अपनी दुकानों और मकानों में बतौर किराएदार रह रहे रोहिंग्या परिवारों को जगह खाली करने का फरमान सुना दिया है। मकान और जमीन मालिकों के इस अल्टीमेटम के बाद शरणार्थी बस्तियों में मातम का माहौल है। एक दशक से अधिक समय से यहां ठिकाना बनाए हुए इन लोगों के सामने अब यह बड़ा संकट खड़ा हो गया है कि वे यहां से विस्थापित होकर कहां जाएं।

रोहिंग्या मुद्दे पर देशव्यापी बहस और संयुक्त राष्ट्र की चिंता

भारत में रोहिंग्या और अवैध शरणार्थियों का मुद्दा लंबे समय से राष्ट्रीय बहस के केंद्र में रहा है। जम्मू से पहले पश्चिम बंगाल सहित देश के कई अन्य हिस्सों में भी अवैध रूप से रह रहे रोहिंग्या परिवारों की मौजूदगी सामने आ चुकी है और वहां भी प्रशासन की ओर से ऐसी कार्रवाइयां की गई हैं।

इस बीच अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी शरणार्थियों का यह संकट चर्चा में रहा है। संयुक्त राष्ट्र (UN) ने जून 2026 में रोहिंग्या शरणार्थियों की स्थिति पर गहरी चिंता जाहिर की थी। वैश्विक संस्था ने अपने बयान में स्पष्ट कहा था कि केवल बांग्लादेश में रह रहे 12 लाख रोहिंग्या शरणार्थियों को बेसहारा नहीं छोड़ा जाना चाहिए।