September 15, 2026

जमीन से यूपी की सियासत के ‘नेताजी’ तक, बीजेपी के समर्थन से बने 15वें मुख्यमंत्री

mulayam singh yadav

उत्तर प्रदेश देश का राजनीतिक रूप से सबसे अहम और बड़ा राज्य है, जिसने लोकसभा की 80 सीटों और 403 विधानसभा सीटों के जरिए हमेशा राष्ट्रीय राजनीति की दिशा तय की है। 25 जनवरी 1950 को संयुक्त प्रांत का नाम बदलकर उत्तर प्रदेश रखे जाने के बाद से इस सूबे ने कई राजनीतिक उतार-चढ़ाव देखे हैं। राज्य के अब तक के 21 मुख्यमंत्रियों में से केवल योगी आदित्यनाथ, अखिलेश यादव और मायावती ही अपना पूरा पांच वर्षीय कार्यकाल पूरा कर पाए हैं, जो यहां की राजनीतिक अस्थिरता को बयां करता है। इसी सियासी कैनवास पर एक ऐसा नाम उभरा जिसने दशकों तक राज्य की राजनीति की धुरी संभाली—वह थे समाजवादी पार्टी के संस्थापक और तीन बार मुख्यमंत्री रहे मुलायम सिंह यादव।

पहलवान से शिक्षक और फिर सियासत में कदम

22 नवंबर 1939 को इटावा के सैफई में जन्मे मुलायम सिंह यादव की शुरुआती पृष्ठभूमि राजनीति से दूर थी। उन्होंने राजनीति विज्ञान में एमए और बीएड की डिग्री हासिल की थी और कुछ समय तक शिक्षण कार्य भी किया। उनका शुरुआती जीवन कुश्ती के अखाड़े और शिक्षा के इर्द-गिर्द रहा।

उन्होंने पहली बार 1967 में संयुक्त समाजवादी पार्टी (SSP) के उम्मीदवार के रूप में इटावा की जसवंतनगर सीट से विधानसभा चुनाव जीता और विधायक बने। इसके बाद 1974 में वे चौधरी चरण सिंह की भारतीय क्रांति दल (BKD) में शामिल हुए और फिर से जसवंतनगर सीट से जीत हासिल की। 1977 में जनता पार्टी के टिकट पर चुनाव जीतने के बाद राम नरेश यादव की सरकार में उन्हें सहकारिता एवं पशुपालन मंत्री बनाया गया।

ओबीसी राजनीति का उभार और मुख्यमंत्री की कुर्सी

1980 के दशक के बाद उत्तर प्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) का राजनीतिक वर्चस्व तेजी से बढ़ने लगा था और कांग्रेस का पारंपरिक प्रभाव कम होने लगा था। इसी दौरान राम जन्मभूमि आंदोलन के चलते सांप्रदायिक ध्रुवीकरण भी तेज हुआ। ऐसे माहौल में मुलायम सिंह ने खुद को ओबीसी समुदाय के एक मजबूत स्तंभ के रूप में स्थापित किया।

  • पहला कार्यकाल (1989): साल 1989 के चुनाव में जनता दल सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। मुलायम सिंह ने बीजेपी के बाहरी समर्थन से उत्तर प्रदेश के 15वें मुख्यमंत्री के रूप में 5 दिसंबर 1989 को शपथ ली।

  • दूसरा कार्यकाल (1993): अक्टूबर 1992 में अपनी नई पार्टी ‘समाजवादी पार्टी’ (SP) की स्थापना के बाद, मुलायम ने 1993 के चुनाव में बहुजन समाज पार्टी (BSP) के साथ गठबंधन किया। सपा-बसपा गठबंधन ने चुनाव में शानदार प्रदर्शन किया और मुलायम सिंह ने 4 दिसंबर 1993 को दूसरी बार मुख्यमंत्री पद की कमान संभाली। हालांकि, जून 1995 में समर्थन वापसी के बाद यह सरकार गिर गई।

  • तीसरा कार्यकाल (2003): 2002 का विधानसभा चुनाव त्रिशंकु रहने के बाद अगस्त 2003 में मायावती के इस्तीफे के बाद मुलायम सिंह तीसरी बार मुख्यमंत्री बने। इस बार उन्होंने गुन्नौर सीट से उपचुनाव जीतकर विधानसभा में अपनी स्थिति मजबूत की।

राष्ट्रीय राजनीति और रक्षा मंत्री का पद

राज्य की राजनीति में अपनी मजबूत पकड़ बनाने के बाद मुलायम सिंह ने केंद्र की राजनीति में भी अहम भूमिका निभाई। 1996 के लोकसभा चुनाव में वे पहली बार संसद पहुंचे और एच.डी. देवेगौड़ा तथा आई.के. गुजराल के नेतृत्व वाली संयुक्त मोर्चा सरकारों में देश के रक्षा मंत्री के रूप में जिम्मेदारी संभाली। इसके अलावा वे अपने लंबे राजनीतिक जीवन में कई बार लोकसभा सांसद चुने गए।

2012 के विधानसभा चुनावों में समाजवादी पार्टी को पूर्ण बहुमत मिलने के बाद मुलायम सिंह ने पार्टी की कमान अपने बेटे अखिलेश यादव को सौंप दी और उन्हें राज्य का मुख्यमंत्री बनाया। 8 अक्टूबर 2022 को उनके निधन के साथ ही उत्तर प्रदेश की राजनीति के एक बड़े और प्रभावशाली अध्याय का अंत हो गया।