September 15, 2026

महाराष्ट्र वोटर लिस्ट विवाद: 38 मुस्लिम बहुल सीटों पर 30% नाम ‘अनकलेक्टेबल’

Election-commission

महाराष्ट्र की राजनीति में आगामी विधानसभा चुनावों से ठीक पहले मतदाता सूची को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के तहत तैयार की गई ड्राफ्ट वोटर लिस्ट के विश्लेषण से सामने आया है कि राज्य की 38 ऐसी विधानसभा सीटों, जहां मुस्लिम आबादी 20 फीसदी से अधिक है, वहां लगभग 30 फीसदी मतदाताओं के नाम आगे शामिल नहीं किए गए हैं। इन आंकड़ों ने राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज कर दी है।

किन सीटों पर सामने आए सबसे ज्यादा मामले?

विश्लेषण के अनुसार, इन 38 विधानसभा सीटों के कुल मतदाताओं में से 37.51 लाख मतदाताओं यानी 29.77 फीसदी को ‘अनकलेक्टेबल’ (यानी जिनकी जानकारी कलेक्ट नहीं की जा सकी) के रूप में दर्ज किया गया है। जबकि पूरे महाराष्ट्र के स्तर पर यह औसत आंकड़ा 21.14 फीसदी है।

सबसे ज्यादा मामले मुंबई और मुंबई महानगर क्षेत्र की घनी आबादी वाले इलाकों में देखे गए हैं:

  • भिवंडी पूर्व: यहां सबसे ज्यादा 49.10 फीसदी मतदाताओं को आगे की सूची में शामिल नहीं किया गया।

  • भिवंडी पश्चिम: इस सीट पर यह आंकड़ा 44.72 फीसदी रहा।

  • मुंब्रा-कलवा: यहां 42.91 फीसदी मतदाता इस श्रेणी में आए।

  • मानखुर्द शिवाजी नगर: इस इलाके में 42.31 फीसदी मतदाताओं के नाम ‘अनकलेक्टेबल’ पाए गए।

  • चांदिवली (मुंबई): यहां 27.6 फीसदी मुस्लिम आबादी है, जिसमें से 41.44 फीसदी मतदाताओं के नाम सूची में आगे नहीं जोड़े गए।

हालांकि, अधिकारियों और विश्लेषकों का स्पष्ट कहना है कि SIR के आंकड़ों में मतदाताओं का वर्गीकरण धर्म के आधार पर नहीं किया गया है, बल्कि यह विश्लेषण केवल उन सीटों के आधार पर है जहां मुस्लिम आबादी 20 फीसदी से अधिक है। मसलन, 78.4 फीसदी मुस्लिम आबादी वाली मालेगांव सेंट्रल सीट पर यह दर 23.46 फीसदी ही दर्ज की गई, जो यह साबित करती है कि अधिक आबादी का मतलब यह नहीं है कि हर जगह नाम काटे जाने का अनुपात ज्यादा ही हो।

क्या है ‘अनकलेक्टेबल’ मतदाताओं का मतलब?

इस श्रेणी में उन लोगों को रखा गया है जो स्थायी रूप से दूसरी जगह शिफ्ट हो चुके हैं या जिनका पता नहीं चल सका (अनुपस्थित)। इन 38 सीटों पर सामने आए आंकड़ों के मुताबिक:

  • 42.05 फीसदी ऐसे मतदाता थे जिन्हें स्थायी रूप से शिफ्ट बताया गया।

  • 35.59 फीसदी मतदाता पता नहीं चलने या अनुपस्थित श्रेणी में मिले।

  • 12.76 फीसदी मतदाता मृत पाए गए।

  • 8.33 फीसदी नाम डुप्लीकेट (दो बार दर्ज) थे।

समुदायिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि ड्राफ्ट सूची सामने आने के बाद स्थानीय संगठनों और समूहों ने लोगों को जरूरी दस्तावेज दुरुस्त कराने में मदद करना शुरू कर दिया है। उम्मीद जताई जा रही है कि दावे और आपत्तियों के चरण के दौरान प्रभावित लोग अपने दस्तावेज पूरे करवाकर सूची में नाम जुड़वा सकेंगे।

तुलनात्मक रूप से देखें तो महाराष्ट्र की 29 एससी (अनुसूचित जाति) आरक्षित सीटों पर नाम आगे न जोड़े जाने की संयुक्त दर 19.61 फीसदी रही, जो मुस्लिम बहुल 38 सीटों (29.77%) और राज्य के औसत (21.14%) दोनों से कम है। इसी तरह 25 एसटी (अनुसूचित जनजाति) आरक्षित सीटों पर यह दर और भी कम यानी 13.21 फीसदी दर्ज की गई।