September 16, 2026

PM मोदी का मध्य एशिया दौरा, आतंकवाद पर दिया सख्त संदेश

pm modi

नई दिल्ली :  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 29 अगस्त से 1 सितंबर 2026 तक उज्बेकिस्तान और कीर्गिस्तान की अहम रणनीतिक यात्रा पर रवाना हो गए हैं। कीर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में होने वाले 26वें शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन से पहले उन्होंने भारत का रोडमैप स्पष्ट कर दिया है। प्रधानमंत्री ने सख्त लहजे में कहा है कि क्षेत्र में आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद शांति व स्थिरता के लिए लगातार खतरा बने हुए हैं और इन्हें पूरी तरह खत्म किया जाना चाहिए।

ताशकंद में द्विपक्षीय वार्ता और रणनीतिक साझेदारी

पीएम मोदी 29 और 30 अगस्त को उज्बेकिस्तान की राजधानी ताशकंद में रहेंगे। उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव के निमंत्रण पर हो रही इस राजकीय यात्रा के दौरान दोनों नेताओं के बीच उच्च स्तरीय वार्ता होगी।

इस मुलाकात का मुख्य एजेंडा मध्य एशिया के साथ भारत के रणनीतिक संबंधों को और मजबूत करना है। दोनों देशों के बीच मुख्य रूप से व्यापार, निवेश, रक्षा, डिजिटल संपर्क और ऊर्जा जैसे अहम क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की रूपरेखा पर चर्चा की जाएगी।

सांस्कृतिक विरासतों का करेंगे दौरा

अपनी ताशकंद यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी शास्त्री स्मारक (Shastri Memorial) और ताशकंद स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ ओरिएंटल स्टडीज स्थित महात्मा गांधी केंद्र (Mahatma Gandhi Centre) भी जाएंगे। प्रधानमंत्री के मुताबिक, ये दोनों स्थान भारत और उज्बेकिस्तान के बीच लंबे समय से चले आ रहे मजबूत सभ्यतागत, जनस्तरीय और सांस्कृतिक संबंधों के प्रतीक हैं।

बिश्केक में 26वां SCO शिखर सम्मेलन

ताशकंद में अपने कार्यक्रम पूरे करने के बाद पीएम मोदी कीर्गिस्तान के राष्ट्रपति सद्यर जापारोव के निमंत्रण पर बिश्केक पहुंचेंगे, जहां वे 26वें SCO शिखर सम्मेलन में शिरकत करेंगे।

यह शिखर सम्मेलन संगठन के लिए भी खास है क्योंकि इस वर्ष SCO की स्थापना के 25 साल पूरे हो रहे हैं। साल 2017 से SCO के सक्रिय सदस्य रहे भारत की ओर से प्रधानमंत्री इस मंच पर क्षेत्र के लिए देश का दृष्टिकोण रखेंगे। उन्होंने भारत की इस सोच को मुख्य रूप से तीन स्तंभों— सुरक्षा (Security), संपर्क (Connectivity) और अवसर (Opportunity) पर आधारित बताया है।

आतंकवाद के खिलाफ साझा कार्रवाई का आह्वान

सम्मेलन के एजेंडे को लेकर प्रधानमंत्री ने सदस्य देशों के साथ मिलकर आतंकवाद के खिलाफ एकजुट होकर काम करने पर जोर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत एक ऐसे क्षेत्र के निर्माण का पैरोकार है, जो आतंकवाद और अलगाववाद की समस्या से पूरी तरह मुक्त हो।

भारत की ओर से यह साफ कर दिया गया है कि मध्य एशिया के साथ कूटनीतिक और व्यापारिक रिश्ते मजबूत करने के साथ-साथ क्षेत्रीय सुरक्षा, उग्रवाद के खिलाफ साझा कार्रवाई और बेहतर संपर्क (Connectivity) इस पूरे दौरे के एजेंडे में प्रमुखता से शामिल रहेंगे।