अब्दुल अल सैयद: US सीनेट पहुंचने वाले पहले मुस्लिम की प्रोफाइल और भारत से कनेक्शन
अमेरिका के संसदीय इतिहास में पहली बार कोई मुस्लिम नेता सीनेट (उच्च सदन) में पहुंचा है। मिशिगन राज्य से डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार अब्दुल अल सैयद ने डोनाल्ड ट्रंप समर्थित रिपब्लिकन उम्मीदवार माइक रोजर्स को हराकर यह ऐतिहासिक जीत दर्ज की है। इस जीत के साथ ही वे डेमोक्रेट सीनेटर गैरी पीटर्स की जगह लेंगे।
इस सीट पर पूरे अमेरिका की नजर थी। पेशे से डॉक्टर और हेल्थ एक्सपर्ट रहे अब्दुल का सीधा नाता तो भारत से नहीं है, लेकिन उनकी पत्नी का परिवार कर्नाटक से जुड़ा हुआ है। चुनाव प्रचार के दौरान उन्हें डोनाल्ड ट्रंप के तीखे हमलों का भी सामना करना पड़ा था।
जन्म, शिक्षा और मेडिकल से राजनीति का सफर
अब्दुल रहमान मोहम्मद अल सैयद (जिन्हें अब्दुल अल सैयद के नाम से जाना जाता है) का जन्म और पालन-पोषण मिशिगन के मेट्रो डेट्रॉइट इलाके में हुआ। उनके पिता मोहम्मद मूल रूप से मिस्र (Egypt) के रहने वाले थे, जो बाद में अमेरिका में बस गए। उनकी सौतेली मां जैकलीन का परिवार लंबे समय से मिशिगन से जुड़ा हुआ है।
अब्दुल ने मिशिगन यूनिवर्सिटी से बायोलॉजी और राजनीति विज्ञान में ग्रेजुएशन किया। इसके बाद उन्होंने रोड्स स्कॉलर के तौर पर ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से पब्लिक हेल्थ में डॉक्टरेट (DPhil) की उपाधि हासिल की। 2014 में उन्होंने कोलंबिया यूनिवर्सिटी से मेडिकल की डिग्री (MD) पूरी की। हालांकि वह लाइसेंस प्राप्त प्रैक्टिस करने वाले डॉक्टर नहीं हैं।
राजनीति में कदम रखने से पहले अब्दुल ने कोलंबिया यूनिवर्सिटी में महामारी विज्ञान (Epidemiology) के एसोसिएट प्रोफेसर के तौर पर काम किया। 2015 में उन्हें डेट्रॉइट सिटी के हेल्थ डिपार्टमेंट का कार्यकारी निदेशक नियुक्त किया गया, जिससे वह किसी बड़े अमेरिकी शहर के सबसे युवा हेल्थ अधिकारियों में से एक बन गए। हाल ही में उन्होंने 2022 से 2025 तक वेन काउंटी के डिपार्टमेंट ऑफ हेल्थ के निदेशक के रूप में भी सेवाएं दीं।
क्या है अब्दुल का भारत (कर्नाटक) कनेक्शन?
अब्दुल सैयद का भारत से सीधा कोई संबंध नहीं है, लेकिन उनकी पत्नी सारा जुकाकू भारतीय मूल की हैं। सारा पेशे से एक मनोचिकित्सक (Psychiatrist) हैं और दोनों की मुलाकात मिशिगन में पढ़ाई के दौरान हुई थी। उनकी दो बेटियां हैं।
सारा जुकाकू का परिवार भारत के कर्नाटक राज्य से ताल्लुक रखता है। उनका पैतृक जुड़ाव मंगलुरु के आसपास के क्षेत्र से है। सारा, शमसुद्दीन जुकाकू की पोती हैं, जिन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री बीडी जत्ती के कार्यकाल में मैसूर राज्य (अब कर्नाटक) में वित्त उप मंत्री (Deputy Minister for Finance) के रूप में कार्य किया था।
ट्रंप ने लगाए थे ‘जिहादी’ होने के आरोप, अब्दुल का करारा जवाब
चुनाव प्रचार के दौरान पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अब्दुल अल सैयद पर तीखे राजनीतिक और व्यक्तिगत हमले किए थे। ट्रंप ने उन्हें वामपंथी और ‘जिहादी’ करार दिया था और जानबूझकर उनके नाम में ‘मोहम्मद’ पर जोर दिया था।
ट्रंप के इन हमलों का अब्दुल ने बेबाकी से जवाब दिया था। उन्होंने पलटवार करते हुए कहा था, “मुझे इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि वह (ट्रंप) मेरा नाम कैसे बोलते हैं। मुझे इसकी भी परवाह नहीं है कि उन्हें मेरा नाम याद है या नहीं। क्योंकि चुनाव (नवंबर) के बाद तो वो मुझे सीनेटर कहकर ही बुलाएंगे। तो भाई, आपके लिए मैं ‘सीनेटर मोहम्मद’ हूं।”
अब्दुल की इस जीत को अमेरिका में एक बड़े राजनीतिक बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। अपने प्रगतिशील विचारों, हेल्थ सेक्टर में किए गए काम और बराक ओबामा व कमला हैरिस जैसी शीर्ष डेमोक्रेटिक लीडरशिप के समर्थन ने उनकी इस ऐतिहासिक जीत में अहम भूमिका निभाई है।
