जानिए कैसे कनॉट प्लेस के ऐतिहासिक ‘सुपर बाजार’ की लौटेगी रौनक
नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (एनडीएमसी) ने कनॉट प्लेस के शंकर मार्केट के पास स्थित ऐतिहासिक और कभी दिल्ली की पहचान रहे मशहूर ‘सुपर बाजार’ इमारत को फिर से आधुनिक रूप देने की तैयारी शुरू कर दी है। अधिकारियों ने बुधवार को जानकारी देते हुए बताया कि इस कदम का मुख्य उद्देश्य निजी निवेश को आकर्षित करना और नगर निकाय की इस प्रमुख संपत्ति से गैर-कर राजस्व का एक स्थायी स्रोत जुटाना है।
विशेषज्ञ सलाहकार समूह की नियुक्ति प्रक्रिया शुरू
अधिकारियों के मुताबिक, एनडीएमसी ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए एक विशेषज्ञ सलाहकार समूह की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह सलाहकार समूह इमारत की वर्तमान स्थिति का आकलन करेगा, इसके सर्वोत्तम व्यावसायिक उपयोग की संभावनाएं तलाशेगा, और संपत्ति का मूल्य निर्धारण करेगा। साथ ही, यह समूह यह भी सुनिश्चित करेगा कि क्या मौजूदा ढांचे को पूरी तरह तोड़े बिना ही इसका पुनर्विकास किया जा सकता है। यह टीम एक उपयुक्त डेवलपर चुनने की प्रक्रिया की निगरानी भी करेगी।
कभी दिल्ली की शान था ‘सुपर बाजार’
सुपर बाजार कभी दिल्ली के सबसे जाने-माने शॉपिंग स्थलों में से एक हुआ करता था। इसे 1966 में एक सहकारी डिपार्टमेंट स्टोर के रूप में स्थापित किया गया था। यह वह दौर था जब सुपर बाजार खरीदारों की पहली पसंद बन गया था, क्योंकि यहां एक ही छत के नीचे किराने का सामान, कपड़े, घरेलू वस्तुएं और रोजमर्रा की जरूरत की हर चीज आसानी से मिल जाती थी।
कनॉट प्लेस के बीचों-बीच स्थित इस स्टोर ने दशकों तक ग्राहकों को अपनी ओर आकर्षित किया। हालांकि, बाद में आर्थिक परेशानियों, खराब प्रबंधन और कारोबार में आई गिरावट के चलते इसके कामकाज पर बुरा असर पड़ा और अंततः 2002 में इसे बंद करना पड़ा। इसके बंद होने के साथ ही दिल्ली के शॉपिंग इतिहास का एक अहम अध्याय समाप्त हो गया था, लेकिन यह इमारत आज भी कनॉट प्लेस की एक बड़ी विशेषता बनी हुई है।
पीपीपी मॉडल पर होगा विकास
नगर निकाय ने इस परियोजना को अमलीजामा पहनाने के लिए जुलाई 2025 में तकनीकी और वित्तीय लेनदेन सलाहकारों के चयन के लिए एक सार्वजनिक नोटिस जारी किया था। इस पूरी कवायद का उद्देश्य एक सार्वजनिक-निजी साझेदारी (पीपीपी) मॉडल तैयार करना है।
एनडीएमसी के प्रस्ताव के तहत, नियुक्त किया जाने वाला सलाहकार समूह लगभग 33 हफ्तों (करीब 8 महीने) के भीतर शुरुआती आकलन, मूल्यांकन और बोली लगाने की प्रक्रिया को पूरा करेगा। इस दौरान संपत्ति की व्यावसायिक संभावनाओं का आकलन कर इसका बाजार मूल्य तय किया जाएगा और इसे सबसे अधिक बोली लगाने वाले डेवलपर को पट्टे या लाइसेंस पर देने के लिए नियम और शर्तें तैयार की जाएंगी।
आधुनिक ‘मार्केट कॉम्प्लेक्स’ बनाने का लक्ष्य
एनडीएमसी ने इस पूरी परियोजना के संबंध में नगर निकाय के समक्ष प्रस्तुत किए जाने वाले एक व्यापक प्रस्ताव को जनवरी 2026 में अंतिम रूप दिया था। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि एनडीएमसी का मुख्य लक्ष्य इस पुरानी और खाली पड़ी संपत्ति को एक आधुनिक ‘मार्केट कॉम्प्लेक्स’ के रूप में विकसित करना है, जिससे नगर पालिका के लिए एक मजबूत राजस्व मॉडल तैयार हो सके।
