September 15, 2026

भारत के लिए बड़ी राहत: रूस से कच्चा तेल खरीदने पर लगने वाला 100% टैरिफ का खतरा टला

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रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक अतिरिक्त टैरिफ लगाने की तलवार फिलहाल टलती नजर आ रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को रूस पर नए प्रतिबंध लगाने और टैरिफ शक्तियां देने वाला यह बिल नवंबर से पहले प्रतिनिधि सभा (House of Representatives) में पास होने में मुश्किलों का सामना कर रहा है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी सीनेट से भारी बहुमत से मंजूर हो चुका यह बिल अब प्रतिनिधि सभा में बढ़ते राजनीतिक विरोध के कारण अटक सकता है।

बिल को लेकर अमेरिकी सांसदों में क्यों है चिंता? अमेरिकी संसद के दोनों दलों के सांसदों के बीच इस बात को लेकर चिंता बढ़ रही है कि यह कानून राष्ट्रपति ट्रंप को टैरिफ लगाने की असीमित और व्यापक शक्तियां दे सकता है। इसके अलावा, सांसदों को यह भी डर है कि रूस या अन्य बड़े खरीदारों पर कड़े प्रतिबंध लगाने से अमेरिकी बाजार में तेल और गैस की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं, जो नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनावों से पहले रिपब्लिकन पार्टी के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकता है।

क्या है रूस पर प्रतिबंध लगाने वाला यह बिल? दक्षिण कैरोलिना के दिवंगत सीनेटर लिंडसे ग्राहम द्वारा पेश किए गए इस प्रस्तावित कानून के तहत ट्रंप को उन पांच बड़े देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार मिल सकता है, जो रूस से कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस खरीदते हैं या मॉस्को को ऊर्जा प्रतिबंधों से बचने में मदद करते हैं। वर्तमान में चीन, भारत और तुर्किये रूस से पेट्रोलियम उत्पाद आयात करने वाले सबसे बड़े देशों में शामिल हैं।

यूक्रेन समर्थक सांसद इस बिल को रूस पर लगातार दबाव बनाए रखने का एक अहम जरिया मान रहे हैं। हालांकि, सीनेट में 86-11 के भारी बहुमत से पास होने के बावजूद हाउस स्पीकर माइक जॉनसन ने संकेत दिया है कि 3 नवंबर के चुनावों से पहले इसे प्रतिनिधि सभा में मतदान के लिए लाना आसान नहीं होगा, क्योंकि डेमोक्रेट और रिपब्लिकन दोनों खेमों में इसे लेकर मतभेद बने हुए हैं।