UP Chunav: अमरोहा की 4 सीटों पर सपा और बीजेपी में बराबर की टक्कर, समझें पूरा सियासी गणित
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के रुहेलखंड और गंगा-यमुना दोआब के बीच स्थित अमरोहा जिले की राजनीति हमेशा से प्रदेश की सत्ता के समीकरणों पर गहरा असर डालती रही है। विश्वप्रसिद्ध ढोलक, आम की मिठास और हज़रत शाह विलायत साहब की ऐतिहासिक सरज़मीं के रूप में पहचान रखने वाला यह जिला चुनावी लिहाज से बेहद जागरूक माना जाता है। जिले की 4 विधानसभा सीटों—अमरोहा, नौगावां सादात, धनौरा (सुरक्षित) और हसनपुर—पर सभी प्रमुख दलों की सियासी तैयारियां शुरू हो चुकी हैं।
2022 के विधानसभा चुनाव में जिले का जनादेश पूरी तरह बराबरी पर छूटा था, जहां समाजवादी पार्टी (SP) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) दोनों ने 2-2 सीटों पर जीत दर्ज की थी।
2022 का चुनावी परिणाम: दो पर साइकिल, दो पर खिला कमल
2022 के विधानसभा चुनाव में जिले की चारों सीटों पर मुकाबला मुख्य रूप से सपा और भाजपा के बीच ही सिमटा रहा, जबकि बहुजन समाज पार्टी (BSP) तीसरे स्थान पर रही थी।
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अमरोहा (41): सपा के वरिष्ठ नेता महबूब अली को 1,28,735 वोट मिले, जबकि भाजपा के राम सिंह 57,699 वोटों के साथ दूसरे स्थान पर रहे। बसपा के मोहम्मद नावेद अयाज को 34,585 वोट मिले। महबूब अली ने यहां बड़े अंतर से जीत दर्ज कर इस सीट को सपा का मजबूत दुर्ग बनाए रखा।
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नौगावां सादात (40): बेहद करीबी और कांटे के मुकाबले में सपा के समरपाल सिंह ने 1,08,497 वोट हासिल कर भाजपा के देवेंद्र नागपाल (1,01,957 वोट) को शिकस्त दी। बसपा के शादाब खान 28,683 वोटों के साथ तीसरे नंबर पर रहे।
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धनौरा (SC) (39): जिले की इस एकमात्र आरक्षित सीट पर भाजपा के राजीव कुमार (तरार) ने 1,03,054 वोट पाकर जीत दर्ज की। उन्होंने सपा के विवेक सिंह (91,629 वोट) को हराया, जबकि बसपा के हरपाल सिंह को 43,974 वोट मिले।
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हसनपुर (42): गंगा किनारे स्थित हसनपुर सीट पर भाजपा के महेंद्र सिंह खड़गवंशी ने 1,20,135 वोट हासिल किए और सपा के मुख्य गुर्जर (97,753 वोट) को पराजित किया। बसपा के फिरे राम को 36,150 वोट मिले।
आबादी और सामाजिक ताने-बाने के आंकड़े
अमरोहा जिले की राजनीति में सामाजिक समीकरण बेहद अहम भूमिका निभाते हैं। 2011 की जनगणना के अनुसार, जिले की कुल जनसंख्या 18,40,221 है, जिसमें 9,63,449 पुरुष और 8,76,772 महिलाएं शामिल हैं। जिले की औसत साक्षरता दर 65.7% है (पुरुष साक्षरता 66.73% और महिला साक्षरता 57.61%)।
धार्मिक आंकड़ों पर नजर डालें तो जिले में:
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हिंदू आबादी: 58.44%
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मुस्लिम आबादी: 40.78%
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ईसाई: 0.30%
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सिख: 0.20%
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जैन: 0.03%
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बौद्ध: 0.01%
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अन्य: 0.24%
यहां मुस्लिम, दलित और किसान मतदाताओं की बड़ी तादाद चुनावी नतीजों को तय करने में सबसे महत्वपूर्ण कारक साबित होती है।
चारों सीटों की जमीनी सियासी बनावट
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अमरोहा सदर: मुस्लिम और दलित बाहुल्य यह सीट लंबे समय से समाजवादी पार्टी का अभेद्य किला बनी हुई है, जहां महबूब अली का व्यक्तिगत प्रभाव मजबूत रहा है।
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नौगावां सादात: ऐतिहासिक रूप से संवेदनशील यह सीट बेहद कड़े मुकाबलों के लिए जानी जाती है। पिछले चुनाव में जीत-हार का फासला काफी कम रहा था।
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धनौरा (SC): ग्रामीण मतदाताओं के प्रभाव वाली इस आरक्षित सीट पर भाजपा के राजीव कुमार तरार ने पकड़ बनाई है, जहां दलित और किसान वर्ग की लामबंदी निर्णायक रहती है।
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हसनपुर: गंगा खादर क्षेत्र से जुड़ी यह सीट राजनीतिक रूप से काफी सक्रिय है। 2022 में भाजपा के महेंद्र सिंह खड़गवंशी ने यहां पार्टी का परचम लहराया था।
गन्ना भुगतान, खादर का कटान और स्थानीय मुद्दे
अमरोहा के चुनावी विमर्श में स्थानीय समस्याओं की भूमिका हमेशा प्रमुख रहती है। गन्ना बेल्ट होने के कारण गन्ना मूल्य में बढ़ोतरी और मिलों से समय पर भुगतान किसानों का सबसे बड़ा मुद्दा है। इसके अलावा ऐतिहासिक ढोलक व हस्तशिल्प उद्योग को सरकारी प्रोत्साहन और वैश्विक बाजार उपलब्ध कराना, गजरौला औद्योगिक क्षेत्र का विस्तार, बेहतर स्वास्थ्य और शिक्षा की व्यवस्था चुनावी चर्चा के केंद्र में रहते हैं। वहीं गंगा किनारे बसे हसनपुर और खादर क्षेत्र के गांवों में हर साल बाढ़ और जमीन कटान की समस्या भी राजनीतिक बहसों का अहम हिस्सा बनती है।
