UP MLC चुनाव नतीजे: दांव पर सपा के नेता प्रतिपक्ष की कुर्सी, पद बचाने के लिए हर हाल में जीतनी होंगी 3 सीटें
उत्तर प्रदेश विधान परिषद (MLC) की 11 सीटों के लिए आज (27 अक्टूबर) मतगणना हो रही है। इन चुनावी नतीजों पर सभी की निगाहें टिकी हैं, लेकिन समाजवादी पार्टी (SP) के लिए यह चुनाव बेहद अहम होने वाला है। उच्च सदन में अपना नेता प्रतिपक्ष का पद बचाए रखने के लिए सपा को इस चुनाव में कम से कम तीन सीटों पर जीत दर्ज करनी होगी। अगर ऐसा नहीं होता है, तो विधान परिषद में पार्टी से यह महत्वपूर्ण पद छिन जाएगा।
क्या है विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष का गणित?
यूपी विधान परिषद में कुल सदस्यों की संख्या 100 है, जिनमें से वर्तमान समय में एक पद खाली है। सदन के नियमों के मुताबिक, मुख्य विपक्षी दल को नेता प्रतिपक्ष का पद हासिल करने के लिए कुल सदस्य संख्या का कम से कम 10 प्रतिशत होना अनिवार्य है। इस लिहाज से देखा जाए तो नेता प्रतिपक्ष पद के लिए विपक्ष के पास कम से कम 10 एमएलसी (MLC) होने चाहिए।
6 दिसंबर को खत्म हो रहा 3 सदस्यों का कार्यकाल
मौजूदा समय में विधान परिषद के भीतर समाजवादी पार्टी के पास ठीक 10 सदस्य हैं। लेकिन पार्टी के तीन मौजूदा सदस्यों— मान सिंह यादव, आशुतोष सिन्हा और लाल बिहारी यादव का कार्यकाल आगामी 6 दिसंबर को खत्म होने जा रहा है। इन सदस्यों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद उच्च सदन में सपा सदस्यों की संख्या घटकर सिर्फ 7 रह जाएगी। यही वजह है कि पार्टी को अपनी न्यूनतम संख्या (10) बरकरार रखने के लिए इन तीन सीटों की भरपाई करना जरूरी है।
पुराने चेहरों पर ही सपा का दांव
नेता प्रतिपक्ष की कुर्सी बचाने की इस चुनौती के बीच समाजवादी पार्टी ने अपने इन तीनों निवर्तमान सदस्यों को ही एक बार फिर से चुनावी मैदान में उतारा है। नियमों के अनुसार, सपा को उच्च सदन में अपने 10 सदस्यों का आंकड़ा बनाए रखने के लिए कम से कम तीन सीटों पर जीत दर्ज करनी होगी।
राज्य की इन 11 एमएलसी सीटों के लिए 23 अक्टूबर को मतदान हुआ था, जिसकी मतगणना आज चल रही है। आज घोषित होने वाले चुनाव परिणाम ही यह तय करेंगे कि समाजवादी पार्टी विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष का अपना पद बरकरार रख पाती है या नहीं।
