UP चुनाव 2027: बिजनौर में कांटे की टक्कर, ‘300 वोट’ वाले अंतर और चंद्रशेखर आजाद के प्रभाव से बदलेगा सियासी गणित?
उत्तर प्रदेश का बिजनौर जिला राजनीतिक रूप से हमेशा से दिलचस्प रहा है। यह यूपी के उन जिलों में शुमार है जहां करीब आधी आबादी मुस्लिम समुदाय की है। इसके साथ ही दलित, जाट, सैनी और चौहान जैसी बिरादरियां हर सीट का चुनावी गणित तय करती हैं। 2022 के विधानसभा चुनाव में बिजनौर की आठ सीटों पर मुकाबला इतना कड़ा था कि समाजवादी पार्टी (SP) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने चार-चार सीटें बांटीं। दिलचस्प बात यह है कि तीन सीटों का फैसला 300 वोटों से भी कम के अंतर से हुआ था। 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले जिले का राजनीतिक परिदृश्य और जातीय समीकरण एक बार फिर चर्चा में है।
मुस्लिम और हिंदू आबादी का संतुलन
2011 की जनगणना के अनुसार, बिजनौर की कुल आबादी करीब 36.83 लाख है, जिसमें 19.21 लाख पुरुष और 17.61 लाख महिलाएं हैं। जिले की साक्षरता दर 68 प्रतिशत है। यहां की 75 प्रतिशत आबादी गांवों में बसती है। धार्मिक आधार पर देखें तो हिंदू आबादी करीब 55 प्रतिशत और मुस्लिम आबादी करीब 43 प्रतिशत है। 1.4 प्रतिशत सिख समुदाय भी यहां निवास करता है। यही सामाजिक संतुलन जिले की राजनीति की मुख्य धुरी है।
2022 विधानसभा चुनाव के बेहद करीबी नतीजे
बिजनौर जिले में कुल आठ विधानसभा सीटें हैं—नजीबाबाद, नगीना (सुरक्षित), बढ़ापुर, धामपुर, नहटौर (सुरक्षित), बिजनौर, चांदपुर और नूरपुर। 2022 के नतीजे कुछ इस प्रकार रहे:
-
धामपुर: सबसे करीबी मुकाबला यहीं देखने को मिला। भाजपा के अशोक कुमार राणा ने सपा के नईम उल हसन को महज 203 वोटों से हराया।
-
चांदपुर: सपा के स्वामी ओमवेश ने भाजपा की तत्कालीन विधायक कमलेश सैनी को सिर्फ 234 वोटों से मात दी।
-
नहटौर (सुरक्षित): भाजपा के ओम कुमार ने रालोद (RLD) के मुंशीराम को केवल 258 वोटों से हराया।
-
बिजनौर: भाजपा की सूची मौसम चौधरी ने रालोद के नीरज चौधरी को 1,445 वोटों से शिकस्त दी।
-
नजीबाबाद: सपा के तसलीम अहमद ने भाजपा के राजा भारतेंद्र सिंह को करीब 23,770 वोटों से हराया।
-
नगीना (सुरक्षित): सपा के मनोज कुमार पारस ने भाजपा के डॉ. यशवंत सिंह को 26 हजार से अधिक वोटों से हराकर जिले की सबसे बड़ी जीत दर्ज की।
-
बढ़ापुर: भाजपा के कुंवर सुशांत सिंह ने सपा के कपिल कुमार को 14,345 वोटों से हराया।
-
नूरपुर: सपा के राम अवतार सिंह ने भाजपा के सीपी सिंह को 6,065 वोटों से मात दी।
कभी BSP का था गढ़, अब नए मोड़ों पर राजनीति
बिजनौर लंबे समय तक बसपा की दलित-मुस्लिम राजनीति का केंद्र रहा है। 1989 में मायावती पहली बार यहीं से सांसद चुनी गई थीं और 2019 में भी बिजनौर व नगीना लोकसभा सीटें बसपा के खाते में गई थीं। 2017 की लहर में भाजपा ने जिले की आठ में से छह सीटें जीतीं, लेकिन 2022 में मुकाबला 4-4 की बराबरी पर आ गया।
अब 2024 के लोकसभा चुनाव परिणामों ने 2027 के लिए नए समीकरण पैदा कर दिए हैं। नगीना लोकसभा सीट से आजाद समाज पार्टी (ASP) के चंद्रशेखर आजाद ने 1.51 लाख से अधिक वोटों के अंतर से जीत दर्ज की है। वहीं, बिजनौर लोकसभा सीट एनडीए के सहयोगी रालोद (चंदन चौहान) के खाते में गई है। चंद्रशेखर आजाद के अकेले चुनाव लड़ने के ऐलान और रालोद के एनडीए में शामिल होने से सपा और भाजपा दोनों के चुनावी समीकरणों पर बड़ा असर पड़ना तय है।
बिजनौर की सीटों का जातीय गणित
-
नजीबाबाद: मुस्लिम (करीब 1 लाख), दलित (50 हजार), जाट (30 हजार), रवा राजपूत (15 हजार)।
-
नगीना (सुरक्षित): मुस्लिम (1.30 लाख), दलित (80 हजार), सैनी (35 हजार), जाट (20 हजार)।
-
बढ़ापुर: मुस्लिम, राजपूत, गुर्जर और दलित मतदाताओं का मिला-जुला प्रभाव।
-
धामपुर: ठाकुर, दलित और मुस्लिम प्रमुख हैं; चौहान समाज (करीब 30 हजार)।
-
नहटौर (सुरक्षित): मुस्लिम (80 हजार), दलित (70 हजार), चौहान और सैनी (35-35 हजार), जाट (30 हजार)।
-
बिजनौर: मुस्लिम (1 लाख), जाट (70 हजार), दलित (50 हजार), सैनी (25 हजार), राजपूत (22 हजार)।
-
चांदपुर: मुस्लिम (1.25 लाख), दलित (48 हजार), जाट (35 हजार), सैनी व चौहान (25-25 हजार)।
-
नूरपुर: मुस्लिम (1 लाख), ठाकुर-चौहान (33 हजार), दलित (30 हजार), सैनी (17 हजार)।
