मुजफ्फरनगर की 6 विधानसभा सीटों का गणित, RLD के NDA में जाने से बदलेगा समीकरण?

yogi-adityanath-akhilesh-yadav-1751339471

पश्चिमी उत्तर प्रदेश का ‘शुगर बाउल’ (Sugar Bowl) कहे जाने वाले मुजफ्फरनगर जिले की राजनीति पर हमेशा पूरे राज्य की नजर रहती है। गन्ने की खेती, जाट-मुस्लिम समीकरण और 2013 के दंगों के बाद की राजनीति ने यहां के चुनावी इतिहास को बेहद दिलचस्प बना दिया है। 2017 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने यहां ‘क्लीन स्वीप’ करते हुए सभी छह सीटों पर कब्जा जमाया था। लेकिन 2022 में समाजवादी पार्टी (SP) और राष्ट्रीय लोकदल (RLD) के गठबंधन ने बाजी पलट दी और चार सीटें अपने नाम कर लीं।

अब 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले जिले का राजनीतिक परिदृश्य पूरी तरह बदल चुका है। जयंत चौधरी के नेतृत्व वाली RLD अब राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) का हिस्सा है और केंद्र सरकार में मंत्री हैं। ऐसे में 2027 में मुजफ्फरनगर की सभी छह सीटों—मुजफ्फरनगर सदर, पुरकाजी, चरथावल, बुढ़ाना, खतौली और मीरापुर—पर इस नए गठबंधन का क्या असर होगा, यह देखना बेहद दिलचस्प होगा।

1. मुजफ्फरनगर सदर: भाजपा का मजबूत किला

मुजफ्फरनगर सदर सीट उन दो सीटों में शामिल है, जिन्हें भाजपा 2022 की लहर में भी बचाने में कामयाब रही थी। भाजपा के कपिल देव अग्रवाल ने 2017 में सपा के गौरव स्वरूप को करीब 14 हजार वोटों से हराया था और 2022 में भी अपनी जीत का सिलसिला बरकरार रखा। 2027 में विपक्ष के सामने इस सीट को भेदने की बड़ी चुनौती होगी।

2. पुरकाजी: 2022 में RLD ने मारी थी बाजी

2017 में भाजपा के प्रमोद ऊंटवाल ने कांग्रेस को 11 हजार से ज्यादा वोटों से हराकर यह सीट जीती थी। लेकिन 2022 में RLD के अनिल कुमार ने 92,672 वोट हासिल कर प्रमोद ऊंटवाल (86,140 वोट) को 6,532 वोटों के अंतर से शिकस्त दी। अब 2027 में RLD के भाजपा के साथ होने से यहां के राजनीतिक समीकरण पूरी तरह नए होंगे।

3. चरथावल: सपा ने भाजपा से छीनी थी सीट

2017 में भाजपा के विजय कश्यप ने सपा को बड़े अंतर (23,231 वोट) से हराया था। लेकिन 2022 में सपा के पंकज मलिक ने 97,363 वोट प्राप्त कर भाजपा की सपना कश्यप को 5,334 वोटों के कड़े मुकाबले में हरा दिया। 2027 में रालोद के एनडीए में शामिल होने के बाद सपा के लिए यह सीट बचाना एक चुनौती हो सकता है।

4. बुढ़ाना: RLD की सबसे बड़ी जीत

2017 में भाजपा के उमेश मलिक ने इस सीट पर जीत दर्ज की थी। लेकिन 2022 में रालोद के राजपाल बालियान ने 1,31,093 वोट पाकर उमेश मलिक को 28,310 वोटों के भारी अंतर से हरा दिया। यह हार जिले में चुनावी बदलाव का सबसे बड़ा उदाहरण थी। 2027 में इस सीट पर रालोद-भाजपा गठबंधन का असर देखने लायक होगा।

5. खतौली: सपा-RLD लहर में भी अडिग रही भाजपा

खतौली दूसरी ऐसी सीट थी, जिसे भाजपा 2017 और 2022 दोनों में जीतने में सफल रही। 2022 में भाजपा के विक्रम सैनी (1,00,651 वोट) ने रालोद के राजपाल सैनी (84,306 वोट) को 16,345 वोटों से हराया था। हालांकि बाद में हुए उपचुनाव में रालोद के मदन भैया ने यह सीट जीत ली थी।

6. मीरापुर: कांटे की टक्कर से लेकर एकतरफा जीत तक

2017 में भाजपा के अवतार सिंह भड़ाना ने सपा के लियाकत अली को केवल 193 वोटों के मामूली अंतर से हराया था। लेकिन 2022 में रालोद के चंदन चौहान ने 1,07,421 वोट हासिल कर भाजपा के प्रशांत चौधरी को 27,380 वोटों के बड़े अंतर से मात दी।

किसान राजनीति और 2027 का माहौल

मुजफ्फरनगर की राजनीति केवल जाति या धर्म तक सीमित नहीं है। यहां गन्ने का भुगतान और कृषि नीतियां बड़े चुनावी मुद्दे रहते हैं। हाल ही में 2024 के लोकसभा चुनाव में सपा के हरेंद्र सिंह मलिक ने भाजपा के दिग्गज संजीव बालियान को हराकर यह साबित कर दिया है कि यहां कोई भी समीकरण स्थायी नहीं है।

2027 में RLD और BJP का गठबंधन क्या 2017 जैसा परिणाम दोहरा पाएगा, या सपा किसानों और स्थानीय मुद्दों के दम पर अपनी जमीन बचा लेगी? इसका फैसला उम्मीदवारों के चयन और गन्ना किसानों के रुझान पर निर्भर करेगा।