बलरामपुर की 4 सीटों का सियासी समीकरण, 2022 के नतीजों से लेकर PDA दांव तक की पूरी पड़ताल

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नेपाल सीमा से सटा बलरामपुर जिला अपने ऐतिहासिक देवीपाटन शक्तिपीठ और राजसी इतिहास के साथ-साथ प्रदेश की सियासत में भी खास पहचान रखता है। जिले में हिंदू और मुस्लिम मतदाताओं का अनुपात हर चुनाव में मुकाबलों को बेहद करीबी बना देता है। 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच जिले की चारों सीटों पर राजनीतिक दलों की सक्रियता बढ़ गई है। मौजूदा स्थिति में यहां की चार सीटों में से तीन पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) और एक पर समाजवादी पार्टी (SP) का कब्जा है।

2022 के नतीजे: तीन सीटों पर भाजपा जीती, तुलसीपुर में दर्ज हुई सबसे बड़ी जीत

2022 के विधानसभा चुनाव में जिले की चार में से तीन सीटें भाजपा की झोली में गई थीं, जबकि एक सीट सपा ने जीती थी:

  • तुलसीपुर: भाजपा के कैलाशनाथ शुक्ला ने निर्दलीय प्रत्याशी जेबा रिजवान को करीब 36 हजार वोटों के भारी अंतर से हराया था। यह पूरे जिले में जीत का सबसे बड़ा अंतर दर्ज किया गया था।

  • उतरौला: भाजपा के रामप्रताप वर्मा (शशिकांत वर्मा) ने सपा के हसीब खान को 21,769 मतों से पराजित किया था।

  • बलरामपुर (सदर सुरक्षित): भाजपा के पलटू राम ने सपा के जगराम पासवान को 10,971 वोटों के अंतर से शिकस्त दी थी।

  • गैंसड़ी: सपा के डॉ. शिव प्रताप यादव ने भाजपा के शैलेश कुमार सिंह ‘शैलू’ को 5,837 मतों से हराकर जीत हासिल की थी।

गैंसड़ी में सपा की जड़ें: 2017 का ‘क्लीन स्वीप’ और नवंबर 2024 का उपचुनाव

2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने जिले की सभी चारों सीटों पर जीत हासिल कर विपक्ष का पूरी तरह सफाया कर दिया था। हालांकि, 2022 के चुनाव में सपा ने गैंसड़ी सीट जीतकर भाजपा के इस एकतरफा दबदबे को तोड़ दिया। गैंसड़ी सीट लंबे समय से सपा का मजबूत गढ़ रही है, जहां से डॉ. शिव प्रताप यादव ने 1993, 2002 और 2012 में भी पार्टी के टिकट पर जीत दर्ज की थी। 2017 में भाजपा ने पहली बार इस सीट पर कब्जा जमाया था, लेकिन 2022 में सपा ने इसे फिर वापस हासिल कर लिया।

विधायक डॉ. शिव प्रताप यादव के निधन के बाद नवंबर 2024 में हुए उपचुनाव में सपा ने अपनी इस सीट पर दबदबा बरकरार रखा। उपचुनाव में सपा उम्मीदवार राकेश कुमार यादव ने भाजपा के शैलेश कुमार सिंह को 9,437 वोटों से हराया। इस जीत से सपा का मनोबल बढ़ा है, वहीं भाजपा 2027 में 2017 वाले प्रदर्शन को दोहराने के दावे के साथ मैदान में उतरने की रणनीति बना रही है।

जनसांख्यिकी: 62% हिंदू और 37% मुस्लिम आबादी, 92% ग्रामीण क्षेत्र

2011 की जनगणना के अनुसार, बलरामपुर जिले की कुल आबादी लगभग 21 लाख 49 हजार है, जिसमें पुरुषों की संख्या करीब 11 लाख 15 हजार और महिलाओं की संख्या लगभग 10 लाख 34 हजार है।

  • लिंगानुपात: जिले में प्रति हजार पुरुषों पर 928 महिलाएं हैं।

  • साक्षरता: कुल साक्षरता दर करीब 50 प्रतिशत दर्ज है। पुरुष साक्षरता 60 प्रतिशत और महिला साक्षरता करीब 38 प्रतिशत है।

  • धार्मिक समीकरण: जिले की धार्मिक आबादी में हिंदू वर्ग लगभग 62 प्रतिशत और मुस्लिम समुदाय करीब 37 प्रतिशत है।

  • आवासीय स्थिति: जिले की लगभग 92 प्रतिशत आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करती है।

चारों सीटों का जातीय ताना-बाना और सियासी हलचल

जिले की चार सीटों में से तीन सामान्य और एक सुरक्षित सीट है, जहां सामाजिक समीकरण सीधे नतीजों पर असर डालते हैं:

  • बलरामपुर (सुरक्षित): इस सीट पर मुस्लिम मतदाता सबसे बड़ा समूह हैं। इसके बाद कंहार, प्रजापति और गौड़ समुदाय की संख्या निर्णायक मानी जाती है।

  • तुलसीपुर: यहां ब्राह्मण, क्षत्रिय और मुस्लिम मतदाताओं का मिलाजुला प्रभाव रहता है।

  • गैंसड़ी: इस विधानसभा क्षेत्र में यादव और मुस्लिम मतदाताओं का पारंपरिक समीकरण लंबे समय से चुनावी हार-जीत की दिशा तय करता रहा है।

  • उतरौला: यह विधानसभा क्षेत्र जिले में सबसे अधिक मुस्लिम आबादी वाला इलाका है। इसके अलावा वर्मा समाज और अन्य पिछड़ी जातियां भी यहां सीधा असर रखती हैं।

अक्टूबर 2026 की शुरुआत में समाजवादी पार्टी ने बलरामपुर सदर सीट पर पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) महापंचायत का आयोजन किया। पार्टी नेताओं ने बूथ स्तर पर ढांचे को मजबूत करने और हर घर तक संपर्क अभियान चलाने पर जोर दिया, जिससे जिले के चुनावी समीकरणों में सरगर्मी और तेज हो गई है।