CJP प्रोटेस्ट से पहले दिल्ली में सख्त पहरा, 45 मेट्रो स्टेशन बंद और 245 ट्रेनें रद्द; दीपके बोले- प्रदर्शन होगा
नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे, मतदाता सूचियों से कथित तौर पर नाम हटाए जाने की जवाबदेही तय करने और एसआईआर (SIR) को रद्द करने की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने शनिवार को दिल्ली के जंतर-मंतर पर बड़े विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया है। इस आंदोलन को आम आदमी पार्टी (AAP), तृणमूल कांग्रेस (TMC) और वामपंथी दलों (Left) का खुला समर्थन मिला है। दिल्ली पुलिस द्वारा प्रदर्शन की अनुमति न दिए जाने के बावजूद सीजेपी ने सुबह 10 बजे जंतर-मंतर पहुंचने का ऐलान किया है, जिसके चलते राष्ट्रीय राजधानी को सुरक्षा छावनी में तब्दील कर दिया गया है।
‘जहां रोका जाएगा वही जंतर-मंतर होगा’: अभिजीत दीपके
CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके अपने सहयोगियों सौरभ दास, आशुतोष रांका और अन्य समर्थकों के साथ सुबह 9:30 बजे एयरपोर्ट पहुंचेंगे और वहां से जंतर-मंतर की ओर कूच करेंगे।
दीपके ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा, “जिंदगी जीने के दो ही तरीके होते हैं… एक जो हो रहा है, होने दो, बर्दाश्त करते जाओ… या फिर जिम्मेदारी उठाओ उसे बदलने की।” उन्होंने कहा कि वे जेल जाने के लिए तैयार हैं और प्रशासन उन्हें जहां भी रोकेगा, उनके लिए वही जगह जंतर-मंतर बन जाएगी।
23 हजार जवान, 75 ट्रेनें रद्द और 10 डिटेंशन सेंटर
सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए दिल्ली में करीब 23 हजार सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई है। नई दिल्ली और हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन आने वाली स्पेशल और मेल एक्सप्रेस ट्रेनों पर इसका सीधा असर पड़ा है। दोपहर 2 बजे तक 75 ट्रेनें रद्द कर दी गई हैं।
दिल्ली मेट्रो के 45 स्टेशनों पर प्रवेश और निकास पूरी तरह बंद कर दिया गया है। नई दिल्ली जिले में जंतर-मंतर के आसपास 4 किलोमीटर के दायरे में इंटरनेट सेवाएं निलंबित कर दी गई हैं और क्षेत्र में शराब की दुकानें बंद रखने के आदेश दिए गए हैं। प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने के लिए शहर भर में 10 अस्थायी डिटेंशन सेंटर भी बनाए गए हैं।
कनॉट प्लेस, जनपथ और जंतर-मंतर की ओर जाने वाली सड़कों पर 3 से 4 लेयर के मजबूत बैरिकेड्स लगाए गए हैं। संसद मार्ग की तरफ जाने वाला एक रास्ता पूरी तरह बंद कर पैदल यात्रियों को भी वापस भेजा जा रहा है। तैनात पुलिस अधिकारियों को बॉडीकैम दिए गए हैं और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) के वाहनों से निगरानी की जा रही है। इलाके में लाउडस्पीकर के जरिए धारा 163 लागू होने और जमावड़ा न लगाने की लगातार घोषणाएं की जा रही हैं।
दिल्ली पुलिस ने क्यों नहीं दी प्रदर्शन की इजाजत?
दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा और नियमों के उल्लंघन का हवाला देते हुए प्रदर्शन की अनुमति खारिज कर दी है:
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नियमानुसार किसी भी बड़े सार्वजनिक प्रदर्शन के लिए कार्यक्रम से कम से कम 10 दिन पहले आवेदन देना अनिवार्य होता है।
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सीजेपी की ओर से प्रदर्शन के लिए 7 अक्टूबर को आवेदन दिया गया, जो निर्धारित समय-सीमा के काफी बाद था।
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नई दिल्ली क्षेत्र में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू है और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी: ‘मक्खी मारने के लिए हथौड़े का इस्तेमाल न हो’
प्रशासनिक पाबंदियों और आम नागरिकों को हो रही दिक्कतों का मामला सुप्रीम कोर्ट भी पहुंचा। सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने प्रशासन के कदमों का बचाव करते हुए कहा कि 20 जून को एक दिन के प्रदर्शन की अनुमति ली गई थी, लेकिन प्रदर्शनकारी 17 दिनों तक डटे रहे और संसद की तरफ बढ़ने की कोशिश की, जिसमें 200 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए थे।
दलीलों को सुनने के बाद शीर्ष अदालत ने प्रशासन को संयम बरतने की नसीहत दी। अदालत ने टिप्पणी की कि मक्खी मारने के लिए हथौड़े का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। नागरिकों को सार्वजनिक परिवहन के इस्तेमाल का अधिकार है, इसलिए मेट्रो स्टेशनों और ट्रेनों को बंद करने के फैसले पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए ताकि आम लोगों को असुविधा न हो। अदालत ने ऐसे आयोजनों के लिए किसी बड़े वैकल्पिक स्थान पर विचार करने का भी सुझाव दिया।
नोएडा में 20 अक्टूबर तक धारा 163, चिल्ला बॉर्डर पर पहरा
दिल्ली में तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्धनगर (नोएडा) जिले में भी सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। नोएडा पुलिस ने आगामी त्योहारों, परीक्षाओं और किसान संगठनों के संभावित विरोध प्रदर्शनों को ध्यान में रखते हुए जिले में 20 अक्टूबर तक धारा 163 लागू कर दी है, जिसके तहत बिना अनुमति पांच या उससे अधिक लोगों के एक जगह जुटने पर रोक है।
दिल्ली-नोएडा को जोड़ने वाले चिल्ला बॉर्डर पर भारी बैरिकेडिंग की गई है ताकि उत्तर प्रदेश की तरफ से आने वाले प्रदर्शनकारियों के किसी भी जत्थे को सीमा पर ही रोका जा सके।
