अंदरूनी कलह और जातिगत असंतोष से निपटना बीजेपी के लिए बड़ी चुनौती
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में अब कुछ ही महीनों का समय शेष है और सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) राज्य में अनुकूल माहौल बनाए रखने के लिए पूरी ताकत झोंक रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लगातार जनसंपर्क और नई प्रशासनिक पहलों के जरिए मैदान में डटे हैं। वहीं, पार्टी का एक धड़ा युवाओं में रोजगार की कमी, प्रशासनिक असंतोष और गहराते जातिगत विभाजन जैसे संवेदनशील मुद्दों को लेकर सतर्क नजर आ रहा है।
युवाओं और रोजगार को साधने में जुटी योगी सरकार
रोजगार और युवाओं से जुड़ी चिंताओं को दूर करने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल के दिनों में कई बड़े नीतिगत कदम उठाए हैं:
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उत्तर प्रदेश आउटसोर्सिंग सर्विसेज कॉर्पोरेशन: 3.5 लाख आउटसोर्स कर्मियों और उनके परिवारों के हितों की सुरक्षा के लिए इस कॉर्पोरेशन का गठन किया गया।
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भर्ती अभियान: पुलिस और शिक्षक भर्तियों में तेजी लाई गई है, साथ ही छह महीने में एक लाख युवाओं को नियुक्ति पत्र देने का लक्ष्य तय किया गया है।
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उद्यमिता और इंटर्नशिप: ‘मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान’ और छात्रों के लिए स्टाइपेंड वाली कॉर्पोरेट इंटर्नशिप की शुरुआत की गई है।
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केंद्रीकृत परिवार कार्ड: ऐसे परिवारों की पहचान की जा रही है जिनमें किसी भी सदस्य के पास नियमित रोजगार नहीं है।
बीजेपी के सामने जातिगत समीकरण और आंतरिक चुनौतियां
सकारात्मक माहौल बनाने की कोशिशों के बीच बीजेपी के सामने सामाजिक और संगठनात्मक स्तर पर कुछ जटिलताएं भी उभर रही हैं:
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जातिगत विभाजन: पार्टी के भीतर यह चिंता व्यक्त की जा रही है कि ओबीसी समूहों में पार्टी के प्रति धारणा को लेकर सवाल उठ रहे हैं। वहीं उच्च जातियों में भी ठाकुर-ब्राह्मण समीकरण और मंत्रियों के बीच आपसी तालमेल को लेकर चर्चाएं हैं।
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यूजीसी नियमों पर असंतोष: उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता संबंधी नियमों को लेकर भी एक वर्ग में नाराजगी देखी गई है।
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रोजगार की गुणवत्ता (Underemployment): उच्च शिक्षित युवाओं का अपनी योग्यता से कम स्तर की नौकरियों में काम करना और भर्ती परीक्षाओं को लेकर जेन-ज़ी (Gen-Z) वर्ग में बेचैनी भी एक अहम मुद्दा है।
मजबूत पक्ष: कानून-व्यवस्था और महिला मतदाता
इन चुनौतियों के बावजूद, कानून-व्यवस्था के मोर्चे पर सरकार का कड़ा रुख और मुख्यमंत्री की व्यक्तिगत छवि पार्टी का सबसे मजबूत आधार बनी हुई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जनकल्याणकारी नीतियों के चलते महिला मतदाताओं के बीच बीजेपी की पकड़ काफी मजबूत मानी जा रही है, जिसे और सशक्त करने के लिए नई योजनाओं की तैयारी है।
विपक्ष का ताना-बाना और सीट-बंटवारे की पेच
विपक्षी खेमे में अखिलेश यादव का ‘पीडीए’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूला और राहुल गांधी का ‘जाति जनगणना’ व आरक्षण सीमा हटाने का नैरेटिव सरकार को घेरने की रणनीति का मुख्य हिस्सा है। हालांकि, समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच गठबंधन में सीटों के सुचारू बंटवारे को अंतिम रूप देना और आपसी समन्वय बनाए रखना विपक्ष के लिए भी एक बड़ी परीक्षा साबित होगा।
